नौरादेही : जंगल में बेल माफिया सक्रिय, अवैध रूप से 'बेल' का सागर से दिल्ली तक कारोबार
सागर जिले में बेल माफिया नौरादेही के जंगलों से बेल की कालाबाजारी कर रहे हैं। नौरादेही में करीब दो लाख बेल के पेड़ हैं, माफिया बेल तुड़वाकर उन्हें ट्रकों में भरवाकर महानगरों के व्यापारियों को बेचकर मोटा मुफाना कमा रहे हैं

सागर जिले के जंगलों में वन माफिया के साथ बेल माफिया भी सक्रिय हैं! बेल माफिया से आशय जंगल के अंदर लगे बेल के करीब दो लाख पेड़ों से निकलने वाले बेल फल का अवैध कारोबार कर रहे हैं। बिन अनुमति जंगल से ट्रक भरकर बेल तुड़वाकर इन्हें जिले से बाहर भेजा जा रहा है। बीते रोज ऐसा ही बेल से भरा एक ट्रक नौरादेही के हिनौती गांव से पकड़ा गया है। यह बेल दिल्ली भेजा जाना था। यहां सीजन में यह अवैध कारोबार काफी फलता-फूलता है। इसमें वन विभाग के अमले की मिलीभगत भी बताई जा रही है।
जानकारी अनुसार वन विभाग की टीम ने रात्रि गश्त के दौरान एक ट्रक रहली के हिनौती गांव से पकड़ा है, जिसमें बेल से भरीं 219 बोरियां बरामद हुई हैं। इसकी कीमत करीब 2 लाख रुपए बताई जा रही है, लेकिन जब तक वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची ट्रक का ड्राइवर भाग चुका था। मामले में अज्ञात आरोपियों पर प्रकरण दर्ज किया गया है। यह कोई पहला मामला नहीं है जब नौरादेही अभयारण्य से इतनी बड़ी मात्रा में बेल पकड़ा गया हो। इससे पहले भी कई बार वन विभाग की टीम ने इन अवैध तस्करों को पकड़ा है, लेकिन इसके बाद भी नौरादेही से बेल चोरी होने का खेल जारी है। मामले को लेकर जब पड़ताल की तो सामने आया कि अभयारण्य से हर माह सैकड़ों क्विंटल बेल चोरी किया जा रहा है। जिसमें बेल चोरी करने वाले वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से मिलीभगत कर बेल से भरा ट्रक जंगल से बाहर निकाल लेते हैं। नौरादेही के बेल की सप्लाई केवल सागर जिले में ही नहीं बल्कि दिल्ली, उत्तरप्रदेश समेत कई राज्यों में भी की जाती है। इस तरह यहां से केवल बेल ही नहीं बल्कि वन संपदा से जुड़ी कई और चीजें भी बाहर भेजी जा रही है। ऐसे में जंगल की सुरक्षा अब सवालों के घेरे में है।

वन्य गांव में खुलेआम चल रहा बेल का कारोबार
नौरादेही के जंगल में स्थित गांव मोहली, खपराखेरा, पटना मोहली, खापा, हिनौती और बंदरचुआ समेत करीब 30 गांव में खुलेआम बेल का करोबार फलफूल रहा है। यहां के लोग जंगल से बेल तोड़कर घरों में रखते हैं। जिसके बाद बेल को गर्म कर अंदर के भाग को निकाल कर सुखाया जाता है, फिर इसे गांव में आने वाले अवैध सप्लायर को बेच दिया जाता है। एक घर से हर माह करीब 5 से 6 क्विंटल बेल बिकता है। ऐसे यहां करीब 200 घर हैं जो यह काम करते हैं। मतलब हर माह एक से डेढ़ हजार क्विंटल बेल जंगल के बाहर भेजा जाता है।
20 रुपए में बिकता है एक बेल
ग्रामीणों के बताए अनुसार बेल के अंदर का हिस्सा 8 रुपए और बाहर का हिस्सा 12 रुपए में बिकता है। इस तरह एक बेल की कीमत 20 रुपए है। यदि एक माह में एक हजार क्विंटल बेल जंगल से चोरी हो रहा है तो हर माह 20 लाख रुपए की चपत शासन को लग रही है।
चार माह में करोड़ से ऊपर का कारोबार
जंगल में लगे पेड़ों में दिसंबर माह से बेल के फल आने लगते हैं, यह सिलसिला मार्च-अप्रैल तक चलता हैं। यानी यही पांच माह होते हैं बेल के कारोबार के इन चार माह में कारोबारी जंगल में सक्रिय हो जाते हैं। चार माह यहां से एक करोड़ से अधिक का बेल चोरी होता है।
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दवा बनाने में काम आता है बेल
जानकारी अनुसार बेल के खरीददार सबसे ज्यादा दवा व्यापारी होते हैं। क्योंकि इसका उपयोग कब्ज, डायबिटीज और पेट संबंधी बीमारियों की दवा बनाने में होता है। इसके अलावा इसे अगरबत्ती बनाने में भी इस्तेमाल किया जाता है।
नौरादेही के जंगलों में बेल चारी से जुड़े आंकड़े
-1197 वर्ग किमी में फैला है नौरादेही अभ्यारण
- 2 लाख से भी ज्यादा बेल के पेड़ हैं जंगल में
- 20 से अधिक ट्रक एक माह में गुजरते हैं जंगल से
- एक करोड़ रुपए से अधिक का बेल चोरी होता है पांच माह में












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