Maihar Maa Sharda: मां शारदा मंदिर का चौंकाने वाले रहस्य, क्यों कोई पुजारी रात में नहीं ठहरता?
Maihar Maa Sharda: मैहर जिले के विंध्याचल पर्वत की चोटी पर मां शारदा का एक मंदिर है। यह एक शक्तिपीठ भी है। मां के इस मंदिर की कहानी अद्भुत और अविश्वसनीय है।
मान्यता है कि मां शारदा ने आल्हा की भक्ति भाव से प्रसन्न होकर उसे चिरकाल तक भक्ति और अमरता का वरदान दिया। माना जाता है कि उसके बाद ही मां की प्रतिमा आल्हा को मिली और मां शारदा के इस मंदिर का निर्माण हुआ।

मंदिर के निर्माण से लेकर आज तक, कहा जाता है कि मां की पूजा पाठ सबसे पहले आल्हा ही करते आए हैं। कहते हैं कि जब सुबह मंदिर के पट खोले जाते हैं, तो वहां मां के चरणों में जल के साथ ही एक फूल चढ़ा हुआ मिलता है।
हालांकि आज तक कोई भी आल्हा को देख नहीं सका है। माता मंदिर के बारे में मान्यता है कि जो भी रात में इस मंदिर में आल्हा को देखने के लिए रुकता है उसकी मौत हो जाती है। इस डर के कारण रात में इस मंदिर में कोई नहीं रुकता है। मंदिर के पुजारी भी यहां रात में नहीं रुकते।
मैहर मां शारदा के पुजारी पवन महाराज बताते हैं मंदिर को खोलने का समय प्रातः 4:00 बजे का है। तभी मंदिर में प्रवेश किया जाता है। वह बताते हैं कि अक्सर ही मंदिर के दृश्य को देखकर लगता है जैसे कोई कपाट खुलने से पहले ही वहां से चला गया हो।

मंदिर के शक्तिपीठ होने के बारे में कहा जाता है कि जब महादेव देवी सती के भस्मीभूत शरीर को लेकर तीनों लोकों में घूम रहे थे। उस समय भगवान विष्णु ने मां के शरीर को अपने चक्र से खंड-खंड कर दिया था। कहा जाता है कि उस समय मैहरके विंध्याचल की इस चोटी पर मां का हार गिरा था। यही वजह है कि इस जगह को मैहर यानी कि मां का हार का नाम दिया गया। इस तथ्य के बारे में हमारे पौराणिक ग्रंथों में भी उल्लेख मिलता है।
मंदिर परिसर से थोड़ी दूर पर आल्हा उदल का अखाड़ा भी स्थित है। इसके अलावा वहां एक तालाब है। इसके बारे में मान्यता है कि दोनों भाई आल्हा और ऊदल इस तालाब में स्नान किया करते थे। इसके बाद ही मां के दर्शनों के लिए जाते थे। मंदिर आने वाले श्रद्धालु इस स्थान के भी दर्शन करने आते हैं।












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