'...उनकी शिक्षा हमें सदियों तक प्रेरणा देगी', CM मोहन यादव ने आध्यात्मिक गुरु स्वामी रामकृष्ण को किया याद
भारत के महान संत एवं स्वामी विवेकानंद के गुरु स्वामी रामकृष्ण परमहंस की जयंती पर रविवार को मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव ने उन्हें याद किया। सीएम मोहन यादव ने नमन करते हुए कहा कि महान संत, विचारक एवं आध्यात्मिक गुरु स्वामी रामकृष्ण परमहंस की जयंती पर शत-शत नमन।
आगे कहा कि करुणा, स्नेह व मानवता की उनकी शिक्षा हमें सदियों तक प्रेरणा देती रहेंगी। आपकी करूणा, स्नेह और मानवता की शिक्षाएं जनकल्याण के लिए हमें सदैव प्रेरित करती रहेंगी। आइए आपको रूबरू कराते हैं परमहंस जी से...

भगवान मां काली के प्रति गहरी श्रद्धा और आस्था रखने वाले स्वामी रामकृष्ण परमहंस का जन्म 18 फरवरी 1836 को बंगाल के कामारपुकुर गांव में हुआ था। इनके बचपन का नाम गदाधर चट्टोपाध्याय था। इनका बचपन से ही धर्म और आध्यात्म में झुकाव था। रामकृष्ण परमहंस के जीवन से ही स्वामी विवेकानंद ने ज्ञान की बातों को सीखकर अपने जीवन में धारण किया।
6-7 साल की उम्र में ही आध्यात्मिक अनुभव
कहा जाता है कि रामकृष्ण परमहंस को अपनी 6-7 साल की उम्र में आध्यात्मिक अनुभव हो गया था। कथाओं में बताया गया है कि बचपन में एक बार परमहंस जी खेत की संकरी पगडंडियों से गुजर रहे थे। तभी अचानक मौसम बदल गया और तेज बारिश शुरू हो गई। तभी मौसम को चेतावनी देते हुए सारस पक्षी का झुंड बारिश में भी आकाश में उड़ान भर रहा था। यह दृश्य देखकर परमहंस बेहोश होकर गिर गए। कहा जाता है कि यह पहला आध्यात्मिक अनुभव था।












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