MP News: PSC-2021 का फाइनल रिजल्ट जारी, जानिए टॉपर्स की सूची, उज्जैन के भाई-बहन का एक साथ चयन
MPPSC-2021 Result: एमपी पीएससी (मप्र लोक सेवा आयोग) ने गुरुवार शाम राज्य सेवा परीक्षा-2021 की फाइनल चयन सूची जारी की है। अलग-अलग विभागों के चयनित अभ्यर्थियों के साथ ही अनुपूरक सूची भी तैयार की गई है। ओबीसी आरक्षण मामला कोर्ट में लंबित होने के कारण इस बार भी 87% अभ्यर्थियों का ही परिणाम आया है।
फाइनल नतीजों में टॉप-10 में से 7 लड़कियां हैं। 24 डिप्टी कलेक्टर में 12 बेटियों ने जगह बनाई है। रायसेन की अंकिता पाटकर 1575 में से 942 अंक हासिल कर पहले स्थान पर रहीं। उज्जैन की राजनंदनी ठाकुर और उनके भाई अर्जुन सिंह ठाकुर का एक साथ डिप्टी कलेक्टर के लिए चयन हुआ है।

इस नतीजे के साथ प्रदेश को 24 डिप्टी कलेक्टर, 13 डीएसपी, जिला पंजीयक सहायक संचालक, वाणिज्य कर अधिकारी, श्रम अधिकारी, मुख्य नगर पालिका अधिकारी, अतिरिक्त सहायक विकास आयुक्त, नायब तहसीलदार, सहायक श्रम अधिकारी, वाणिज्यिक कर निरीक्षक सहित पदों पर 243 नए अफसर मिल गए हैं।
प्रदेश के टॉपर्स के नाम और उनके नंबर
- - अंकिता पाटकर: 942
- - अमित कुमार सोरी: 921.25
- - पूजा चौहान: 920
- - मनीषा जैन: 917.50
- - प्रियंक मिश्रा: 916.25
- - प्रियल यादव: 910.25
- - आशिमा पटेल: 906.50
- - रितु चौरसिया: 905.50
- - सृजन श्रीवास्तव: 903.25
- - ज्योति राजोरे: 902.75

भाई-बहन ने एक साथ डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयन
उज्जैन के भाई-बहन ने एक साथ डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयन हुआ है। भाई की 21वीं और बहन की 14वीं रैंक आई है। हालांकि, बहन पहले से नायब तहसीलदार हैं। भाई अर्जुन सिंह ठाकुर और बहन राजनंदनी सिंह ठाकुर हैं। उनके पिता प्रो. डॉ. वायएस ठाकुर इंजीनियरिंग कॉलेज में पदस्थ हैं।
दोनों भाई-बहन ने उज्जैन के क्रिस्ट ज्योति स्कूल से 12वीं तक की पढ़ाई करने के बाद भोपाल से इंजीनियरिंग की है। राजनंदनी का साल 2020 में नायब तहसीलदार के पद पर चयन हो गया था।
10 में 7 बेटियों ने मारी बाजी
2019 के रिजल्ट में भी टॉप 10 में 7 बेटियां थीं। एमपी पीएससी-2019 में टॉप 10 पोजिशन में 7 लड़कियां शामिल थीं। वहीं, 2020 में टॉप 10 में 4 लड़कियों ने स्थान पक्का किया था, तब 6 लड़के टॉप टेन में थे। एमपी पीएससी-2021 के नतीजों में फिर 2019 की तरह टॉप 10 में 7 बेटियों ने बाजी मारी है।
ओबीसी आरक्षण पर सरकार को लेना है निर्णय
एमपी पीएससी की दलील है कि ओबीसी आरक्षण पर सरकार को निर्णय लेना है। मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को तत्कालीन कांग्रेस सरकार (2018) ने 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया था। इसके विरोध में कई याचिकाएं दायर की गई थीं। मामला कोर्ट में विचाराधीन है। पिछली सुनवाइयों के दौरान हाईकोर्ट स्पष्ट कर चुका है कि उसने 13% परिणामों पर रोक नहीं लगाई है।
पीएससी की दलील है कि यह राज्य शासन के अधिकार क्षेत्र का विषय है। उसे ही निर्णय लेना है, जिसे लेकर कई तकनीकी पहलू भी परेशानी का कारण बने हुए हैं। इस विवाद के चलते राज्य सेवा परीक्षा 2019, 2020, 2021 के 13% फाइनल रिजल्ट रुके हुए हैं।












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