MP News: रजिस्ट्री के बाद नामांतरण में दिक्कतें, हजारों मामले पेंडिंग, CM मोहन यादव के आदेश का असर नहीं
Bhopal MP News: भोपाल सहित मध्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में कृषि भूमि की रजिस्ट्री के बाद तत्काल नामांतरण की सुविधा देने का वादा किया गया था, लेकिन अब तक इसका प्रभावी तरीके से क्रियान्वयन नहीं हो पाया है।
राज्य सरकार ने संपदा 2.0 को शुरू करते हुए कहा था कि जैसे ही रजिस्ट्री होगी, उसी वक्त फॉर्म नंबर 7 भरा जाएगा और नामांतरण की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। हालांकि, इस व्यवस्था के बावजूद अब भी बड़ी संख्या में नामांतरण के मामले पेंडिंग पड़े हुए हैं।

कृषि भूमि की रजिस्ट्री के बाद अटक रहे मामले
राज्य के पंजीयन विभाग के अधिकारियों ने यह बताया कि कृषि भूमि की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए, लेकिन पंजीकरण के बाद भी लोग असमंजस में हैं। खासतौर पर जब एक खसरा को अलग-अलग हिस्सों में बेचने का मामला सामने आता है, तो नामांतरण की प्रक्रिया में रुकावटें आ जाती हैं। इस वजह से ऐसे करीब 17,000 मामले पेंडिंग हैं, जिनमें ऑनलाइन नामांतरण का आवेदन किया गया था, लेकिन नामांतरण में अभी भी देरी हो रही है।
पंजीयन विभाग की जानकारी पर अधिकारियों का बयान
पंजीयन विभाग के अफसरों ने बताया कि कृषि भूमि पर नामांतरण की सुविधा अभी शुरू की गई है, लेकिन प्लॉट पर इस सुविधा की प्रक्रिया का ट्रायल चल रहा है। जिला पंचायत के वरिष्ठ अधिकारी स्वप्निल शर्मा ने कहा कि पंजीयन विभाग द्वारा नामांतरण के मामले राजस्व और नगरी प्रशासन को ट्रांसफर किए जा रहे हैं, लेकिन अब वहां भी ये मामले पेंडिंग हो रहे हैं।

समस्याओं का सामना कर रहे लोग
सम्पदा 2.0 के बाद रजिस्ट्री तो अब तत्काल हो रही है, लेकिन कृषि भूमि के नामांतरण के लिए लोगों को ऑफलाइन आवेदन करना पड़ रहा है, जिसमें एक से तीन महीने का समय लग रहा है। इसके अलावा, प्लॉट, मकान और फ्लैट के नामांतरण के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया भी आ रही है, लेकिन कई बार जिओ टेकिंग में गलतियां हो रही हैं, जिसके चलते लोकेशन गलत दिखती है और ऑनलाइन फॉर्म भरने में कठिनाई हो रही है। इस कारण लोग पुराने सिस्टम यानी संपदा 1.0 का उपयोग करने को मजबूर हो रहे हैं।
आधार से लिंकिंग में भी समस्याएं
रजिस्ट्री के दौरान एक और बड़ी समस्या सामने आ रही है, जो कि परिवार के चार सदस्यों के आधार नंबर को एक ही मोबाइल नंबर से लिंक करने के कारण उत्पन्न हो रही है। ऐसी स्थिति में ओटीपी नहीं आता और नामांतरण की प्रक्रिया में और अधिक देरी होती है।
सरकार से उम्मीदें
राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस व्यवस्था को सुधारने के लिए कई आदेश दिए थे, लेकिन इसका असर अब तक नहीं दिखा है। राज्यभर में नामांतरण के मामले अटकने और पेंडिंग होने से लोगों में असंतोष और भ्रम की स्थिति बनी हुई है। यह मुद्दा खासतौर पर उन लोगों के लिए गंभीर है जो अपनी भूमि और संपत्ति के नामांतरण में देरी की वजह से आर्थिक और कानूनी परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
प्रदेशवासियों का कहना है कि अगर सरकार ने त्वरित समाधान की दिशा में कदम नहीं उठाए, तो यह मुद्दा और गंभीर हो सकता है।












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