एमपी टाॅपर छात्र के गरीबी ने जकड़ लिए पैर, NIT एडमिशन फीस के लिए मदद की दरकार
सागर, 21 सितंबर। मप्र के सागर का छात्र आयुष्मान ताम्रकार पढ़ाई में प्रतिभावान है। उसने दो साल पहले एमपी बोर्ड में प्रदेश में टाॅप किया था। इस साल 12वीं में भी वह एमपी टाॅपर रहा है। उसके पिता चैकीदारी करते हैं। घर में कोई कमाने वाला नहीं है। आयुष्मान ने एनआईटी काॅलेज से बीटेक करने के लिए फाॅर्म डाला था। भोपाल में उसकी दो राउंड की काउंसिलिंग हो गई। भोपाल में बताया गया कि काउंसिलिंग में जैसे ही काॅलेज अलाॅट होगा उसे दो किस्तों में 75 हजार रुपए फीस जमा करना होगी! आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण व जनप्रतिनिधियों और कलेक्टर के पास गया था, लेकिन किसी ने भी इस एमपी टाॅप छात्र की मदद नहीं की है।

सरकार, शासन, प्रशासन, जनप्रतिनिधि स्कूली स्तर पर पढ़ाई में टाॅप करने वाले प्रतिभावान विद्यार्थियों को सम्मानित करती है, प्रमाण-पत्र और प्रशस्ति पत्र देती है, लेकिन जब उच्च और तकनीकि शिक्षा में काॅलेजों में प्रवेश की बात आती है तो यही मप्र के गरीब टाॅपर छात्र फीस भरने के लिए सरकार, प्रशासन के सामने मदद की गुहार लगाते नजर आते हैं, लेकिन तमाम योजनाओं के बावजूद उन्हें मदद नहीं मिल पाती। ऐसा ही मामला सागर में सामने आया है। दो साल पहले सागर के मोहन नगर वार्ड निवासी विपल ताम्रकार के बेटे आयुष्यमान ने 10 वीं में प्रदेश में टाॅप किया था। आयुष्मान ने 500 अंक में से 499 अंक प्राप्त कर प्रदेश में टाॅप किया था। उस समय मीडिया उसे तलाशते हुए घर पहुंची। शिक्षा विभाग, नेता, अधिकारियों ने उसे सम्मानित कर मंच से प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। इसी छात्र ने इस साल 12वीं में 500 अंक में से 498 अंक लाकर हायर सेकंडरी में भी टाॅप किया है। उसने बीटेक करने के लिए एनआईटी काॅलेज में प्रवेश के लिए फाॅर्म डाला है। इसके लिए उसे करीब 75 हजार रुपए फीस भरने की बात भोपाल में काउंसिलिग के दौरान कही गई है। उसकी फाइनल काउंसिलिंग दो दिन बाद होना है, इसके बाद उसे काॅलेज अलाॅट किया जाएगा।

कलेक्टर कार्यालय गए तो सरकारी योजनाएं गिनाकर टरका दिया
आयुष्मान ने घर आकर पिता विमल कुमार को फीस की बात बताई तो वे चिंतित हो गए और बेटे को बताया कि अपने पास तो इतनी रकम ही नहीं है। मामला वार्ड पार्षद अशोक साहू की जानकारी में पहुंचा तो आयुष्मान को लेकर जनप्रतिनिधियों व यहां से दी गई सलाह के बाद जिला प्रशासन के पास पहुंचे थे। कलेक्टर से मिले, लेकिन उसे एक चेंबर से घुमाकर दूसरे चेंबर में भेज दिया गया। निराश होकर पार्षद और आयुष्मान वापस लौट आए। प्रतिभावान व एमपी टाॅपर होने के बावजूद उसे उच्च शिक्षा के लिए कहीं से आर्थिक मदद नहीं मिल सकी। अब आयुष्मान ने शहर के समाजसेवियों से मदद की गुहार लगाई है, ताकि उसकी फीस भरी जा सके और वह आगे की पढ़ाई कर सके।
कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी ने सम्मानित किया था
आयुष्मान ने जब 10वीं की परीक्षा में प्रदेश में टाॅप किया था, उस समय तत्कालीन कलेक्टर प्रीति मैथिल और तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी महेंद्र प्रताप तिवारी ने साल 2019 में उसे सम्मानित का प्रशस्ति पत्र सौंपा था। इसी प्रकार 12वीं में टाॅप करने पर विभिन्न संस्थाओं और विभाग ने सम्मान प्रदान किया था। हालांकि कोरोना काल के कारण 12वीं की टाॅपर सूची जारी नहीं की गई थी। फिर भी 99.6 अंक हासिल किए हैं। आयुष्मान ने वन इंडिया से बात करते हुए बताया कि वह कई जगह घूम आया, कलेक्टर व कुछ अन्य लोगों के पास अपनी एडमिशन फीस में आर्थिक मदद की गुहार लेकर गया था, लेकिन उसे निराशा ही हाथ लगी है। हर व्यक्ति पूछताछ तो बारीकि से करता है, लेकिन मदद का आश्वासन देकर टरका देते हैं।












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