MP Election 2023: पांच साल में जनता बदल देती है अपना नेता, जानिए करैरा विधानसभा का हाल
MP Election 2023: करैरा विधानसभा सीट ग्वालियर संभाग के शिवपुरी जिले और गुना संसदीय क्षेत्र में आती है। यहां भाजपा, कांग्रेस और बसपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होता है। तीनों ही दलों में कांटे की टक्कर देखने को मिलती है। साल 2008 के बाद से ये सीट अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित है। करैरा सीट पर अनुसूचित जाति का मतदाता सबसे अधिक है। यहां जाटव और खटीक वोटरों का दबदबा है। जो जिस दल के पक्ष में हो जाए जीत भी उसी की होती है। यहां ओबीसी वोटर भी भारी तादाद में है। जो चुनाव में जीत हार का निर्णय करता है।
2020 करैरा विधानसभा सीट में उपचुनाव हो चुका है। 2018 के चुनाव में करैरा से कांग्रेस के जसवंत जाटव ने चुनाव जीता था। जसवंत, ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भाजपा में आ गए। भाजपा ने टिकट दिया, लेकिन उपचुनाव में ग्वालियर चंबल की जिन सीटों पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की है, उसमें करैरा भी है और प्रागीलाल जाटव ने जसवंत जाटव को चुनाव हार दिया। यानी दलबदल के बाद विधायक बनने का जसवंत जाटव का सपना टूट गया।

कभी भाजपा का गढ़ रही करैरा विधानसभा सीट पर बीएसपी भी मजबूत स्थिति में है। करैरा विधानसभा में साल 1957 में पहली बार चुनाव हुआ था और 1957 से लेकर 1967 तक कांग्रेस के गौतम शर्मा करैरा से चुनाव जीते आए थे। लेकिन 1967 में तत्कालीन जनसंघ पार्टी की राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने कांग्रेस उम्मीदवार को चुनाव हार दिया उनसे विधायक पद छीना था। 1980 से 1990 के बीच कांग्रेस के हनुमन्त सिंह, इस सीट पर 2 बार चुनाव जीत कर विधायक बने। तो वहीं 2003 में लाखन सिंह बघेल ने पहली बार बहुजन समाजवादी पार्टी को इस सीट पर जीत दिलाई थी।
यहां कुल वोटर्स दो लाख 41 हजार 445 हैं, जिसमें पुरुष मतदाता 1 लाख 30 हजार 226 वहीं महिला मतदाता की संख्या 1 लाख 11 हजार 218 है। जातिगत आधार पर देखें तो जाटव और खटीक समाज जाति के करीब 50 हजार मतदाता हैं। वहीं, लोधी, कुशवाह,यादव,पाल(बघेल) और गुर्जर रावत के 30 हजार मतदाता हैं। ब्राह्मण समाज के 10 हजार तो वहीं ठाकुर समाज के भी 10 हजार मतदाता हैं।
करेरा ऐसी विधानसभा है, जो शिवपुरी जिले की ग्रामीण क्षेत्र से आती है। रावत, पाल,जाटव और लोधी बाहुल्य इस सीट पर भाजपा कांग्रेस के साथ ही बसपा का बड़ा वोट शेयर है। करेरा विधानसभा सीट पर 1990 के बाद से सिटिंग विधायक कभी भी रिपीट नहीं हुआ है। यानी की हर बार के चुनाव उपचुनाव में यहां की मतदाता ने विधायक को बदला है। इस विधानसभा क्षेत्र में लोगों का मूल पेशा कृषि के साथ ही पशुपालन औऱ स्थानीय व्यापार है।
करेरा विधानसभा कब अस्तित्व में आई: 1952 से लेकर अभी तक 8 बार कांग्रेस, 6 बार बीजेपी, 1 बार बसपा और 1 बार हिन्दू महासभा को जीत हासिल हुई है।
2020 कांग्रेस प्रागीलाल जाटव
2018 कांग्रेस जसवंत जाटव
2013 कांग्रेस शकुंतला खटीक
2008 भाजपा कार्तिक रमेश प्रसाद
2003 बीएसपी लाखन सिंह बघेल
1998 भाजपा रणवीर सिंह
1993 कांग्रेस किरण सिंह रावत
1990 भाजपा भागवत सिंह यादव
1985 कांग्रेस हनुमान सिंह
1980 कांग्रेस हनुमान सिंह
1977 जेएनपी सुषमा सिंह












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