जानिए कूनो नेशनल पार्क में नामीबियाई मादा चीता नाभा की कैसे हुई मौत, प्रशासनिक और संरक्षण चुनौतियां उजागर
MP News: भारत की बहुचर्चित चीता पुनर्वास परियोजना को उस वक्त एक और गहरा झटका लगा, जब मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क (KNP) में नामीबिया से लाई गई मादा चीता नाभा की मौत हो गई। यह घटना महज़ एक चीते की मृत्यु नहीं, बल्कि संरक्षण नीति, प्रबंधन और ज़मीनी तैयारियों पर खड़े हुए गंभीर सवालों की घंटी है।
नाभा, 8 साल की मादा चीता, 17 सितंबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में भारत लाई गई थी। लेकिन अब वह इतिहास बन चुकी है-वह भी एक दुखद और सवालों से घिरे अंत के साथ।

कैसे हुई नाभा की मौत?
कूनो के क्षेत्रीय निदेशक उत्तम शर्मा के अनुसार, "नाभा एक सप्ताह पहले अपने सॉफ्ट रिलीज बोमा में शिकार करते समय घायल हो गई थी। उसके बाएं पैर की उलना और फिबुला हड्डियां टूट गई थीं। साथ ही शरीर के अन्य हिस्सों में भी गंभीर चोटें आई थीं। इलाज के तमाम प्रयासों के बावजूद शनिवार को उसकी मृत्यु हो गई।"
हालांकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से ही यह साफ होगा कि मौत की वास्तविक वजह क्या रही-आंतरिक रक्तस्राव, संक्रमण, या हड्डियों के टूटने से होने वाला शारीरिक आघात?
क्या है नाभा की मौत का बड़ा मतलब?
- नाभा की मौत केवल एक व्यक्तिगत नुकसान नहीं, बल्कि चीता पुनर्वास परियोजना की नाजुकता और प्रशासनिक विफलताओं की झलक है।
- अब तक कुल 28 चीतों में से 2 दर्जन से कम ही जीवित बचे हैं।
- 2023 में मादा साशा की मौत गुर्दे की बीमारी से हुई थी।
- 2024 में पवन नामक नर चीता की मृत्यु डूबने से हुई।
- मई 2023 में तीन शावक गर्मी में मारे गए थे।
नाभा की मौत यह संकेत देती है कि कूनो के बोमा-जहाँ चीतों को जंगल में छोड़ने से पहले कुछ समय रखा जाता है-उतने सुरक्षित नहीं हैं, जितने होने चाहिए। शिकार के लिए प्रेरित किया गया चीता यदि खुद घायल हो जाए, तो प्रश्न बनता है कि प्राकृतिक व्यवहार और संरक्षण प्रबंधन में तालमेल कहां गड़बड़ा गया?
कूनो में चीतों की स्थिति
नाभा की मृत्यु के बाद, कूनो नेशनल पार्क में 26 चीते बचे हैं, जिनमें से 16 जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, ये चीते कूनो के पारिस्थितिकी तंत्र में अच्छी तरह ढल गए हैं, अन्य शिकारियों के साथ सह-अस्तित्व बना रहे हैं, और नियमित रूप से शिकार कर रहे हैं। दो मादा चीतों, वीरा और निरवा, अपने हाल ही में जन्मे शावकों के साथ स्वस्थ हैं। हाल ही में सभी चीतों को एंटी-एक्टो-पैरासिटिक दवा दी गई है, और गांधी सागर अभयारण्य में स्थानांतरित किए गए दो नर चीते भी स्वस्थ हैं।
चीता पुनर्वास परियोजना की चुनौतियां
नाभा की मृत्यु इस परियोजना में आई कई चुनौतियों में से एक है। 2022 में शुरू हुई इस परियोजना के तहत नामीबिया से 8 और दक्षिण अफ्रीका से 12 चीतों को कूनो लाया गया था। हालांकि, अब तक कई चीतों की मृत्यु हो चुकी है, जिसमें 2023 में साशा (गुर्दे की बीमारी के कारण) और 2024 में पवन (डूबने के कारण) शामिल हैं। मई 2023 में अत्यधिक गर्मी के कारण मादा चीता ज्वाला के तीन शावक भी मर गए थे।
पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. रवि चतुर्वेदी ने कहा, "कूनो में चीतों की मृत्यु चिंताजनक है। सॉफ्ट रिलीज बोमा में शिकार के दौरान चोटें और अन्य कारणों से होने वाली मौतें यह दर्शाती हैं कि हमें आवास प्रबंधन, निगरानी, और चिकित्सा सुविधाओं को और मजबूत करना होगा।"
विपक्ष का हमला
मध्य प्रदेश कांग्रेस ने नाभा की मृत्यु को BJP सरकार की नाकामी से जोड़ा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा, "कूनो नेशनल पार्क में चीतों की बार-बार मृत्यु चिंताजनक है। BJP सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को केवल प्रचार का साधन बनाया है, लेकिन प्रबंधन और निगरानी में कमी साफ दिख रही है।"
मध्य प्रदेश में मौसम की मार
कूनो नेशनल पार्क, जो पूर्वी शिवपुरी में स्थित है, में 12 जुलाई 2025 को बिजली के साथ भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। यह बारिश न केवल पार्क के प्रबंधन को और चुनौतीपूर्ण बना सकती है, बल्कि चीतों की सुरक्षा और निगरानी पर भी असर डाल सकती है। रीवा, रायसेन, टीकमगढ़, और छतरपुर जैसे जिलों में भी भारी बारिश ने बाढ़ जैसे हालात पैदा किए हैं, जिससे प्रशासन की तैयारियां कठघरे में हैं।
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