MP News: खरगोन एकलव्य स्कूल में क्यों हुई प्राचार्य-लाइब्रेरियन के बीच थप्पड़बाजी, कलेक्टर का सख्त एक्शन
MP News: मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में शिक्षा के मंदिर में एक शर्मनाक घटना ने सबको स्तब्ध कर दिया। शासकीय एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, मेनगांव में शुक्रवार, 2 मई 2025 को महिला प्राचार्य प्रवीण दहिया और लाइब्रेरियन मधुरानी मिश्रा के बीच कामकाज को लेकर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों ने एक-दूसरे पर हाथ उठा दिया।
मारपीट का यह मामला थप्पड़बाजी, बाल खींचने और दीवार पर धक्का देने तक पहुंच गया। प्राचार्य ने लाइब्रेरियन का मोबाइल भी तोड़ दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों को उनके पदों से हटा दिया।

क्या है पूरा मामला?
एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, मेनगांव, खरगोन में आदिवासी बच्चों के लिए शिक्षा और आवास की सुविधा प्रदान की जाती है। यह स्कूल आदिवासी विकास विभाग के तहत संचालित होता है और अपनी अनुशासित व्यवस्था के लिए जाना जाता है। लेकिन शुक्रवार को यह स्कूल एक अभूतपूर्व विवाद का गवाह बन गया।
जानकारी के अनुसार, प्राचार्य प्रवीण दहिया और लाइब्रेरियन मधुरानी मिश्रा के बीच लंबे समय से तनाव चल रहा था। सूत्रों के मुताबिक, विवाद की जड़ स्कूल के दैनिक कार्यों, स्टाफ प्रबंधन और लाइब्रेरी के संचालन को लेकर थी। शुक्रवार सुबह दोनों के बीच किसी बात पर कहासुनी शुरू हुई, जो जल्द ही गाली-गलौज और फिर शारीरिक हिंसा में बदल गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्राचार्य ने लाइब्रेरियन के बाल खींचे, उन्हें कई थप्पड़ मारे, और दीवार पर धक्का दिया। इस दौरान मधुरानी ने भी जवाबी कार्रवाई में प्राचार्य को थप्पड़ जड़े। मारपीट के बीच प्राचार्य ने गुस्से में मधुरानी का मोबाइल फोन तोड़ दिया। स्कूल के कुछ कर्मचारियों और छात्रों ने इस घटना को अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
वायरल वीडियो ने बढ़ाया दबाव
वायरल वीडियो में प्राचार्य और लाइब्रेरियन के बीच मारपीट की तस्वीरें साफ दिखाई दे रही थीं। इसमें दोनों एक-दूसरे को थप्पड़ मारते और चिल्लाते हुए नजर आए। इस वीडियो ने न केवल स्कूल की छवि को धूमिल किया, बल्कि स्थानीय समुदाय और आदिवासी संगठनों में भी आक्रोश पैदा कर दिया। सोशल मीडिया पर लोगों ने इस घटना की कड़ी निंदा की और स्कूल प्रशासन पर सवाल उठाए। कई यूजर्स ने इसे "शिक्षा के मंदिर में अनुशासन का पतन" करार दिया।
MP News: जिला प्रशासन की त्वरित कार्रवाई
घटना की जानकारी मिलते ही खरगोन जिला प्रशासन हरकत में आया। कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने तत्काल एक जांच समिति गठन की और दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए। जांच में पाया गया कि प्राचार्य और लाइब्रेरियन दोनों ही इस मारपीट के लिए जिम्मेदार थे, और उनकी यह हरकत स्कूल के अनुशासन और छात्रों के सामने गलत उदाहरण पेश करती है।
शनिवार, 3 मई 2025 को कलेक्टर ने आदेश जारी कर प्राचार्य प्रवीण दहिया और लाइब्रेरियन मधुरानी मिश्रा को तत्काल प्रभाव से उनके पदों से हटा दिया। दोनों को आदिवासी विकास विभाग में अटैच कर दिया गया है, और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई है। कलेक्टर ने कहा, "यह घटना अत्यंत शर्मनाक है। स्कूल में ऐसी अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हमने दोनों को हटाकर यह सुनिश्चित किया है कि स्कूल का माहौल प्रभावित न हो।"
MP News: स्कूल में पहले भी रहा है विवाद
यह पहली बार नहीं है जब एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, मेनगांव विवादों में घिरा है। इससे पहले 26 जनवरी 2025 को गणतंत्र दिवस के दिन करीब 200 छात्र-छात्राएं स्कूल से 12 किलोमीटर पैदल चलकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे थे। उन्होंने तत्कालीन प्राचार्य प्रवीण दहिया के खिलाफ जातिगत भेदभाव, अवैध वसूली (500 रुपये प्रति छात्र), और किताब-स्टेशनरी की कमी की शिकायत की थी। उस समय भी कलेक्टर ने प्रवीण दहिया को हटाने का आश्वासन दिया था, और उन्हें पद से हटा दिया गया था। हालांकि, बाद में वे फिर से प्राचार्य के रूप में नियुक्त हो गई थीं।
इस बार की घटना ने प्रवीण दहिया की कार्यशैली पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूल में प्रशासनिक अनुशासन की कमी और प्राचार्य की सख्ती ने कर्मचारियों और छात्रों में असंतोष पैदा किया था।
छात्रों और अभिभावकों में बेचैनी
इस मारपीट की घटना ने स्कूल के छात्रों और उनके अभिभावकों में बेचैनी पैदा कर दी है। एक अभिभावक, मोहन किराड़े, जिनका भतीजा स्कूल में कक्षा 11 में पढ़ता है, ने कहा, "हम अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा और अनुशासन के लिए इस स्कूल में भेजते हैं, लेकिन प्राचार्य और शिक्षक ही आपस में मारपीट करेंगे, तो बच्चे क्या सीखेंगे?" उन्होंने मांग की कि स्कूल में नए और जिम्मेदार प्राचार्य की नियुक्ति की जाए।
छात्रों ने भी स्कूल के माहौल को लेकर चिंता जताई। एक छात्र ने बताया, "इस तरह की घटनाएं हमें मानसिक रूप से परेशान करती हैं। हम चाहते हैं कि स्कूल में शांति और अच्छा पढ़ाई का माहौल हो।"
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
इस घटना ने स्थानीय स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी हलचल मचा दी है। आदिवासी संगठनों ने इसे आदिवासी बच्चों के शिक्षा के अधिकार पर हमला करार दिया और स्कूल में बेहतर प्रशासन की मांग की। विपक्षी कांग्रेस ने इस घटना को बीजेपी सरकार की शिक्षा व्यवस्था की नाकामी का प्रतीक बताया। कांग्रेस नेता रमेश पवार ने कहा, "एकलव्य स्कूल आदिवासी बच्चों के भविष्य के लिए बनाए गए हैं, लेकिन यहां प्राचार्य और शिक्षक सड़कछाप गुंडों की तरह व्यवहार कर रहे हैं। सरकार को इसकी जवाबदेही लेनी चाहिए।"
दूसरी ओर, बीजेपी के स्थानीय नेता और विधायक राजेश वर्मा ने कलेक्टर की कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और स्कूल में जल्द ही व्यवस्था सुधारी जाएगी।
आगे की कार्रवाई और चुनौतियां
जिला प्रशासन ने स्कूल में नए प्राचार्य और लाइब्रेरियन की नियुक्ति के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही, एक जांच समिति को 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। समिति यह भी जांच करेगी कि स्कूल में पहले से चल रहे तनाव और शिकायतों को क्यों नजरअंदाज किया गया।
इस घटना ने एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों की प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। खरगोन जिला, जो पहले भी प्रशासनिक विवादों जैसे कलेक्टर के तबादले और स्कूलों में अनियमितताओं के लिए चर्चा में रहा है, अब इस घटना के कारण फिर से सुर्खियों में है।
एकलव्य स्कूलों का महत्व
एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय आदिवासी समुदाय के बच्चों को मुफ्त शिक्षा, आवास, और अन्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए स्थापित किए गए हैं। खरगोन का यह स्कूल भी ऐसे ही उद्देश्य के साथ चलाया जाता है। लेकिन बार-बार होने वाले विवादों ने इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों में प्रशासनिक पारदर्शिता, कर्मचारियों की जवाबदेही, और नियमित मॉनिटरिंग की जरूरत है ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
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