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सीताराम की रसोईः पितृपक्ष में यहां भोजन कराने से पूर्वज होते हैं तृप्त, देते हैं आशीष

सागर, 24 सितंबर। पितृपक्ष में अपने पूर्वजों का श्राद्ध करने के लिए विभिन्न तरह के कर्मकांड के साथ ब्राहम्णों, गरीबों को भोजन कराने का विधान है। लोग अपनी क्षमता अनुसार घर-परिवार में भोजन भी कराते हैं, लेकिन सागर में एक संस्था ऐसी है जहां 19 साल से लगातार गरीब, असहाय, बेसहारा, वृद्धजन, दिव्यांगों को भोजन कराया जाता है। यहां श्राद्ध पक्ष के दौरान भोजन कराने के लिए लोग सेवा करने आते हैं। अपने पितरों की याद में श्राद्ध पक्ष में अपने हाथों में भोजन परोसते हैं। मान्यता है कि सीताराम रसोई में श्राद्ध कराने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।

सीताराम रसोई सागर में एक भरोसे का नाम और स्थान हैं

सीताराम रसोई सागर में एक भरोसे का नाम और स्थान हैं

सागर की सीताराम रसोई सागर में ऐसा स्थान है, जहां श्राद्ध पक्ष में पितरों की याद में भोजन कराने के लिए लोग लाइन में लगे नजर आते हैं। यहां किसी-किसी दिन तो 50 से 80 लोग अपने बुजुर्गों, दिवंगत परिजन, माता-पिता की श्राद्ध तिथि पर ब्राहम्णों, गरीबों, बुजुर्गों को भोजन कराने के लिए लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं। दरअसल सीताराम रसोई सागर में एक भरोसे का नाम और स्थान हैं, जहां भोजन करने वाले और भोजन परोसने वालों को सुकून और आत्मिक संतुष्ठि मिलती है। इसलिए लोग यहां समिति सदस्यों से संपर्क कर श्राद्ध पक्ष में एक दिन का भोजन कराने के लिए नाममात्र की आर्थिक सहयोग राशि देकर लोगों को भोजन कराने आते हैं।

विदेशों से भी लोग पितरों की तृप्ति के लिए भोजन कराने आते हैं

विदेशों से भी लोग पितरों की तृप्ति के लिए भोजन कराने आते हैं

सीताराम रसोई में श्राद्ध पक्ष के दौरान लोगों को भोजन कराने के लिए सागर और प्रदेश ही नहीं देश के कई हिस्सों और विदेशों तक से लोग संपर्क कर राशि भेजते हैं और अपने बड़े-बुजुर्गों, माता-पिता या दिवंगतों की याद में पितृपक्ष के दौरान श्राद्ध के लिए भोजन कराते हैं। हर साल दर्जनों की संख्या में लोग विदेशों और देश के अलग-अलग हिस्सों से या तो खुद आते हैं या फोन पर संपर्क कर बुकिंग कराकर समिति के खाते में राशि पहुंचाकर भोजन कराने का पुण्यलाभ उठाते हैं।

 लोग यहां खुद परिवार सहित आते हैं और अपने हाथों से ब्राहम्णों व गरीबों को भोजन कराते हैं

लोग यहां खुद परिवार सहित आते हैं और अपने हाथों से ब्राहम्णों व गरीबों को भोजन कराते हैं

श्री सीताराम रसोई के सचिव व समाजसेवी प्रकाश चौबे बताते हैं कि श्राद्ध पक्ष में लोग अपने परिवार के दिवंगतों, पूर्वजों की याद में पहले से रजिस्ट्रेशन कराते हैं। एक दिन में करीब 40 लोगो को भोजन कराया जाता है। इसमें ब्राहम्ण, बुजुर्ग, बच्चे, बेसहारा सभी शामिल होते हैं। समिति श्राद्ध का भोजन कराने के लिए मात्र 1500 रुपए की रसीद काटती है। लोग यहां खुद परिवार सहित आते हैं और अपने हाथों से ब्राहम्णों व गरीबों को भोजन कराते हैं। हमारी रसोई 365 दिन रोजाना भोजन खिलाने का काम निस्वार्थ भाव से कर रही है। इसमें समिति के सदस्य व समाजसेवियों का सहयोग रहता है।

बीते 19 साल से सीताराम रसोई लगातार सेवा में जुटी है

बीते 19 साल से सीताराम रसोई लगातार सेवा में जुटी है

सचिव प्रकाश चौबे बताते हैं कि शहर के कुछ समाजसेवियों जिसमें डॉक्टर, व्यावसायी, बिल्डर्स, कालोनाईजर, इंजीनियर, नौकरीपेश सहित अन्य व्यावसाय से जुड़े लोग शामिल हैं। सभी ने मिलकर समाजसेवा की भावना से श्री सीताराम रसोई संस्था का गठन कर रजिस्ट्रेशन कराया था। 31 दिसंबर 2003 को एक किराए के भवन में गरीबों को निःशुल्क भोजन वह भी दोनो वक्त का खिलाना प्रारंभ किया था। श्री चौबे बताते हैं कि हनुमानजी महाराज की ऐसी कृपा है कि रसोई में बीते 19 साल में कभी ऐसा दिन नहीं आया जब भोजन न बना हो और गरीबों को भोजन न कराया गया हो। सबसे खास बात है कि सीताराम रसोई संस्था और इसके पूरे प्रकल्प केवल समाजसेवियों के सहयोग से चलते हैं। कभी भी सरकारी अनुदान या मदद नहीं ली गई है। कभी किसी के पास दान मांगने समिति का कोई सदस्य नहीं गया है। समिति ने धीरे-धीरे कर खुद का भवन, खुद के वाहन, रोटी बनाने के लिए मशीन और अन्य संसाधन खरीदें हैं।

 पितृपक्ष में गयाजी में पिंडदान कराकर लौटे और सीताराम रसोई में भोजन कराया

पितृपक्ष में गयाजी में पिंडदान कराकर लौटे और सीताराम रसोई में भोजन कराया

देश में पितृपक्ष में लोग गयाजी जाकर अपने पूर्वजों पितरों का पिंडदान करने के लिए जाते हैं, उसी तरह सागर में सीताराम रसोई में भोजन कराने को लोग एक परंपरा व नियम जैसेा मानने लगे हैं। संस्था पर भरोसा कहें या ईश्वर की कृपा की लोग गयाजी में पिंडदान करके जब घर वापस लौटते हैं तो दूसरे-तीसरे दिन सीताराम रसोई में पहुंचकर पूर्वजों के नाम से ब्राहम्ण भोज और गरीबों को भोजन कराते हैं। संस्था के माध्यम से इस साल सागर के ऐसे परिवार जो बाहर रहते हैं उन्होंने संस्था को आरटीजीएस से राशि भेजकर श्राद्ध कराया है। इनमें दिल्ली, इंदौर, मुंम्बई, गुजरात सहित अन्य जगहों से लोग शामिल हैं।

असहाय, बेसहारा यहां नहीं आ पाते, उनके घर और ठिकानों पर भोजन पहुंचाते हैं

असहाय, बेसहारा यहां नहीं आ पाते, उनके घर और ठिकानों पर भोजन पहुंचाते हैं

सीताराम रसोई संस्था के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र चउदा बताते हैं कि भूतेश्वर मंदिर के सामने स्थित भवन में साल के 365 दिन भोजन कराया जाता है। कोई भी जरुरत मंद यहां भोजन कर सकता है। जो गरीब, असहाय, बुजुर्ग, दिव्यांग, बेघर हमारे यहां तक नहीं आ सकते हैं, ऐसे लोगो का पूर्व में सर्वे कराकर बाकायदा पूरी सूची तैयार की गई है। इन लोगों को भोजन उनके घर तक पहुंचाया जाता है। कुछ लोग रेलवे स्टेशन, बस स्टेंड व ऐस ही सार्वजनिक स्थान पर जीवन गुजारते हैं, ऐसे लोगों को भी हमारी रसोई उनके स्थान पर जाकर भोजन प्रदान करती है। इसके लिए संस्था ने खुद के वाहन रखे हैं। संस्था के स्वयं सेवक खुद अपने हाथों से भोजन देने जाते हैं। डॉ. राजेंद्र चउदा के अनुसार समिति में सचिव प्रकाश चैबे सहित सदस्य कृष्णपाल ठाकुर, आलोक अग्रवाल, डब्बू मुखारया, मनोज डेंगरे, राजकमल केशरवानी, प्रभात जैन, राजेश गुप्ता, अतुल ठाकुर सभी मिलकर समर्पित भाव से सीताराम रसोई के लिए काम करते हैं।

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