MP News teachers: ये गलती करने पर अब सरकारी शिक्षकों का कटेगा वेतन, सार्थक एप से चेहरा दिखाकर होगी हाजिरी
MP News teachers: मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए अब लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज करने की प्रणाली में बड़ा बदलाव करते हुए यह अनिवार्य कर दिया है कि जुलाई 2025 से सभी शिक्षक सार्थक एप के माध्यम से अपनी चेहरा पहचान आधारित ऑनलाइन हाजिरी दर्ज करें।
अगर कोई शिक्षक इसमें गड़बड़ी करता है, या तय समय में उपस्थिति दर्ज नहीं करता, तो उसके वेतन में कटौती की जाएगी।

यह निर्णय न केवल स्कूलों में शिक्षकों की वास्तविक उपस्थिति सुनिश्चित करेगा, बल्कि उन फर्जी हाजिरी या प्रॉक्सी व्यवस्था पर भी रोक लगाएगा, जिनके चलते कई बार शिक्षक स्कूल न जाकर किसी अन्य व्यक्ति को पढ़ाने भेज देते थे।
चार लाख से अधिक शिक्षकों पर लागू होगी व्यवस्था
प्रदेश के लगभग 4 लाख शिक्षक, जो प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में कार्यरत हैं, उन्हें अब स्कूल खुलने के साथ ही प्रतिदिन अपने मोबाइल से सार्थक एप के माध्यम से फेस रिकग्निशन द्वारा उपस्थिति दर्ज करनी होगी। यह प्रक्रिया स्थान (लोकेशन) और समय को भी रिकॉर्ड करेगी, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि शिक्षक वास्तव में स्कूल में उपस्थित हैं या नहीं।
अब तक क्यों नहीं लागू हो सकी ऑनलाइन उपस्थिति की व्यवस्था?
शिक्षा विभाग ने इससे पहले तीन बार ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था लागू करने की कोशिश की थी - 2017, 2020 और 2022 में एम-शिक्षा मित्र एप के माध्यम से। लेकिन हर बार शिक्षक वर्ग ने किसी न किसी कारण से इसका विरोध किया। कभी स्मार्टफोन की अनुपलब्धता तो कभी नेटवर्क की समस्या को वजह बनाकर इस व्यवस्था को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
दरअसल, ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या के चलते शिक्षकों को एप से उपस्थिति दर्ज करना चुनौतीपूर्ण लगता था। हालांकि एम शिक्षा मित्र एप में यह विकल्प था कि नेटवर्क न होने पर भी हाजिरी दर्ज की जा सके, जो बाद में नेटवर्क मिलने पर अपडेट हो जाए। लेकिन इसी विकल्प का दुरुपयोग होने लगा और फर्जी हाजिरी की शिकायतें बढ़ गईं।
अब विभाग ने साफ किया है कि सार्थक एप में फेस रिकग्निशन तकनीक के चलते किसी और की जगह उपस्थिति दर्ज कराना संभव नहीं होगा। इससे पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित होगा।
teachers: बड़ी खामी, विद्यार्थियों की उपस्थिति में भी ढिलाई
विभाग की ओर से पहले यह व्यवस्था केवल छात्रों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए लागू की गई थी। प्रदेश के 99,145 स्कूलों में से केवल 8,051 स्कूलों ने ही ऑनलाइन हाजिरी दर्ज की। शेष 91,094 स्कूलों ने इस अनिवार्य व्यवस्था को नज़रअंदाज़ कर दिया। विभाग अब इस दिशा में भी सख्ती दिखाने की तैयारी में है।
सार्थक एप क्या है? और यह कैसे करेगा काम?
सार्थक एप मध्य प्रदेश सरकार का आधिकारिक डिजिटल पोर्टल और मोबाइल एप्लिकेशन है, जो शिक्षा विभाग की विभिन्न योजनाओं, गतिविधियों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के लिए बनाया गया है। यह एप निम्नलिखित कार्य करेगा:
- फेस रिकग्निशन से शिक्षक की उपस्थिति दर्ज करना।
- GPS लोकेशन के साथ उपस्थिति रिकॉर्ड।
- शिक्षकों और कर्मचारियों को अवकाश के लिए आवेदन करने की सुविधा।
- शासन से पत्राचार, रिपोर्टिंग और अपडेट प्राप्त करने की सुविधा।
- ऑनलाइन मॉनिटरिंग और निरीक्षण का मजबूत माध्यम।
Teachers: वेतन कटौती का स्पष्ट प्रावधान
शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि जो शिक्षक तय समय पर उपस्थिति दर्ज नहीं करेंगे या एप से जुड़े निर्देशों की अवहेलना करेंगे, उनके खिलाफ वेतन में कटौती की जाएगी। विभाग इसे कर्तव्य में लापरवाही मानते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की भी तैयारी कर रहा है।
क्यों जरूरी है यह सख्ती?
प्रदेश में कई वर्षों से यह शिकायतें मिलती रही हैं कि शिक्षक स्कूलों से अनुपस्थित रहते हैं, विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में। कई बार नियुक्ति स्थान पर शिक्षक किसी और को भेज देते हैं और स्वयं अनुपस्थित रहते हैं। इससे बच्चों की शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
विभाग को विश्वास है कि चेहरा आधारित उपस्थिति प्रणाली इस तरह की लापरवाहियों और कदाचार पर प्रभावी रोक लगाएगी।
Teachers: शिक्षक संगठनों की क्या है प्रतिक्रिया?
हालांकि विभाग की यह पहल शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से की गई है, लेकिन शिक्षक संगठनों की ओर से मिश्रित प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कुछ संगठनों ने तकनीकी दिक्कतों और नेटवर्क की समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया है। वहीं, कुछ शिक्षकों ने इसे शोषण और निगरानी की नीति बताया है।
लेकिन शिक्षा विभाग का कहना है कि "जो शिक्षक समय पर स्कूल जाते हैं और कर्तव्यनिष्ठ हैं, उन्हें इस व्यवस्था से कोई परेशानी नहीं होगी।"
शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति की यह व्यवस्था न केवल शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन लाएगी, बल्कि शिक्षण गुणवत्ता सुधारने में भी मददगार साबित होगी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि विभाग इसे जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू कर पाता है और शिक्षकों का सहयोग किस हद तक मिल पाता है।
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