MP News: कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा में कांग्रेस सांसद नकुलनाथ की क्यों हुई हार, जानिए यह पांच बड़े कारण

Chhindwara Lok Sabha Chunav 2024: मध्य प्रदेश में लोकसभा चुनाव के परिणाम अपेक्षाओं के विपरीत हों सकते हैं, लेकिन भाजपा ने एक ऐतिहासिक क्षण तोड़ा है। पहली बार, भाजपा ने प्रदेश की सभी 29 सीटों पर जीत परचम लहराया। यह घटना 1984 के चुनाव के बाद हुई है, जब मध्य प्रदेश अविभाजित था और कांग्रेस ने सभी 40 सीटों पर विजय दर्ज की थी।

भारतीय जनता पार्टी ने मध्य प्रदेश में सभी 29 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की हैं, लेकिन इसकी सबसे बड़ी जीत छिंदवाड़ा में हुई है। यहां से भाजपा के नगर अध्यक्ष विवेक बंटी साहू ने कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ को एक लाख से अधिक वोटों के अंतर से हराया।

Why Congress MP Nakul Nath lost in Kamal Nath s stronghold Chhindwara know these five big reasons

भाजपा ने आम चुनाव में कांग्रेस के छिंदवाड़ा किले पर कई दशकों बाद पहली बार ठिकाना बनाया है। हालांकि, यह दूसरी बार है जब छिंदवाड़ा से भाजपा का कोई नेता सांसद बना है, जिससे पहले 1997 में पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा ने कमलनाथ को हराया था।

छिंदवाड़ा को कमलनाथ का अभेद्य किला कहा जाता है, जिसके पीछे बड़ी राजनीतिक विरासत जुड़ी है। छिंदवाड़ा सीट से कमलनाथ या उनके परिवार के सदस्यों ने अब तक हर बार जीत हासिल की है। पिछले 12 लोकसभा चुनावों में से 11 बार कमलनाथ या उनके परिवार के सदस्यों ने छिंदवाड़ा से जीत हासिल की है।

नकुलनाथ की हार में कई बड़े कारण शामिल हैं। पहला, उन्होंने लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी छोड़ने का गलत संदेश दिया, जिससे मतदाता भ्रमित हो गए। दूसरा उन्होंने पुराने वफादार नेताओं और कार्यकर्ताओं का साथ छोड़ा, जिससे उनके समर्थक और मतदाता उनके खिलाफ हो गए।

तीसरा, भाजपा के रणनीतिकारों और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने छिंदवाड़ा में बहुत ही सफल रणनीति बनाई, जिसका उन्होंने मुकाबला किया और जीत हासिल की। उन्होंने लोकसभा चुनाव के दौरान विभाजन बढ़ाने के लिए खास प्लान बनाया था और छिंदवाड़ा में कांग्रेस के भंग से बहुत सारे पदाधिकारी भाजपा में शामिल हो गए थे।

अंत में, ग्रामीण क्षेत्रों में शिवराज सिंह चौहान के प्रचार और लोधी वोट के लिए उनके कैबिनेट मंत्री प्रह्लाद पटेल का इस्तेमाल किया गया, जिससे भाजपा की जीत में अहम भूमिका रही।

इस तरह, नकुलनाथ की हार के पीछे कई कारण रहे, जिसमें उनके राजनीतिक अनुभव की कमी, पार्टी से छूटने का मामला, और भाजपा की कुशल रणनीति शामिल हैं।

अमरवाड़ा सीट भी एक बड़ा कारण

छिंदवाड़ा की अमरवाड़ा सीट से कांग्रेस की टिकट पर चुने गए विधायक कमलेश शाह ने बीजेपी के संग जुड़ लिया है। ये वही कमलेश शाह हैं, जिनकी विधानसभा से 2019 के लोकसभा चुनाव में नकुलनाथ को 22 हजार वोटों की सबसे बड़ी लीड मिली थी, लेकिन कमलेश शाह के साथ छोड़ने से इस बार यहां भाजपा के बंटी साहू को 15 हजार वोटों की लीड मिल गई।

कमलेश शाह ने अपनी सीट से इस्तीफा दे दिया है। इसका मतलब है कि अगले 3 महीने में यहां विधानसभा का उपचुनाव होगा। नकुल इसी उपचुनाव को असली परीक्षा बता रहे हैं। चुनाव से पहले वे कमलेश शाह के इस तरह पार्टी छोड़ने पर उन्हें गद्दार तक कह चुके हैं।

इस पर सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जब तक कमलेश शाह उनके साथ थे तो वफादार थे, भाजपा में आए तो गद्दार कैसे हो गए। सीएम ने नकुल के इस बयान को आदिवासियों का अपमान बताया है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+