MP News transfer: मध्य प्रदेश में तबादला तूफान, आधी रात को नीति जारी, CM मोहन यादव की मंजूरी बनी तलवार

MP News transfer: मध्य प्रदेश की सरकारी मशीनरी में एक बार फिर हलचल मच गई है। चार साल की सुस्ती और इंतजार के बाद, मोहन यादव सरकार ने आखिरकार तबादला नीति 2025 को हरी झंडी दिखा दी। लेकिन यह कोई साधारण फैसला नहीं था-शनिवार और रविवार की दरमियानी रात, ठीक 12:05 बजे, जब प्रदेश सो रहा था, सामान्य प्रशासन विभाग ने चुपके से नई तबादला नीति जारी कर दी।

इस नीति ने 6 लाख 6 हजार नियमित कर्मचारियों के दिलों की धड़कनें तेज कर दी हैं, क्योंकि अनुमान है कि 30 मई तक 60 हजार से अधिक अधिकारी-कर्मचारियों की कुर्सियां इधर से उधर हो सकती हैं। और हां, इस बार हर तबादले पर मुख्यमंत्री की मंजूरी की तलवार लटक रही है!

MP News Transfer storm policy issued at midnight CM Mohan Yadav approval became a sword

आधी रात का ड्रामा: क्यों इतनी जल्दबाजी?

मंगलवार, 29 अप्रैल 2025 को मोहन कैबिनेट ने भोपाल में हुई बैठक में तबादला नीति 2025 को मंजूरी दी थी। सभी की निगाहें सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) पर टिकी थीं, लेकिन चार दिन तक सन्नाटा पसरा रहा। कर्मचारी और अधिकारी बेचैन थे, सोशल मीडिया पर अटकलें चल रही थीं, और मंत्रालय के गलियारों में फुसफुसाहटें तेज थीं। फिर अचानक, शनिवार-रविवार की रात 12:05 बजे, जीएडी ने 21 पेज की पीडीएफ फाइल जारी कर दी। यह नीति न केवल राज्य स्तर, बल्कि जिला स्तर पर भी तबादलों का रोडमैप बन गई। लेकिन सवाल यह है-आधी रात को नीति जारी करने की क्या जरूरत थी? क्या सरकार मंत्रियों के दबाव से बचना चाहती थी, या यह कर्मचारियों को चौंकाने की रणनीति थी?

60 हजार कर्मचारियों का भविष्य दांव पर

मध्य प्रदेश में करीब 6 लाख 6 हजार नियमित कर्मचारी हैं, और नई नीति के तहत 10% तबादले तय माने जा रहे हैं। यानी 1 मई से 30 मई 2025 तक की इस "तबादला खिड़की" में 60 हजार से अधिक अधिकारी-कर्मचारी इधर से उधर हो सकते हैं। भोपाल से लेकर जिला मुख्यालयों तक, कर्मचारी ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन तैयार करने में जुट गए हैं। लेकिन इस बार खेल में एक बड़ा ट्विस्ट है-1 अप्रैल 2024 से 30 अप्रैल 2025 के बीच हुए सभी तबादलों को अब मुख्यमंत्री की मंजूरी लेनी होगी। बिना सीएम के हस्ताक्षर के कोई भी ट्रांसफर वैध नहीं होगा। यह शर्त न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया को कड़ा करती है, बल्कि मंत्रियों और प्रभारी मंत्रियों के लिए भी चुनौती बन गई है।

पुलिस तबादलों में बोर्ड का दबदबा

नीति में पुलिस विभाग के लिए खास प्रावधान किए गए हैं। उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) से नीचे के पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले गृह विभाग के पुलिस स्थापना बोर्ड के फैसले पर आधारित होंगे। बोर्ड जिले में पोस्टिंग का फैसला लेगा, और पुलिस अधीक्षक (एसपी) प्रभारी मंत्री के परामर्श के बाद पदस्थापना करेंगे। लेकिन डीएसपी और उससे वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले बोर्ड के दिशा-निर्देशों के आधार पर विभागीय मंत्री की सिफारिश और सीएम की अंतिम मंजूरी के बाद ही होंगे। यानी पुलिस महकमे में भी छोटे-बड़े तबादलों पर सीएम कार्यालय की नजर रहेगी।

MP News transfer: कमजोर परफॉर्मर्स की खैर नहीं!

इस बार तबादला नीति में एक सख्त प्रावधान ने कर्मचारियों की नींद उड़ा दी है। नीति कहती है कि प्रशासनिक आधार पर तबादलों में उन कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनका पिछले वित्तीय वर्ष में परफॉर्मेंस कमजोर रहा हो। यानी अगर आपने निर्धारित लक्ष्य हासिल नहीं किए, तो आपकी कुर्सी सबसे पहले हिल सकती है। पहले यह माना जाता था कि 3 साल की सेवा के बाद ही तबादला होगा, लेकिन अब यह शर्त हटा दी गई है। कमजोर परफॉर्मेंस वाले कर्मचारी अब किसी भी समय ट्रांसफर के लिए तैयार रहें!

MP News transfer: तबादला नीति के प्रमुख बिंदु

  • नई तबादला नीति में कई अहम प्रावधान शामिल हैं, जो कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए राहत और चुनौती दोनों लेकर आए हैं:
  • सीमित अवधि: तबादले केवल 1 मई से 30 मई 2025 तक होंगे। 30 मई की रात 12 बजे के बाद कोई भी ट्रांसफर फाइल मूव नहीं होगी, और अगर ऐसा हुआ तो उसे मंजूरी नहीं मिलेगी।
  • ई-ऑफिस सिस्टम: तबादला प्रक्रिया ई-ऑफिस मॉड्यूल के जरिए होगी, जिससे फाइल मूवमेंट की पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
  • 10% सीमा: किसी भी विभाग में 10% से अधिक तबादले नहीं होंगे। बड़े विभागों जैसे स्कूल शिक्षा या गृह विभाग में यह सीमा 3-5% तक हो सकती है।
  • स्वैच्छिक तबादले: कर्मचारी अपने गृह विधानसभा या तहसील में तबादले के लिए जिला स्तर पर आवेदन कर सकते हैं। पति-पत्नी को एक ही जिले में पोस्टिंग की प्राथमिकता दी जाएगी।
  • मंत्रियों की शक्ति: चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के तबादले विभागीय मंत्री सीधे कर सकेंगे। जिला स्तर पर प्रभारी मंत्री जिले के भीतर तबादले कर सकते हैं।
  • विशेष परिस्थितियां: गंभीर बीमारी (कैंसर, लकवा, हार्ट अटैक), कोर्ट के आदेश, या अनुशासनात्मक कार्रवाई जैसे मामलों में तबादले प्रतिबंध अवधि में भी हो सकेंगे, बशर्ते विभागीय मंत्री और सीएम की मंजूरी हो।
  • जॉइनिंग की समयसीमा: तबादला आदेश जारी होने के 15 दिनों के भीतर नई पोस्टिंग पर जॉइन करना अनिवार्य है, वरना निलंबन की कार्रवाई हो सकती है।

मंत्रियों का दबाव और नीति में देरी

तबादला नीति को लेकर मंत्रियों के बीच खींचतान की खबरें भी सामने आई हैं। सूत्रों के मुताबिक, कुछ मंत्रियों ने डिप्टी कलेक्टर और तहसीलदार जैसे पदों के तबादले का अधिकार मांगा था, जिसके चलते नीति को अंतिम रूप देने में देरी हुई। कैबिनेट ने 29 अप्रैल को नीति को मंजूरी दी, लेकिन जीएडी ने चार दिन तक आदेश जारी नहीं किए। मंत्रियों का तर्क था कि अगर उन्हें तबादले का पूरा अधिकार नहीं मिला, तो नीति को लागू करने का क्या फायदा? आखिरकार, आधी रात को नीति जारी कर इस विवाद पर विराम लगाया गया।

कर्मचारियों में उत्साह और आशंका

नई नीति ने कर्मचारियों में उत्साह तो जगाया है, लेकिन सीएम की मंजूरी और परफॉर्मेंस आधारित तबादले की शर्त ने कईयों को चिंता में डाल दिया है। भोपाल के एक सरकारी कर्मचारी, रमेश वर्मा, ने कहा, "लंबे समय से हम तबादले का इंतजार कर रहे थे। लेकिन अब हर ट्रांसफर के लिए सीएम की मंजूरी? यह प्रक्रिया को और जटिल कर देगा।" वहीं, एक अन्य कर्मचारी, अनीता शर्मा, ने राहत जताते हुए कहा, "मेरे पति और मैं अलग-अलग जिलों में हैं। नई नीति में पति-पत्नी को एक जिले में पोस्टिंग की प्राथमिकता दी गई है, जो हमारे लिए अच्छी खबर है।"

पुलिस और शिक्षा विभाग में सबसे ज्यादा हलचल

सूत्रों के मुताबिक, स्कूल शिक्षा, गृह, और आदिवासी कल्याण जैसे बड़े विभागों में सबसे ज्यादा तबादले होने की उम्मीद है। पुलिस विभाग में बोर्ड आधारित तबादले और जिला प्रभारी मंत्रियों की भूमिका से कई पुलिसकर्मियों की पोस्टिंग बदल सकती है। शिक्षा विभाग में भी शिक्षकों के तबादले लंबे समय से रुके हुए थे, और अब इस नीति से हजारों शिक्षक अपने गृह जिलों में वापसी की उम्मीद कर रहे हैं।

तबादला नीति का इतिहास

मध्य प्रदेश में तबादला नीति का इतिहास भी कम रोचक नहीं है। आखिरी बार 2021-22 में तबादला नीति लागू की गई थी, लेकिन 2023 के विधानसभा चुनावों के बाद तबादलों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई थी। कर्मचारियों में इस रोक से भारी नाराजगी थी, क्योंकि कई लोग अपने गृह जिलों से दूर तैनात थे। 2019 में कमलनाथ सरकार ने ऑनलाइन तबादला प्रणाली शुरू की थी, जिसके तहत 35 हजार तबादले हुए थे। उस समय इस प्रणाली की पारदर्शिता की खूब तारीफ हुई थी। अब मोहन सरकार से भी कर्मचारी ऐसी ही पारदर्शी प्रक्रिया की उम्मीद कर रहे हैं।

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