MP News: मध्य प्रदेश में मौसम का डबल अटैक, 37 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट, जानिए क्या है आगे का हाल
MP News: मई का महीना जहां गर्म हवाओं और तपते सूरज के लिए जाना जाता है, वहीं इस बार मध्यप्रदेश में मौसम ने खेल बदल दिया है। एक ओर आसमान से ओले बरस रहे हैं, दूसरी ओर खजुराहो और रीवा जैसे इलाकों में 42 डिग्री की भीषण गर्मी लोगों को झुलसा रही है।
पश्चिमी विक्षोभ और टर्फ के संयुक्त प्रभाव ने मौसम के इस उलटफेर को अंजाम दिया है, जिसे विशेषज्ञ "मौसमी असंतुलन का चरम रूप" कह रहे हैं।

पश्चिमी विक्षोभ और टर्फ, किस्सा मौसम का
राज्य में बीते 24 घंटों में जो मौसम देखने को मिला, वह सिर्फ बादलों की मेहरबानी नहीं थी। इसके पीछे सक्रिय हैं दो चक्रवाती हवाएं, एक मजबूत टर्फ लाइन, और अरब सागर से आई नमी। IMD की सीनियर वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन बताती हैं, "यह मौसमी गठजोड़ हिमालय से लेकर सतपुड़ा तक असर डाल रहा है, जिसके कारण तेज आंधी, ओलावृष्टि और अचानक बारिश हो रही है।"
पिछले 24 घंटों में मध्य प्रदेश के 37 जिलों में मौसम ने करवट ली। ग्वालियर, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, नीमच, मंदसौर, रतलाम, उज्जैन, आगर-मालवा, देवास, इंदौर, खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा, राजगढ़, भोपाल, रायसेन, विदिशा, सीहोर, छिंदवाड़ा, सिवनी, अनूपपुर, डिंडौरी, सागर, दमोह, पन्ना, छतरपुर, निवाड़ी, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली और शहडोल में बारिश और आंधी ने लोगों को हैरान किया। मंदसौर के सीतामऊ में सबसे ज्यादा 2.5 इंच से अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि खरगोन में 1 इंच पानी बरसा। कुल 53 शहरों और कस्बों में बारिश की बौछारें गिरीं।
MP Weather: अशोकनगर में ओले, खरगोन में उड़े टीन शेड
रविवार दोपहर बाद मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम ने अचानक रंग बदला। भोपाल के कोलार इलाके में जोरदार बारिश ने सड़कों को तर-बतर कर दिया। मंदसौर, शहडोल, इंदौर, छतरपुर, सागर, खरगोन और अशोकनगर में तेज हवाओं के साथ बारिश हुई। अशोकनगर में तो ओलावृष्टि ने सबको चौंका दिया। स्थानीय निवासी रमेश सक्सेना ने बताया, "मई में ओले गिरना हमारे लिए नया अनुभव था। खेतों में कुछ नुकसान हुआ, लेकिन बारिश ने गर्मी से राहत भी दी।"
खरगोन में आंधी इतनी तेज थी कि कई जगह टीन शेड उड़ गए और पेड़ उखड़ गए। मौसम विभाग के अनुसार, यह इस सीजन की अब तक की सबसे तेज आंधी थी। खरगोन के एक दुकानदार मोहनलाल ने कहा, "दुकान का शेड उड़ गया, सामान भीग गया। ऐसी आंधी हमने पहले नहीं देखी।" भोपाल में रविवार देर रात तक बारिश और बिजली की गड़गड़ाहट ने लोगों को घरों में रहने को मजबूर कर दिया। कई इलाकों में बिजली गुल होने की शिकायतें भी सामने आईं।
तेज गर्मी का दूसरा चेहरा, खजुराहो में 42 डिग्री
जहां एक तरफ बारिश और आंधी ने मध्यप्रदेश को ठंडक दी, वहीं दूसरी तरफ कई शहरों में गर्मी ने लोगों को झुलसाया। खजुराहो में अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस सीजन का सबसे गर्म दिन था। सतना में 40.8 डिग्री, रीवा में 40.4 डिग्री, दमोह में 40.2 डिग्री और सागर में 40 डिग्री तापमान ने लोगों को घरों में कैद कर दिया। प्रमुख शहरों की बात करें तो:
- भोपाल: 38.4 डिग्री
- इंदौर: 35.9 डिग्री
- ग्वालियर: 39.6 डिग्री
- उज्जैन: 37.5 डिग्री
- जबलपुर: 39.2 डिग्री
पचमढ़ी, जो मध्यप्रदेश का एकमात्र हिल स्टेशन है, सबसे ठंडा रहा। यहां तापमान 31.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग का कहना है कि बारिश के बावजूद अगले कुछ दिनों में ग्वालियर, छतरपुर, निवाड़ी, खरगोन और भिंड जैसे जिलों में तापमान 45-47 डिग्री तक पहुंच सकता है।
MP Weather: मौसम का मिजाज, 45 जिलों में अलर्ट
IMD ने 13 मई तक मध्यप्रदेश के 45 से ज्यादा जिलों के लिए आंधी, बारिश और बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन जैसे प्रमुख शहरों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। उज्जैन और जबलपुर संभाग में 50 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। अलीराजपुर, धार और झाबुआ में ओलावृष्टि का अनुमान है।
मौसम विभाग ने जिला प्रशासन को सतर्क रहने और जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। लोगों को सलाह दी गई है कि वे आंधी और बिजली के दौरान पेड़ों के नीचे न खड़े हों, खुले मैदानों में न रहें और बिजली के उपकरणों से दूर रहें। भोपाल में सोमवार देर रात तक बारिश की संभावना है, जिससे बिजली आपूर्ति और यातायात प्रभावित हो सकता है।
किसानों की चिंता, फसलों पर असर
इस मौसम ने किसानों के लिए मिश्रित स्थिति पैदा की है। मंदसौर और अशोकनगर जैसे इलाकों में बारिश और ओलावृष्टि ने गेहूं और चने की फसलों को नुकसान पहुंचाया। सीतामऊ के किसान रामलाल पटेल ने बताया, "गेहूं की कटाई चल रही थी, लेकिन बारिश ने फसल को खराब कर दिया। ओले ने स्थिति और बिगाड़ी।" दूसरी ओर, खरगोन और बुरहानपुर में बारिश ने मूंग और सब्जियों की फसलों को फायदा पहुंचाया।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यह मौसम रबी फसलों की कटाई के लिए नुकसानदायक हो सकता है, लेकिन खरीफ फसलों की बुआई के लिए मिट्टी में नमी बढ़ाने में मददगार साबित होगा। सरकार ने प्रभावित किसानों के लिए नुकसान का आकलन शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
कुछ यूजर्स ने मौसम विभाग की सटीक भविष्यवाणी की तारीफ की, तो कुछ ने सड़कों पर जलभराव और बिजली कटौती की शिकायत की। भोपाल के एक निवासी ने X पर लिखा, "कोलार में बारिश से सड़कें डूब गईं, प्रशासन को पहले से तैयारी करनी चाहिए थी।"
मौसम का इतिहास, मई में बारिश असामान्य
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मई में मध्यप्रदेश में बारिश और आंधी असामान्य नहीं है, लेकिन इस बार की तीव्रता और व्यापकता खास है। पिछले 10 सालों में मई में तापमान अक्सर 47-48 डिग्री तक पहुंचता है, लेकिन इस साल पश्चिमी विक्षोभ और टर्फ ने मौसम को ठंडा रखा है। अप्रैल 2025 में भी राज्य के 80% हिस्सों में बारिश और ओलावृष्टि देखी गई थी, जो सामान्य से अधिक थी।
मौसम विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, इंदौर में 5 मई को 70 मिमी (लगभग 3 इंच) बारिश दर्ज की गई थी, जो मई के लिए रिकॉर्ड थी। इस बार सीतामऊ में 2.5 इंच बारिश ने भी स्थानीय रिकॉर्ड तोड़ा। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और एल नीनो जैसे वैश्विक मौसमी पैटर्न इस अस्थिरता के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।
मौसम के इस डबल अटैक ने जिला प्रशासन के सामने कई चुनौतियां खड़ी की हैं:
जलभराव: भोपाल, इंदौर और जबलपुर जैसे शहरों में बारिश के बाद सड़कों पर जलभराव की समस्या सामने आई। कोलार और मंदसौर में नालों की सफाई न होने की शिकायतें मिलीं।
बिजली आपूर्ति: आंधी के कारण कई जगह बिजली के खंभे और तार क्षतिग्रस्त हुए, जिससे रविवार रात भोपाल के 200 से ज्यादा इलाकों में बिजली गुल रही।
- कृषि नुकसान: ओलावृष्टि और बारिश से फसलों को हुए नुकसान का आकलन करना प्रशासन के लिए चुनौती है।
- सुरक्षा: बिजली गिरने और पेड़ उखड़ने की घटनाओं को रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है।
- भोपाल कलेक्टर ने सभी SDM को अलर्ट रहने और प्रभावित इलाकों में तत्काल राहत कार्य शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इंदौर में नगर निगम ने जलभराव से निपटने के लिए पंप लगाए हैं, लेकिन स्थानीय लोग इसे नाकाफी बता रहे हैं।
आगे क्या?
मौसम विभाग का अनुमान है कि 13 मई के बाद पश्चिमी विक्षोभ का असर कम हो सकता है, जिससे तापमान में बढ़ोतरी होगी। ग्वालियर, छतरपुर, खजुराहो और भिंड जैसे इलाकों में पारा 47 डिग्री तक पहुंच सकता है। हालांकि, अरब सागर से नमी के कारण हल्की बारिश की संभावना बनी रहेगी। मौसम विशेषज्ञ डॉ अरुण शर्मा ने कहा, "मध्य प्रदेश में मई में गर्मी और बारिश का मिश्रण असामान्य नहीं है, लेकिन इस बार पश्चिमी विक्षोभ और टर्फ की तीव्रता ने मौसम को और जटिल बना दिया। अगले कुछ दिन सावधानी बरतने की जरूरत है।"












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