Ajit Pawar Death: अजित पवार के निधन के तुरंत बाद सरकार का ऐलान, बारामती में होगा ये बड़ा काम

Ajit Pawar Death: महाराष्ट्र की राजनीति का 'पावर सेंटर' और 'जनता का दादा' खामोश हो गया है। डिप्टी सीएम अजित पवार के असामयिक निधन ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। उनके सम्मान में बारामती में एक भव्य स्मारक बनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। यह स्मारक अजित पवार के प्रशासनिक कौशल और उनके विकास कार्यों की याद दिलाता रहेगा।

अजित पवार का अंतिम संस्कार कल सुबह 11 बजे उनके पैतृक गांव काटेवाड़ी (बारामती) में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। उनके पार्थिव शरीर को आज शाम से ही विद्या प्रतिष्ठान के मैदान में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है।

Ajit pawar photo

महाराष्ट्र की राजनीति का 'अजेय चेहरा'
अजित पवार के बिना महाराष्ट्र की राजनीति की कल्पना करना मुश्किल है। वह राज्य के सबसे लंबे समय तक (अलग-अलग समय पर 6 बार) उपमुख्यमंत्री रहने वाले नेता थे। पृथ्वीराज चव्हाण से लेकर उद्धव ठाकरे, एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस तक-अजित पवार हर कैबिनेट का एक अनिवार्य हिस्सा रहे। उनकी कार्यशैली और सुबह 6 बजे से काम शुरू करने की उनकी ऊर्जा के विरोधी भी कायल थे।

NCP के भविष्य पर खड़े हुए बड़े सवाल
अजित पवार के जाने से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) और महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है। उनके निधन ने कई राजनीतिक सवाल खड़े कर दिए हैं:

  • पार्टी का विलय: क्या अजित पवार के गुट वाले 41 विधायक और सांसद अब वापस शरद पवार के साथ जाएंगे?
  • नया नेतृत्व: सुप्रिया सुले दिल्ली का चेहरा हैं, लेकिन ग्रामीण महाराष्ट्र में अजित पवार जैसा 'मास लीडर' और रणनीतिकार अब कौन होगा?
  • सत्ता का समीकरण: क्या महायुति गठबंधन में अजित पवार की जगह कोई अन्य नेता उनकी कमी को पूरा कर पाएगा?

एकजुट होता परिवार फिर अचानक मिली विदाई

पिछले कुछ समय से पवार परिवार के दोनों गुटों में सुलह के संकेत मिल रहे थे। हाल ही में अजित पवार ने पिंपरी-चिंचवाड़ चुनावों के दौरान 'परिवार के एक साथ आने' की घोषणा की थी। उनके निधन के बाद अब 83 वर्षीय शरद पवार के सामने बारामती की विरासत और पार्टी की कमान को संभालने की दोहरी चुनौती है।

परिवार और विरासत

अजित पवार अपने पीछे पत्नी सुनेत्रा पवार (राज्यसभा सांसद) और दो बेटों, पार्थ और जय पवार को छोड़ गए हैं। पार्थ राजनीति में एक्टिव रहे हैं, वहीं जय लो-प्रोफाइल रहना पसंद करते हैं। पीएम मोदी ने उन्हें 'जमीनी नेता' बताकर उन्हें याद किया।

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