PM awas yojana: ‘हम इतने गरीब हैं कि मकान बनाने किश्त के लाख-लाख रुपये मिलते ही फुर्र’! MP में इतने लोग लापता
PM awas yojana: समाज में बराबरी का दर्जा दिलाने सरकारें दशकों से तमाम कोशिशें कर रही हैं। इतिहास टटोलने पर बात गरीब तबके पर ही ठहरती आई, जब सरकारों ने उनके हित में योजनाएं बनाई, ताकि गरीबी का तमगा हट सकें।
महत्वकांक्षी पीएम आवास योजना भी उन्ही में से है। गरीबी के साए में जी रहे जिन लोगों के पास रहने के छत नहीं, उन्हें मकान बनाने राशि मुहैया कराने का प्लान बनाया। लाखों लोगों के सपनों में पंख जरुर लगे, लेकिन कुछ परिंदों की तरह उड़ गए।
मध्य प्रदेश में ऐसा इसलिए कहना पड़ रहा है क्योकि दस-बीस-पचास नहीं, बल्कि 15 हजार गरीबों को ढूंढा जा रहा हैं। राज्य सरकार के नगरीय संचालनालय की मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि आवास बनाने के लिए पात्र इतने हितग्राहियों ने राशि तो ले ली, लेकिन एक ईंट की जुड़ाई तक नहीं हुई।

जानकारी के मुताबिक जिन लापता गरीबों को ढूंढने नगरीय संचालनालय माथा पच्ची कर रहा है, उनको योजना के तहत पहली किश्त की एक लाख रुपये राशि जारी कर दी गई थी। खातों में लाख-लाख रुपये आने के बाद ये गरीब गायब हैं।
'पता' का ही नहीं चल रहा पता
इस मामले की गहराई में जाने के लिए संबंधित विभाग के आला अफसरों से सच्चाई जानने की भी कोशिश की गई, लेकिन खुलकर कोई भी बोलने के लिए तैयार नहीं हैं। निचले स्तर के मैदानी कर्मचारियों ने यह जरुर खुलासा किया कि लगभग 4 हजार ऐसे गरीब हितग्राही है, जो अपने पते से ही गायब हैं। कुछ तो ऐसे है जिन्होंने पात्रता आवेदन के वक्त जो एड्रेस दिया, राशि आवंटित होने के बाद वह 'पता' जांच में गलत साबित हो रहा हैं।
राज्य सरकार का नगरीय संचालनालय ऐसे 15 हजार लापता गरीबों को ढूंढ रहा है, जिन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान बनाने के लिए सरकार से पैसे तो लिए, लेकिन मकान बनाया नहीं है और लापता हो गए। सरकार ने इन गरीबों को अपात्र घोषित कर वसूली की तैयारी कर ली है।
ये भी है बड़ा पेंच
जो पहली किश्त की लाख रुपये रकम लेकर फुर्र है। उनको तो खोजा ही जा रहा हैं। साथ ही बड़ी उलझन उन हितग्राहियों के नाम की भी है, जिनकी मौत हो गई। विभाग ने नोटिस बांटने भी शुरू किए, लेकिन बड़ा पेंच यह है कि जिन पात्र हितग्राहियों की मौत हो गई, उनके बदले किसे नोटिस दें? फिर वसूली कैसे होगी? कुछ लोगों की प्रॉपर्टी का मामला कोर्ट में चल रहा हैं। इन हालातों पर निशाने पर संबंधित विभाग ही है, नेक योजना का बंटाधार न होने पाए, इसके लिए जरुरी कदम पहले क्यों नहीं उठाए गए?
इतनी जारी हुई थी राशि
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शहरी गरीबों को पक्का मकान बनाने के लिए 150 करोड़ रुपये की राशि जारी की थी। राज्य सरकार ने प्रदेश की 413 नगरीय निकायों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 17 हजार करोड़ रुपए आवंटित किए थे। जिसके तहत शहरी गरीबों को आवास बनाने के लिए ढाई लाख रुपए दिए जाने थे।
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