मध्य प्रदेश: सांप्रदायिक तनाव फैलाने में आरएसएस का हाथ, पुलिस ने दर्ज नहीं किया केस?
पुलिस ने गोपनीय रिपोर्ट में आरएसएस नेता पर लगाए सांप्रदायिक हिंसा फैलाने के आरोप। कहा, आरएसस नेता होने की वजह से नहीं हुई कार्रवाई।
पेटलावद। मध्य प्रदेश के पेटलावद में पिछले महीने हुए सांप्रदायिक तनाव में आरएसएस के जिला सह कार्यवाह आकाश चौहान और उसके पिता का हाथ था। इन दोनों ने आगामी नगर पंचायत चुनाव में हिंदुओं के वोटों का ध्रुवीकरण करने के लिए सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की कोशिश की। ये बातें पुलिस की एक रिपोर्ट में कही गई है।

पुलिस अफसर राकेश व्यास की रिपोर्ट
सांप्रदायिक तनाव के समय इलाके के सबडिविजनल ऑफिसर रहे राकेश व्यास ने चार पेज की एक रिपोर्ट झाबुआ के एसपी संजय तिवारी को सौंपी, जिसमें लिखा है, 'वे सांप्रदायिक हिंसा फैलाना चाहते थे और हिंदुओं के वोटों का ध्रुवीकरण कर चुनाव जीतना चाहते थे। उन्होंने इसके लिए बहुत प्रयास किए लेकिन तनाव पैदा करने की उनकी कोशिशों को पुलिस ने नाकाम कर दिया।'
आरएसएस के आदमी होने की वजह नहीं हुआ केस दर्ज
पुलिस की इस गोपनीय रिपोर्ट में आकाश चौहान और उनके पिता को 12 अक्टूबर से 14 अक्टूबर तक पेटलावद में तनाव फैलाने का दोषी बताया गया है और आगे लिखा है, 'उपरोक्त घटनाओं में अपराध पंजीबद्ध होने थे। लेकिन इनकी आरएसएस पृष्ठभूमि के कारण प्रशासनिक दृष्टिकोण से अपराध पंजीबद्ध नहीं किए जा सके।'
इस रिपोर्ट में पुलिस ने यह दावा किया है कि त्वरित कार्रवाई की वजह दंगा रोका जा सका। लोगों ने पुलिस के एक्शन का समर्थन किया।
आकाश चौहान पर और भी आरोप?
28 साल के आरएसएस पदाधिकारी आकाश चौहान पर पुलिस की रिपोर्ट में सांप्रदायिक तनाव भड़काने की कोशिशों के अलावा और भी आरोप लगाए गए हैं।
कहा गया है कि आकाश चौहान 100-150 लोगों का एक गैंग बनाए हुए हैं और वह गौरक्षा के नाम पर गायों को ले जा रही गाड़ियों के ड्राइवर से वसूली करते हैं। पैसा वसूलने के लिए वे उनको पुलिस में रिपोर्ट करने का भय दिखाते हैं।
12 से 14 अक्टूबर के बीच पेटलावद में सांप्रदायिक तनाव
12 अक्टूबर को पेटलावद में मोहर्रम के दौरान ताजिया जुलूस को लेकर तनाव फैला जिसमें आरएसएस के लगभग 12 कार्यकर्ताओं को पुलिस ने ऐहतियातन गिरफ्तार किया था या हिरासत में लिया था। इन लोगों में आकाश चौहान के पिता मुकुट चौहान भी थे।
इन गिरफ्तारियों के खिलाफ पेटलावद में आरएसएस ने बंद का आयोजन कर एसडीपीओ राकेश व्यास के खिलाफ सरकार से एक्शन की मांग की थी। बंद के दौरान एसडीपीओ की गाड़ी को हमलावरों ने तोड़फोड़ दिया। इस घटना में आकाश चौहान समेत सात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया।
संघ के दबाव में आकर मध्य प्रदेश सरकार ने एसडीपीओ राकेश व्यास और पेटलावद थाने के दरोगा कर्णसिंह शक्तावत का ट्रांसफर कर दिया।
आरएसएस के एक पदाधिकारी ने किया पुलिस रिपोर्ट का खंडन
धार इलाके के आरएसएस प्रचार प्रमुख ललित कोठारी ने पुलिस की इस रिपोर्ट में कही गई बातों का खंडन किया है। उनका कहना है कि आकाश चौहान के खिलाफ कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं है और वह किसी पुलिस रिपोर्ट से वाकिफ नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आकाश, संघ से जुड़े हैं इसलिए वह गौरक्षा अभियान का हिस्सा हैं।
आकाश चौहान ने लगाया एसडीपीओ पर आरोप
एसडीपीओ राकेश व्यास की गोपनीय रिपोर्ट में अपने खिलाफ लिखी बातों पर आरएसएस पदाधिकारी आकाश चौहान ने उल्टे पुलिस अधिकारी पर संघ-विरोधी होने का आरोप लगाया है।
आकाश चौहान ने कहा कि गौरक्षकों के अभियान से पुलिस अधिकारी खफा थे क्योंकि पशुओं के अवैध कारोबार से पैसा कमाने का जरिया बंद हो गया था।
चौहान ने कहा, 'एसडीपीओ और अन्य पुलिस अधिकारी, गाड़ियों को इलाके से निकलने देने के लिए 5,000 रुपए की वसूली करते थे। एसडीपीओ ने 20-22 गौरक्षकों को टारगेट कर रखा था और मौका पाकर उनको अपमानित किया, थाने में घंटों बिठाकर रखा और उसके बाद कुछ को झूठे आरोप लगाकर गिरफ्तार कर लिया।'












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