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MP News: बिजली उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर पर बड़ा झटका, जानिए ऐसे चुकानी पड़ सकती है अतिरिक्त राशि

MP Smart Meter News: मध्य प्रदेश के 1.80 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं के लिए आने वाला समय एक वित्तीय चुनौती लेकर आ सकता है। प्रदेश सरकार की ओर से स्मार्ट मीटर लगाने की योजना के तहत, उपभोक्ताओं को अब स्मार्ट मीटर के लिए 25 हजार रुपए की राशि 10 साल तक किस्तों में चुकानी पड़ेगी।

यह राशि हर महीने के बिजली बिल में जोड़ दी जाएगी, लेकिन यह शुल्क अलग से बिल में दिखाई नहीं देगा, जिससे उपभोक्ताओं को इसके बारे में पता भी नहीं चलेगा कि वे कितना अतिरिक्त भुगतान कर रहे हैं।

Shock on smart meter for electricity consumers of MP may have to pay additional amount for 10 years

इस प्रस्ताव के तहत, बिजली उपभोक्ताओं पर एक बड़ा वित्तीय बोझ पड़ने की संभावना है। हालांकि, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने इस संबंध में साफ किया है कि मीटर की राशि उपभोक्ताओं से लेने का प्रावधान पहले से ही तय था। उनके अनुसार, जो भी स्मार्ट मीटर पहले से लगाए जा चुके हैं, उनका शुल्क भी उपभोक्ता द्वारा ही चुकता किया जाएगा।

स्मार्ट मीटर के लिए 754 करोड़ रुपए का प्रस्ताव

मध्य प्रदेश पॉवर मैनेजमेंट कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए विद्युत नियामक आयोग के सामने याचिका दायर की है, जिसमें स्मार्ट मीटर लगाने के लिए 754.32 करोड़ रुपए की राशि मांगी गई है। इस राशि में से 544.66 करोड़ रुपए स्मार्ट मीटर की शुरुआत और मासिक किस्तों के लिए निर्धारित किए गए हैं, जबकि 209.66 करोड़ रुपए स्मार्ट मीटर के रखरखाव पर खर्च किए जाएंगे।

यह राशि स्मार्ट मीटर के संचालन, उनके रख-रखाव, और उपभोक्ताओं को उनके कनेक्शन से जुड़े बिलों में जोड़कर वसूलने के लिए निर्धारित की गई है। हालांकि, यह शुल्क उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में दिखाई नहीं देगा, जिससे उपभोक्ताओं के लिए यह समझना मुश्किल हो सकता है कि वे कितनी अतिरिक्त राशि चुका रहे हैं।

स्मार्ट मीटर की आवश्यकता और इसके फायदे

स्मार्ट मीटर की आवश्यकता और इसके फायदों को लेकर राज्य सरकार और बिजली कंपनियां यह तर्क देती हैं कि इन मीटरों के जरिए बिजली उपभोक्ताओं का वास्तविक उपभोग मापना संभव हो सकेगा। इससे न केवल बिजली चोरी पर नियंत्रण पाया जा सकेगा, बल्कि उपभोक्ताओं को उनकी वास्तविक खपत के आधार पर सही बिल भी मिलेगा। स्मार्ट मीटर से बिजली वितरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और बिलिंग में भी सुधार होगा।

हालांकि, स्मार्ट मीटर के लिए उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ाने का निर्णय विवादास्पद हो सकता है, क्योंकि यह रकम अधिकांश उपभोक्ताओं के लिए एक अप्रत्याशित खर्च हो सकता है। इससे पहले भी कई बार सरकार ने बिजली दरों में वृद्धि की बात की है, जिससे लोगों में असंतोष देखा गया था।

उपभोक्ताओं के लिए क्या है समाधान?

स्मार्ट मीटर के मामले में उपभोक्ताओं के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि उन्हें किस्तों का भुगतान करने से पहले इस शुल्क की पूरी जानकारी मिले। इसके अलावा, सरकार को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि स्मार्ट मीटर के कार्यान्वयन से संबंधित खर्चों को किस प्रकार से उपभोक्ताओं पर समान रूप से वितरित किया जा सकता है, ताकि कोई उपभोक्ता अनावश्यक आर्थिक दबाव में न आए।

स्मार्ट मीटर शुल्क पर नियामक आयोग में आपत्ति, 11 फरवरी से शुरू होगी सुनवाई

मध्य प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं से स्मार्ट मीटर के लिए अतिरिक्त शुल्क वसूलने को लेकर विवाद गहरा गया है। रिटायर्ड एडिशनल चीफ इंजीनियर राजेंद्र अग्रवाल और रिटायर्ड एग्जीक्यूटिव इंजीनियर राजेश चौधरी ने इस निर्णय पर आपत्ति दर्ज करते हुए नियामक आयोग में याचिका दायर की है। उनके अनुसार, इस शुल्क का उपभोक्ताओं पर अनावश्यक बोझ डाला जा रहा है, और इसे लेकर पर्याप्त पारदर्शिता की कमी है।

यह आपत्ति मध्य प्रदेश पॉवर मैनेजमेंट कंपनी के द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए स्मार्ट मीटर पर निर्धारित 754.32 करोड़ रुपए के खर्च को लेकर उठाई गई है। इस याचिका पर नियामक आयोग ने सुनवाई का कार्यक्रम तय किया है।

सुनवाई का कार्यक्रम

11 फरवरी को इंदौर में सुनवाई की जाएगी, उसके बाद 13 फरवरी को जबलपुर और 14 फरवरी को भोपाल में सुनवाई का आयोजन होगा। भोपाल में होने वाली सुनवाई में उपभोक्ताओं की वर्चुअल उपस्थिति भी संभव होगी, जिससे वे ऑनलाइन माध्यम से अपनी आपत्तियां और सुझाव दे सकेंगे।

यह सुनवाई इस बात पर केंद्रित होगी कि स्मार्ट मीटर के लिए उपभोक्ताओं से वसूली जाने वाली राशि सही है या नहीं, और क्या इसे किस्तों में वसूलने का तरीका उचित है। उपभोक्ताओं की सुरक्षा और उनके हितों की रक्षा के लिए यह सुनवाई महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

आपत्ति के मुख्य बिंदु

राजेंद्र अग्रवाल और राजेश चौधरी ने अपनी आपत्ति में कहा कि स्मार्ट मीटर की लागत को उपभोक्ताओं पर लादा जाना एक अतिरिक्त वित्तीय दबाव बना सकता है। साथ ही, उन्हें इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है कि स्मार्ट मीटर लगाने के बाद बिजली बिलों में आने वाले बदलाव क्या होंगे।

उन्हें यह भी चिंता है कि अगर यह शुल्क बिना उपभोक्ताओं की पूरी सहमति के वसूला जाता है, तो यह उपभोक्ताओं के लिए एक गंभीर आर्थिक समस्या उत्पन्न कर सकता है। उन्होंने नियामक आयोग से यह अपील की है कि उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए इस योजना को पुनः समीक्षा की जाए।

इस स्थिति में सरकार को और बिजली कंपनियों को उपभोक्ताओं के बीच जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है, ताकि वे समझ सकें कि स्मार्ट मीटर के तहत वसूल की जा रही राशि का भुगतान क्यों किया जा रहा है, और किस प्रकार यह व्यवस्था उनके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।

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