Orchha: बुंदेलखंड की अयोध्या में चलता है ‘रामराज्य’, यहां सीएम, पीएम या राष्ट्रपति को भी नहीं देते सलामी
बुंदेलखंड की अयोध्या में भगवान श्रीराम को राजा के रूप में पूजा जाता है। यहां 450 साल से उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है। कोई भी राजनेता, जनप्रतिनिधि या राष्ट्राध्यक्ष को यहां वीआईपी मानते हुए सलामी नहीं दी जाती है। कारण


बुंदेलखंड की अयोध्या व देश में भगवान श्रीरामराजा सरकार की राजधानी का ओरछा को दर्जा प्राप्त है। कारण अयोध्या में भगवान को बाल स्वरूप श्रीराम लला के रुप में पूजा जाता है, तो ओरछा में राजा राम के रूप में विराजे हैं। इस कारण इस शहर में कोई दूसरा राजा नहीं होता। आज से 450 साल पहले यहां की महारानी जब अयोध्या से भगवान रामराजा सरकार को लेकर ओरछा आई थीं और स्थापना के साथ ही यह परंपरा प्रारंभ हो गई थी। मंदिर की स्थापना कराने वाले राजा मधुकर शाह ने भी भगवान को राजा मानकार खुद कार्यकारी राजा के रूप में काम किया था।

प्रतिदिन 4 समय दी जाती है सलामी
ओरछा मंदिर में मंगला आरती अर्थात सुबह की आरती के साथ भगवान के दर्शन प्रारंभ होते हैं। इस समय सुबह 8 बजे पहली सलामी दी जाती है। इसके बाद दोपहर 12.30 बजे राजभोग अर्थात भगवान को दोपहर का भोजन का भोग लगाया जाता है, दूसरी सलामी इसी समय दी जाती है। इसके बाद संध्या आरती जो रात 8 बजे होती है, उसमें सलामी और फिर रात में ब्यारी अर्थात रात के भोग व शयन आरती के दौरान भगवान श्री रामराजा सरकार को गार्ड ऑफ ऑनर देते हैं।

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तत्कालीन महाराजा मधुकर शाह प्रथम ने कराई थी परंपरा प्रारंभ
ओरछा रियासत के शासक रहे बुंदेला राजाओं के परिवार के सदस्य विश्वजीत सिंह बुंदेला ने जानकारी साझा करते हुए स्थानीय मीडिया को बताया कि महाराजा मधुकर शाह की पत्नी रानी कुंवर गणेश संवत 1631 में भगवार श्रीराम को अयोध्या से ओरछा लाई थीं। उस दौरान मंदिर में विराजमान भगवान को ओरछा का राजा घोषित करते हुए उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर या सलामी देने की परम्परा को प्रारंभ किया गया था। वे स्वयं जीवन पर्यंत कार्यकारी नरेश के तौर पर ओरछा का शासन संभालत रहे हैं।
पहले तलवार, फिर तोप अब बंदूक से दी जाती है सलामी
ओरछा में भगवान श्रीरामराजा सरकार की स्थापना के साथ ही उन्हें सशस्त्र सलामी देने की परंम्परा प्रारंभ हो गई थी। शुरूआत में राजसी परंपरा के अनुसार तलवार से सलामी दी जाती थी। फिर बाद में अंग्रेजी शासन काल के दौरान तोपों से सलामी दी जाने लगी। आजाद भारत में गार्ड ऑफ ऑनर का स्वरूप बदला और अब बंदूक से गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है। राज्य सरकार ने इसके लिए अलग से एसएएफ की एक टुकड़ी को विशेष रूप से श्रीरामराजा सरकार मंदिर में गार्ड ऑफ ऑनर के लिए तैनात किया है।












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