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MP Election Result 2023: 'करवटें बदलते यही रात अंतिम, यही रात भारी’, किसका होगा भाग्योदय? फिर शिवराज या कमलनाथ

MP Election Result 2023: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में जनमत की असल तस्वीर साफ़ होने की घड़ी आ गई। बस एक रात बाकी है और सुबह का सूरज उगने के साथ शाम ढलते प्रदेश के कुल 5.6 करोड़ मतदाता जनादेश के साक्षी बन जाएंगे। इसके एक दिन पहले की रात 5 साल की 1825 रातों से अलग हैं।

अगले पांच साल का भार उठाने से ज्यादा भारी यही रात है, जब करवटें बदलते उम्मीदवारों के भविष्य की घड़ी सुबह होते ही अलार्म बजाना शुरू कर देगी। सूबे के राज में 'कमल' अपनी खुशबू बिखेरेगा या फिर 'पंजा' संभालेगा, रविवार की दोपहर की गुनगुनी धूप में रुझानों की चमक बता देगी।

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पहले भी सरकार बनती रही, सत्ता छिनती रही। लेकिन इस बार चटपटी सियासत का तड़का चुनाव परिणामों के जरिए नई राजनीति का व्यंजन तैयार करने आमादा हैं। इशारा दो दिन पहले के एग्जिट पोल के महापंडितों ने भी किया। उनकी भी अग्निपरीक्षा का दिन हैं। कसौटी पर खरे न उतरने वाले भी पराजित प्रत्याशियों की तरह धकेल दिए जाएंगे। क्योकि पहली दफा एग्जिट पोल का तक चुनाव करने पब्लिक को दिमाग लगाना पड़ा हैं।

सिर्फ सरकार नहीं, इनके भविष्य का भी फैसला
18 साल सत्ता का सुख भोगने वाले 'सीएम शिवराज सिंह चौहान' हो या फिर सियासत के मैदान में अजेय योद्धा के तौर पर पहचान बनाने वाले 'कमलनाथ' दोनों का व्यक्तिगत भविष्य पार्टी से ज्यादा दांव पर लगा हैं। एग्जिट पोल ने भले ही किसी को अपना चेहरा खिलखिलाने और मुरझाने गिनती के घंटे दे दिए, लेकिन उनका दिल ही जानता होगा कि BP कितनी बार हाई-लो हो रहा हैं। दोनों की उम्र भी बढ़ रही है, लिहाजा इस बार के परिणाम ही इनके आगे की मजिल तय करने वाले हैं।

शिवराज को भरोसा तो कमलनाथ को शक!
एग्जिट पोल के अनुमान के बाद शिवराज सिंह चौहान ने अपने राज में लागू की योजनाओं को जीत का आधार मानने का दावा किया है। वहीं कमलनाथ ने अपने पोलिंग बूथ कार्यकर्ताओं और प्रत्याशियों को यह इत्तला दी कि मतगणना ईमानदारी से हो? इस पर फोकस करें। देश विजन से चलता है, टेलीविजन से नहीं। दोनों के संदेश बेहद महत्वपूर्ण हैं। कमलनाथ के मन में काउंटिंग को लेकर ऐसे सवाल क्यों उठे? क्या एग्जिट पोल के जरिए एक नैरेटिव सेट किया गया?

ताकतवर लोगों की पड़ी जरुरत, उनका भी भविष्य
जीत-हार के खाने में भाजपा-कांग्रेस तो फिर होगी ही, लेकिन भाग्योदय की इस घड़ी में बीजेपी के उन बड़े चेहरों पर भी सभी नजर है, जिनके सहारे बीजेपी ने पूरे प्रदेश की घेराबंदी करने की कोशिश की। तीन केन्द्रीय मंत्री नरेद्र सिंह तोमर, प्रहलाद पटेल, फग्गन सिंह कुलस्ते और चार सांसद समेत पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय । जीत-हार में इनकी लकीर भी बड़ा मायने रखेगी। क्योकि कांग्रेस के पास जो भी कुछ खोने को था, वह 2020 में गंवाया जा चुका है। बीजेपी के बड़े चेहरों के लिए परिणाम माइनस मार्किंग से कम साबित नहीं होने वाला।

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