MP Weather News: मध्य प्रदेश में बारिश का कहर: 45% कोटा एक महीने में पूरा, डैम ओवरफ्लो—अब आगे क्या?
MP Weather News: मध्य प्रदेश में इस बार मानसून ने समय से न केवल दस्तक दी, बल्कि पहले ही महीने में बरसात का 45% कोटा पूरा करके पूरे प्रदेश को चौंका दिया। बीते एक महीने में 17.4 इंच औसत बारिश दर्ज हुई है। परिणामस्वरूप, कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात हैं, नदियां उफान पर हैं, और डैम के गेट खोलने पड़े हैं।
अब मौसम विभाग ने चेताया है कि अगले ढाई महीने और तेज बारिश हो सकती है। सवाल ये उठ रहा है कि क्या प्रशासन और आम जनता इसके लिए तैयार है?

एक महीने में 74% ज्यादा बारिश, रिकॉर्ड टूटा
प्रदेश में 16 जून को मानसून की आमद के बाद से ही लगातार सिस्टम एक्टिव हैं। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, साइक्लोनिक सर्कुलेशन, लो प्रेशर एरिया, और द्रोणिका (ट्रफ लाइन) के चलते बारिश लगातार तेज बनी हुई है।
- निवाड़ी में 102% मानसूनी कोटा पूरा
- टीकमगढ़ में 90%, बालाघाट, मंडला, और छतरपुर में 30 इंच से ज्यादा
- इंदौर-उज्जैन संभाग पीछे-10 इंच से कम बारिश
डैम ओवरफ्लो, नदियां उफान पर
- भारी बारिश ने राज्य के जलस्रोतों को भर दिया है:
- बरगी डैम (जबलपुर), जौहिला डैम (अनूपपुर), बान सुजारा डैम (टीकमगढ़) के गेट खोले
- भोपाल के बड़ा तालाब, केरवा, कलियासोत डैम फुल टैंक लेवल पर
- नर्मदा, धसान, मंदाकिनी, जामनी, कोलार जैसी नदियां खतरे के निशान से ऊपर
- छतरपुर में रनगुवां डैम के 15 गेट खोलने से गांवों में बाढ़ आ गई।
- मंडला में 7 लोगों की मौत और 300 घर क्षतिग्रस्त हुए।
अब आगे क्या?-वर्षा का दूसरा दौर और चुनौतीपूर्ण होगा
- 125% तक बारिश हो सकती है, यानी अब तक की तुलना में और 28 इंच से ज्यादा पानी गिर सकता है
- 15-17 जुलाई तक 35 जिलों में भारी बारिश और 9 जिलों में अति भारी बारिश का अलर्ट
- भोपाल, ग्वालियर, सागर, दमोह, नर्मदापुरम, कटनी, जबलपुर, छतरपुर जैसे जिले अलर्ट पर
- मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन के मुताबिक, "लो प्रेशर और ट्रफ लाइन अभी कमजोर नहीं हो रही। जुलाई के अंत तक यह पैटर्न बने रहने की संभावना है।"
कहां-कहां कहर, कितनी बारिश?
- 30+ इंच मंडला, निवाड़ी, टीकमगढ़
- 20-30 इंच जबलपुर, कटनी, सागर, शिवपुरी, बालाघाट, डिंडौरी
- 10-19 इंच भोपाल, राजगढ़, विदिशा, रीवा, मुरैना, सीहोर
- 10 इंच से कम इंदौर, उज्जैन, खरगोन, मंदसौर, देवास, आगर

रीवा: 8.12 इंच बारिश | बालाघाट: 8 इंच
- छतरपुर (बिजावर): 303 मिमी (12 इंच) एक ही दिन में
- बाढ़ का असर-11 जिलों में 1.75 लाख लोग प्रभावित, छतरपुर, गुना, सीधी, शिवपुरी, टीकमगढ़, ग्वालियर: 1000 से अधिक गांवों में पानी
- नरसिंहपुर, मंडला: गांव जलमग्न, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
- सीहोर: कोलार और सोलमी नदी में बहे तीन युवक, तलाश जारी
- मऊगंज: पुल डूबे, गांव टापू में तब्दील
कृषि को नुकसान: कहीं पानी ज्यादा, कहीं सूखा
- मंडला, निवाड़ी, टीकमगढ़ जैसे जिलों में धान और सोयाबीन की फसलें डूब गईं
- इंदौर-उज्जैन संभाग में बारिश की कमी से बुआई नहीं हो पाई
- कृषि विभाग ने किसानों से फसल बीमा कराने की अपील की है
यातायात भी बाधित
- गुना-बमोरी, सटई-सिलावट, और छतरपुर-मऊगंज मार्ग बंद
- रीवा और सीधी में हाईवे जलमग्न
- प्रशासन और सरकार की तैयारी
- CM मोहन यादव ने 30 जून को ही आपदा प्रबंधन के निर्देश दिए
- NDRF, SDRF टीमें नर्मदापुरम, मंडला में तैनात
- रेस्क्यू ऑपरेशन में अब तक 312 लोगों की जान बचाई गई
सरकार और प्रशासन की तैयारी
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 30 जून 2025 को सभी कलेक्टर्स और अधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सतर्क रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा, "इस बार अच्छी बारिश हो रही है। प्रशासन को बाढ़, जलभराव, और हादसों से निपटने के लिए तैयार रहना होगा। खाद, बीज, और उर्वरकों की कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई होगी।"
कृषि विभाग ने किसानों से फसल बीमा कराने और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन शुरू करने को कहा है। नर्मदापुरम और मंडला में NDRF और SDRF टीमें तैनात हैं।












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