हेमंत कटारे रेप केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, भोपाल रेंज DIG की निगरानी में होगी जांच, गिरफ्तारी पर रोक
मध्य प्रदेश के भिंड जिले के अटेर से कांग्रेस विधायक और विधानसभा में उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे के खिलाफ रेप केस की जांच फिर से शुरू होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 4 अगस्त 2025 को इस मामले की जांच भोपाल रेंज के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) की निगरानी में कराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि हेमंत कटारे को फिलहाल गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, बशर्ते वे जांच में पूरा सहयोग करें।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश: DIG की निगरानी में जांच, गिरफ्तारी पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए हेमंत कटारे के खिलाफ 2018 में दर्ज रेप और अपहरण के मामले की जांच फिर से शुरू करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि भोपाल रेंज के DIG स्तर के अधिकारी जांच की निगरानी करेंगे। सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: हेमंत कटारे रेप केस में भोपाल रेंज DIG की निगरानी में जांच होगी, गिरफ्तारी पर रोक।
याचिका में मध्य प्रदेश सरकार ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 2 दिसंबर 2024 के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें कटारे के खिलाफ दर्ज FIR पर कार्यवाही रोक दी गई थी। सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू, अतिरिक्त एडवोकेट जनरल अमित शर्मा, और अन्य अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा, जबकि कटारे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गगन गुप्ता ने बहस की।
मामले का इतिहास: 2018 में दर्ज हुआ था रेप और अपहरण का केस
यह मामला 2018 का है, जब भोपाल की एक 21 वर्षीय पत्रकारिता छात्रा ने हेमंत कटारे पर रेप और अपहरण का आरोप लगाया था। छात्रा ने भोपाल सेंट्रल जेल से DIG भोपाल को पत्र लिखकर कटारे पर सितंबर 2017 से जनवरी 2018 के बीच भोपाल और दिल्ली में रेप का आरोप लगाया था।
इसके आधार पर महिला थाना, भोपाल में कटारे के खिलाफ IPC की धारा 376 (रेप), 342 (गलत तरीके से बंधक बनाना), और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत FIR दर्ज की गई थी। छात्रा की मां ने भी बाजारिया थाने में कटारे के खिलाफ अपहरण और रेप का केस दर्ज कराया था।
इससे पहले, कटारे ने छात्रा और उसके सहयोगी विक्रमजीत सिंह पर ब्लैकमेलिंग और उगाही का आरोप लगाते हुए 23 जनवरी 2018 को भोपाल क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज की थी। कटारे ने दावा किया था कि छात्रा ने उनसे 2 करोड़ रुपये की मांग की थी, और न देने पर झूठे रेप केस में फंसाने की धमकी दी थी। 24 जनवरी 2018 को क्राइम ब्रांच ने छात्रा को रचना नगर में 5 लाख रुपये लेते हुए गिरफ्तार किया था।
छात्रा ने जेल से रिहा होने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि कटारे और क्राइम ब्रांच की ASP रश्मि मिश्रा ने मिलकर उसे ब्लैकमेलिंग के झूठे केस में फंसाया। उसने कहा, "मैंने कटारे को ब्लैकमेल नहीं किया, बल्कि वे मुझे ब्लैकमेल कर रहे थे। छात्रा ने कटारे पर जूना जिम में उसका शारीरिक शोषण करने और तस्वीरों-वीडियो के आधार पर धमकाने का आरोप लगाया था।
सियासी विवाद: कांग्रेस ने बताया था साजिश
इस मामले ने 2018 में सियासी तूल पकड़ा था। विपक्ष के नेता अजय सिंह ने इसे सियासी साजिश करार देते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहन से उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि छात्रा की गिरफ्तारी के 9 दिन बाद कटारे पर FIR दर्ज करना संदिग्ध है। कांग्रेस ने दावा किया था कि छात्रा का सहयोगी विक्रमजीत सिंह का संबंध BJP नेताओं से था।
BJP के प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान ने आरोपों को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की थी। कटारे को ज्योतिरादित्य सिंधिया का करीबी माना जाता था। इस मामले में विक्रमजीत सिंह फरार रहा, और पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए 10,000 रुपये का इनाम घोषित किया था।
हाईकोर्ट का फैसला और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई
2018 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कटारे के खिलाफ दर्ज दोनों FIR (रेप और अपहरण) पर कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। कटारे ने हाईकोर्ट में दो याचिकाएं दायर कर FIR रद्द करने और गिरफ्तारी पर रोक की मांग की थी। उनके वकील प्रियांशु जैन ने तर्क दिया था कि कटारे और छात्रा दोनों बालिग थे, और अगर उनके बीच रिश्ता था तो यह गैरकानूनी नहीं था। हाईकोर्ट ने 2 मार्च 2018 को अगली सुनवाई तक FIR पर कार्यवाही रोक दी थी।
कटारे ने अप्रैल 2018 में कोर्ट में आत्मसमर्पण किया और 1 लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत मिल गई थी। बाद में छात्रा ने दावा किया कि एक BJP नेता ने उसे कटारे के खिलाफ झूठा रेप केस दर्ज करने के लिए उकसाया था।
मध्य प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट के 2 दिसंबर 2024 के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिसके बाद कोर्ट ने जांच फिर से शुरू करने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए DIG की निगरानी में जांच का निर्देश दिया।
2019 में छात्रा की आत्महत्या: मामले में नया मोड़
इस मामले ने 2019 में एक दुखद मोड़ लिया जब छात्रा ने उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आत्महत्या कर ली। @timesofindia.indiatimes.com ने 4 मई 2019 को बताया कि छात्रा ने एक पुलिसकर्मी द्वारा दहेज के लिए शादी से इनकार करने के बाद जहर खा लिया था। उसकी शादी 15 मई 2019 को होने वाली थी। झूंसी पुलिस ने FIR दर्ज की, जिसमें बताया गया कि छात्रा ने पुलिसकर्मी से सोशल मीडिया पर मुलाकात की थी और भोपाल में दो बार उससे मिली थी।
छात्रा की आत्महत्या ने कटारे के खिलाफ रेप केस को और जटिल बना दिया। @india.com के अनुसार, इस घटना के बाद कटारे ने दावा किया कि छात्रा का ब्लैकमेलिंग रैकेट चलाने का आरोप सही था।
अन्य समान मामले
मध्य प्रदेश में प्रेम प्रसंग और ब्लैकमेलिंग से जुड़े मामले पहले भी सुर्खियों में रहे हैं। @lalluram_news ने 4 अगस्त 2025 को हरदा में एक युवक-युवती के अपहरण की खबर दी, जिसमें प्रेम प्रसंग के कारण परिवार ने कथित तौर पर उन्हें जबरन उठा लिया था। नीमच में 6 फरवरी 2025 को जावद जनपद पंचायत सीईओ का अपहरण भी प्रेम प्रसंग से जुड़ा था। @news18.com ने बताया कि मध्य प्रदेश में 2025 में जनवरी से जून तक अपहरण के 1,200 से अधिक मामले दर्ज हुए, जिनमें 60% प्रेम प्रसंग से जुड़े थे।
यह मामला कई सवाल खड़े करता है:
- निष्पक्ष जांच: क्या DIG की निगरानी में जांच पूरी निष्पक्षता से हो पाएगी?
- कटारे की भूमिका: क्या कटारे जांच में सहयोग करेंगे, या सियासी दबाव जांच को प्रभावित करेगा?
- छात्रा की आत्महत्या: क्या इस मामले में छात्रा की आत्महत्या से जुड़े पहलुओं की भी जांच होगी?
- सियासी साजिश: क्या यह मामला वाकई सियासी साजिश का हिस्सा था, जैसा कि कांग्रेस ने दावा किया था?












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