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Sagar: पत्रकारिता विभाग के फर्जी असिस्टेंट प्रोफेसर को जेल भेजा, 3 साल की कैद

सागर, 1 अक्टूबर। मप्र के सागर स्थित डॉ. हीरसिंह गोर केंद्रीय विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में फर्जी अंकसूची लगाकर नौकरी हासिल करने वाले असिस्टेंट प्रोफेसर को कोर्ट ने जेल भेज दिया है। मामला साल 2012-13 का है। मामले में विभाग में नौकरी के लिए दूसरे आवेदक रहे डॉ. अनिल किशोर पुरोहित ने जन शिकायत प्रकोष्ठ के माध्यम से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। लंबी सुनवाई व दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा सिद्ध होने पर शुक्रवार को कोर्ट ने आरोपी असिस्टेंट प्रोफेसर संतोष कुमार को 3 साल के कठोर कारावास व 10 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है।

डॉ. हीरसिंह गोर केंद्रीय विश्वविद्यालय

सागर में द्तिीय अपर सत्र न्यायाधीश शिव बालक साहू की कोर्ट ने डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विवि के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में पदस्थ सहायक प्राध्यापक संतोष कुमार अहिरवार 39 साल को फर्जी मार्कशीट व दस्तावेजों में धोखाधड़ी कर नौकरी पाने का दोषी माना है। कोर्ट ने लंबी सुनवाई व कोर्ट में प्रस्तुत दस्तावेजों और सबूतों के आधार पर शिक्षक संतोष अहिरवार को 3 साल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उसे धारा 420 के तहत 2 साल एवं धारा 471 के तहत दोषी मानते हुए 3 साल के कठोर कारावास सहित 10 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है।

पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग

डॉ. अनिल किशोर पुरोहित ने की थी फर्जीवाड़े की शिकायत
जिला अभियेाजन के मीडिया प्रभारी सौरभ डिम्हा ने बताया कि दिनांक 26.08.2016 को फरियादी डॉ. अनिल किशोर पुरोहित ने जन शिकायत प्रकोष्ठ के माध्यम से पुलिस अधीक्षक जिला सागर को इस आशय का लिखित एक आवेदन प्रस्तुत किया था। इसमें डॉण् हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर में साल 2012-13 में पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में नवनियुक्त सहायक प्राध्यापक संतोष कुमार अहिरवार ने अपने आवेदन में निर्धारित योग्यता के संबंध में बीसीजे की फर्जी अंकसूची लगाकर अनुचित आधार पर सहायक प्राध्यापक का पद प्राप्त किया है। जबकि फरियादी डॉ. अनिल पुरोहित विभागीय मैरिट सूची में प्रथम स्थान पर था।

माखनलाल पत्रकारिता विवि से सत्यापन में संतोष अहिरवार को फेल बताया गया था
जिला अभियेाजन के मीडिया प्रभारी सौरभ डिम्हा ने बताया कि फर्जी शिक्षक संतोष कुमार की अंकसूची का वैरिफिकेशन माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से कराया गया था, जिसमें पाया गया कि संतोष कुमार बीसीजे 2008 में छटवें सेमिस्टर में अनुत्तीर्ण हैं। फरियादी की उक्त शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं की गई। डॉ. अनिल के आवेदन पत्र पर थाना सिविल लाइन पुलिस द्वारा जांच की गई। जांच में यह बात सामने आई कि वर्ष 2012-13 में पत्रकारिता एवं जनसंचार में सहायक प्राध्यापक के पद पर संतोष कुमार अहिरवार द्वारा बैचलर ऑफ जर्नलिज्म की फर्जी अंकसूची के आधार पर नियुक्ति की गई, जिसमें संतोष अहिरवार द्वारा जो अंकसूची पेश की गई थी उसका सत्यापन विश्वविद्यालय भोपाल से करवाया गया जिनके द्वारा रिपोर्ट में उक्त अंकसूची जारी नहीं किया जाना पाया था। अतः फर्जी अंकसूची पेश करने के आधार पर सहायक प्राध्यापक के पद पर नियुक्त होना पाया गया।

दस्तावेज जब्त कर गिरफ्तार किया गया था
थाना सिविल लाईन में एफआईआर दर्ज कर मामला जांच में लिया गया था। विवेचना के दौरान साक्षियों के बयान दर्ज किए गए। अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए गए थे। डॉ हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एवं विधि अधिकारी से पूछताछ कर महत्वपूर्ण साक्ष्य संकलित किए गए। विवेचना के दौरान आरोपी संतोष अहिरवार से पूछताछ कर जब्ती की कार्यवाही की गई। आरोपी संतोष अहिरवार को गिरफ्तार किया गया। विवेचना उपरांत अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। अभियोजन के द्वारा प्रस्तुत सबूतों और दलीलों से सहमत होते हुए मामले को संदेह से परे प्रमाणित पाए जाने पर कोर्ट ने आरोपी संतोष अहिरवार को भादवि की धारा 420, 471 में दोषी पाते हुए 3 साल कैद एवं अर्थदण्ड की सजा सुनाई है।

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