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MP News: सियासी ड्रामा ऑन रोड, CM के काफिले में नेताजी की हैरान कर देने वाली एंट्री, डिंडोरी से भोपाल तक हलचल

भोपाल से डिंडोरी तक गुरुवार को जैसे सियासी मौसम में अचानक गरज और बिजली कड़क उठी। वजह? मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के सख्त सुरक्षा वाले काफिले में एक 'स्पेशल गेस्ट' ने घुसने की ऐसी कोशिश की, जिसने पुलिस से लेकर पार्टी दफ्तरों तक सबको चौकन्ना कर दिया। और ये गेस्ट कोई और नहीं, बल्कि खुद डिंडोरी भाजपा जिला अध्यक्ष चमरू सिंह नेताम निकले।

जी हां, नेताजी की गाड़ी ने सीएम के काफिले में एंट्री मारने की कोशिश की और इसके बाद जो हुआ, उसने इलाके में सियासी पारा चढ़ा दिया।

Netaji surprising entry in CM Mohan Yadav convoy commotion from Dindori to Bhopal

बालपुर में शुरू हुई कहानी

गुरुवार, 20 मार्च 2025 की दोपहर थी। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव डिंडोरी जिले के बालपुर में वीरांगना रानी अवंतीबाई के बलिदान दिवस के कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे थे। यह एक महत्वपूर्ण आयोजन था, जिसमें सीएम ने शहीद रानी को श्रद्धांजलि दी और क्षेत्र के लोगों से मुलाकात की। कार्यक्रम खत्म होने के बाद दोपहर करीब 3:30 बजे, जब सीएम का काफिला हेलीपेड की ओर रवाना हुआ, तब पलकी रोड घाट पर ड्यूटी में तैनात मंडला जिले के मोहगांव थाने के आरक्षक हेमंत मरावी की नजर एक गाड़ी पर पड़ी। यह गाड़ी और किसी की नहीं, बल्कि भाजपा जिला अध्यक्ष चमरू सिंह नेताम की थी, जो काफिले के बीच घुसने की कोशिश कर रही थी।

आरक्षक हेमंत ने अपनी ड्यूटी निभाते हुए गाड़ी को रोका। लेकिन यहाँ से कहानी ने एक नाटकीय मोड़ ले लिया। हेमंत का कहना है कि गाड़ी रोकने पर चमरू सिंह नेताम भड़क गए। उन्होंने न सिर्फ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया, बल्कि कथित तौर पर धमकी भी दी कि "तेरी वर्दी उतरवा दूंगा।" यह सुनकर हेमंत सकते में आ गए, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और मामले की शिकायत अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दी। इसके बाद शाहपुर थाने में नेताम के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने सहित अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली गई।

भाजपा नेता का जवाब: "यह सब झूठ है

इस घटना के बाद जब चमरू सिंह नेताम से बात की गई, तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया कि ऐसा कुछ भी हुआ। उनका कहना था, "मैंने न तो किसी से बहस की, न ही कोई धमकी दी। यह सब बेबुनियाद आरोप हैं। मैं इसकी जानकारी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को दूंगा और सच सामने आएगा।" नेताम के इस बयान ने मामले को और रहस्यमयी बना दिया। क्या यह सचमुच एक गलतफहमी थी, या फिर कुछ और? यह सवाल अब हर किसी के मन में कौंध रहा है।

पुलिस की चुप्पी, सियासी हलचल शुरू

शाहपुर थाना प्रभारी से लेकर एडिशनल एसपी तक, पुलिस के सभी वरिष्ठ अधिकारी इस मामले पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "मामला संवेदनशील है। हमने एफआईआर दर्ज कर ली है, लेकिन जांच पूरी होने तक कुछ नहीं कह सकते।" दूसरी ओर, इस घटना ने स्थानीय स्तर पर सियासी माहौल को गर्मा दिया है। विपक्षी दल इस मौके को भुनाने की तैयारी में जुट गए हैं, वहीं भाजपा के अंदर भी इस बात को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं कि आखिर जिला अध्यक्ष ने ऐसा कदम क्यों उठाया।

पूरा घटनाक्रम: एक नजर में

  • कब और कहाँ: गुरुवार दोपहर 3:30 बजे, पलकी रोड घाट, डिंडोरी।
  • क्या हुआ: सीएम के काफिले में चमरू सिंह नेताम की गाड़ी घुसने की कोशिश।
  • विवाद: आरक्षक हेमंत मरावी ने रोका, तो नेताम ने कथित तौर पर अभद्रता की और धमकी दी।
  • नतीजा: शाहपुर थाने में एफआईआर दर्ज, मामला शासकीय कार्य में बाधा का।
  • नेताम का पक्ष: "कोई विवाद नहीं हुआ, सब झूठ है।"
  • इलाके में चर्चा का बाजार गर्म
  • बालपुर और शाहपुर के चाय की दुकानों से लेकर सोशल मीडिया तक, यह घटना हर जगह चर्चा का विषय बन गई है। एक स्थानीय दुकानदार ने हंसते हुए कहा, "अरे भाई, सीएम का काफिला कोई आम रास्ता थोड़े है कि कोई भी गाड़ी ले आए! लेकिन नेताजी को तो जल्दी थी शायद।" वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि यह मामला छोटा था, जिसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। एक अन्य नागरिक ने कहा, "पुलिस को पहले पूरी जांच करनी चाहिए थी, फिर एफआईआर दर्ज करनी चाहिए।"

आगे क्या?

अब सबकी नजर इस बात पर है कि इस मामले की जांच में क्या निकलता है। क्या चमरू सिंह नेताम पर लगे आरोप साबित होंगे, या फिर वे अपनी बात को सही साबित कर पाएंगे? पुलिस की चुप्पी और भाजपा नेतृत्व की प्रतिक्रिया इस कहानी को और रोचक बना रही है। यह घटना न सिर्फ डिंडोरी की सियासत में एक नया रंग लाई है, बल्कि यह भी सवाल उठा रही है कि क्या काफिले की सुरक्षा में कोई चूक हुई थी।

फिलहाल, डिंडोरी की सड़कों पर यह सवाल गूंज रहा है-क्या यह सिर्फ एक गलतफहमी थी, या फिर सत्ता और शक्ति के प्रदर्शन का नमूना? जवाब का इंतजार तो जांच के बाद ही होगा, लेकिन तब तक यह कहानी लोगों की जुबान पर चढ़ चुकी है।

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