Opinion: MP में बिजली उत्पादन 4 गुना बढ़ा, सरप्लस बिजली इतनी कि दिल्ली तक को दे रहे
Madhya Pradesh बिजली के मामले में बीते 19 सालों में तेजी से आगे बढ़ा और आत्मनिर्भर बना है। प्रदेश लालटेन युग से निकलकर ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना है। वर्तमान में बिजली का उत्पादन सरप्लस में हो रहा है। मप्र दिल्ली मेट्रो तक को बिजली बेच रहा है। बिजली भरपूर मिलने से आर्थिक वृद्धि दर बढ़कर चार गुना हो गई औद्योगिक विकास दर भी 23 फीसदी तक बीते दो दशकों में बढ़ी है।

मध्य प्रदेश में बिजली उत्पादन और आपूर्ति के मामले में भाजपा की शिवराज सरकार ने अनुकरणीय पहल की है। सरकार के सतत प्रयासों के मप्र दो दशकों में आज बिजली दूसरे प्रदेशों को बेच रहा है। यह स्थिति बीते 10 सालों से हैं। प्रदेश में 365 दिन बिजली सरप्लस होती है। वर्तमान में 17 हजार 170 मेगावाट बिजली तैयार हो रही है। नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन इकाईयां ही करीब 6 हजार मेगावॉट का उत्पादन कर रही हैं।
मप्र सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायोमास से बिजली बना रहा
मध्य प्रदेश में बिजली उत्पादन केवल बड़े प्लांटों से ही नहीं हो रहा, बल्कि शिवराज सिंह सरकार की दूरदर्शिता का नतीजा है कि प्रदेश में 2840 मेगावाट बिजली सौर ऊर्जा से तैयार हो रही है। इसी प्रकार पवन ऊर्जा से भी इतनी ही बिजली मिल रही है। लघु जल विद्युत ऊर्जा सहित बायोमास ऊर्जा से भी ढाई सौ मेगावाट से अधिक बिजली का उत्पादन हो रहा है।
बिजली के मामले में मप्र की उपलब्धि
- प्रदेश में 17170 मेगावॉट मांग आपूर्ति
- बिजली उत्पादन सरप्लस
- प्रति व्यक्ति विद्युत खपत 1280 यूनिट
- आर्थिक वृद्धि दर 4.43 से 16.43 प्रतिशत
- औद्योगिक विकास दर 0.61 से 24 प्रतिशत
- रीवा में एशिया की सबसे बड़ी सौर ऊर्जा परियोजना
- ओंकाररेश्वर में 600 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर परियोजना
- आगर-शाजापुर-नीमच में 1500 मेगावॉट सोलर पार्क
- सांची देश की पहली सोलर सिटी
मध्य प्रदेश ऊर्जा उत्पादन के आंकड़े
- 5943 मेगावॉट की नवकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित
- सौर ऊर्जा - 2840 मेगावॉट
- पवन ऊर्जा - 2844 मेगावॉट
- लघु जल विद्युत ऊर्जा - 124 मेगावॉट
- बायोमास ऊर्जा - 135 मेगावॉट
- 112 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी
- साल 2030 तक 20 हजार मेगावाट नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य












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