बीएमसी: वायरोलॉजी लैब प्रभारी ने की बगावत, प्रमोशन में किया जा रहा परेशान

मप्र चिकित्सा शिक्षा विभाग में तीन साल पहले पदोन्नति की व्यवस्था को बायपास कर, डेजिंगनेटेड का फॉर्मूला निकाला था। इसके बाद बीएमसी में कई डॉक्टरों डेजिंगनेटेड किया गया था।

BMC Dr Sumit rawat

Madhya Pradesh के सागर स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में वायरोलॉजी लैब के प्रभारी व माइक्रोवायोलॉजिस्ट डॉ. सुमित रावत के एक पत्र से बवाल मचा हुआ है। बीते 5 साल से पदोन्नति की प्रक्रिया में लगातार शामिल होने के बावजूद पदोन्नति न मिल पाने के बाद उन्होंने खुद को इससे अलग कर लिया है। इस आशय का एक पत्र डीन को लिखकर सूचित भी किया है। डॉ. रावत का आरोप है कि हर बार नियम बदल दिए जाते हैं, शासन के नियम और गाइड लाइन के विपरीत अपनों को उपकृत्य करने के लिए नियम जारी कर दिए जाते हैं। उन्होंने अपने पत्र में भी उल्लेख किया है कि हर बार नियम बदलकर निजी स्वार्थ पूरे किए जा रहे हैं। बता दें कि डॉ. सुमित रावत बीते दिनों अपनी रिसर्च के लिए बिल गेट्स एंड मिलिंडा इंटरनेशनल अवॉर्ड प्राप्त कर चुके हैं।

BMC sagar
बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में पदोन्नति में उपेक्षा के चलते माइक्रोबायोलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुमित रावत ने बीएमसी डीन को पत्र लिखते हुए भविष्य में सभी पदोन्नति प्रक्रिया से नाम वापस लेने की बात कही है। साथ ही उन्होंने बीएमसी प्रबंधन पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं। डॉ. रावत ने लिखा है कि मैं 13 साल से बीएमसी में पदस्थ हूं। वर्ष 2018 में मुझे डेजिंगनेटेड एसोसिएट प्रोफेसर नियुक्त किया गया था, इससे संबंधित कार्य भी मुझसे कराए गए। अतिरिक्त कार्यभार भी दिए, लेकिन आज तक इस पद का अनुभव या वेतन प्रदान नहीं किया गया। बार-बार पदोन्नति के लिए प्रस्ताव मंगाया जाता है, लेकिन प्रस्तावों में अपने विशेष लोगों को ही पदोन्नत किया जाता है। जिनसे कोई स्वार्थ की पूर्ति होती है। इस बार फिर प्रस्ताव बुलाए गए थे, जिसमें मैंने भी प्रस्ताव दिया, लेकिन विज्ञापन में माइक्रोबायोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर की सीट गायब थी, जिसके बाद मैंने अब भविष्य में सभी पदोन्नति प्रक्रिया से नाम वापस लेने का निर्णय लिया है।

डेजिंगनेटेड के नाम पर मान्यता बचाता रहा, लेकिन रेग्युलर प्रमोशन नहीं किए

मप्र के मेडिकल कॉलेजों में पदोन्नति का विवाद लंबे समय से चल रहा है। यहां पूर्व में कॉलेजों को एमसीआई से मान्यता दिलाने और पदोन्नति को लेकर कोर्ट में चल रहे प्रकरण व स्टे को देखते हुए शासन ने बीच का रास्ता निकाला था। इसमें पदोन्नत पद की सीनियरिटी को पूरा करने वाले ऐसे डॉक्टरों को डेजिंगनेटेड पदोन्नति दे दी थी। इससे कोर्ट की अवहेलना भी नहीं हुई और इधर एमसीआई से खाली पदों पर मान्यता भी मिल गई थी, लेकिन बाद में ऐसे डॉक्टरों को रूटीन पदोन्नति में परेशान किया जाने लगा था। मामले में विभाग और कॉलेज प्रशासन ने अपने चहेते डॉक्टरों से हर प्रमोशन व ज्वाइनिंग को लेकर निजी स्वार्थ पूरे करने के आरोप जब-तब लगते रहे हैं।

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