Maharashtra: फिर साथ आएंगे अजित और शरद पवार? BJP से तल्खी के बीच चाचा कैंप से सीजफायर के संकेत!
Maharashtra News: महाराष्ट्र में सत्ताधारी महायुति गठबंधन में शामिल बीजेपी की सहयोगी एनसीपी को फिलहाल केंद्र की मोदी सरकार में जगह नहीं मिली है। दरअसल, लोकसभा चुनावों में महाराष्ट्र में इस बार भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए का प्रदर्शन बहुत ही निराशाजनक रहा है, जिसके चलते आपस में आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल पड़ा है।
लोकसभा चुनावों में मिली करारी हार के चलते सत्ताधारी गठबंधन में तो तल्खी बढ़ती जा रही है, लेकिन शरद पवार कैंप से भतीजे अजित पवार खेमे के लिए सहानुभूति के आंसू बहाए जाने लगे हैं।

लोकसभा चुनावों में हार, महायुति गठबंधन में दरार!
बीजेपी और आरएसएस से जुड़े कुछ लोगों ने गठबंधन के चुनावों में हुए बुरे हाल के लिए अजित पवार की एनसीपी पर दोषारोपण किया है। इसके बाद एनसीपी ने भी भाजपा और उसके नेताओं पर पलटवार शुरू कर दिया है।
अलग स्टैंड लेने के लिए सोचना पड़ेगा-एनसीपी
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की पार्टी एनसीपी ने भाजपा को यहां तक चेतावनी दी है कि अगर पार्टी चुनावी हार के लिए उसे दोष देना बंद नहीं करती तो वह 'अलग स्टैंड' लेने को भी बाध्य होगी।
एनसीपी के एक नेता आमोल मिटकरी ने कहा, 'हमें पता चला है कि बीजेपी विधायकों ने हार के लिए अजित पवार पर आरोप लगाया है। हमें ऐसे लोगों से कहना है कि अगर ये लोग जानबूझकर अजित पवार को निशाना बनाते रहेंगे, तब हमें अलग स्टैंड लेने के लिए सोचना पड़ेगा।'
एनसीपी इन दावों पर बिफरी हुई है कि बीजेपी के विधायकों ने पार्टी की रिव्यू मीटिंग में चुनाव में खराब प्रदर्शन के लिए अजित पवार के साथ गठबंधन पर ठीकरा फोड़ने की कोशिश की है।
बीजेपी के खिलाफ गुस्से से हमें हुआ नुकसान- एनसीपी नेता
पुणे में एनसीपी की एक और नेता रुपाली पाटिल ने राज्य में पार्टी के खराब प्रदर्शन के लिए भाजपा के नेताओं पर ही आरोप मढ़ दिया है। उन्होंने कहा, 'संघ के साथ क्या हुआ है, ये उनका अपना मुद्दा है। अजित पवार की वजह से (बीजेपी को) कोई नुकसान नहीं हुआ है। बल्कि, बीजेपी के खिलाफ गुस्से की वजह से शायद हमें नुकसान हुआ है....'
उनके अनुसार, 'भाजपा के नेता 400 पार और संविधान बदलने के बारे में कहते रहे....पिछड़े और ओबीसी समुदाय का बड़ा समूह अजित पवार के साथ है और हमने हालात को ठीक करने की भरपूर कोशिशें कीं, लेकिन बीजेपी में कुछ नेता ऐसे हैं जो कुछ भी बोलते हैं और इस वह से हमें नुकसान हुआ है।'
पाटिल की टिप्पणियों को इसलिए गंभीरता से लिया जा रहा है, क्योंकि उन्होंने अजित पवार से मिलने के कुछ देर बात ही इस तरह के बयान दिए हैं। उनका कहना है, 'हमारे गठबंधन में यहां तक कि शिवसेना भी मानती है कि इस चुनाव परिणाम की वजह बीजेपी के कुछ नेताओं का गैर-जिम्मेदाराना बयान है। '
अजित पवार से गठबंधन से बीजेपी को नहीं हुआ फायदा!
कहा जा रहा है कि भाजपा का आंतरिक मूल्यांकन ये है कि अजित पवार के साथ एनसीपी के बड़े नेता तो आ गए, लेकिन पार्टी के जमीनी कार्यकर्ता शरद गुट के साथ ही जुड़े रहे और इस चुनाव में उन्होंने भाजपा के खिलाफ काम किया। संघ के विचारधारा से जुड़े रतन शारदा को भी लगता है कि अजित पवार के साथ गठबंधन से भाजपा को कोई फायदा नहीं हुआ है।
शरद पवार कैंप से सीजफायर के संकेत!
बीजेपी और एनसीपी की किचकिच के बीच अजित पवार की पार्टी को चाचा शरद गुट की ओर से सीजफायर के संकेत मिल रहे हैं। एनसीपी-शरदचंद्र पवार भी चुनावों में हार के लिए अजित पवार को कसूरवार ठहराए जाने को लेकर बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
शरद गुट के नेता जितेन्द्र आव्हाड ने कहा, 'उन्हें (अजित पवार को) बलि का बकरा न बनाएं। इसके लिए भाजपा नेता खुद जिम्मेदार हैं, क्योंकि उन्होंने संविधान बदलने की बात की, जिसके चलते दलितों और अन्य समुदायों में डर पैदा हुआ। बीजेपी ने ही अल्पसंख्यक समुदाय को भी निशाना बनाया और वह समुदाय भी (बीजेपी के खिलाफ वोट देने के लिए) एकजुट हो गए।'
महाराष्ट्र की 48 लोकसभा सीटों में से एनडीए या महायुति को इस बार सिर्फ 17 सीटें मिली हैं। बीजेपी के खाते में 9, शिवसेना के 7 और एनसीपी के खाते में 1 सीट गई है। इस वजह से भाजपा ने मोदी सरकार में अजित गुट को सिर्फ एक राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के पद का औफर दिया था, लेकिन कैबिनेट मंत्री की चाहत में पार्टी फिलहाल मंत्रिपरिषद से भी दूर ही रह गई है।












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