जापानीज इन्सेफेलाइटिस टीकाकरण अभियान का MP डिप्टी सीएम ने किया शुभारंभ, कहा- इस बीमारी से मिलेगी मुक्ति
MP News: डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने मंगलवार 27 फरवरी को भोपाल में जापनीज इन्सेफेलाइटिस टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने मंच से बोलते हुए कहा कि हम इस घातक बीमारी से अपने बच्चों को सुरक्षित करने में सफल होंगे। साथ ही, अभियान की सफलता के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को शुभकामनाएं दीं।
डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक बच्चे का टीकाकरण सुनिश्चित किया जाये। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी कार्य हुए हैं। जिसका समूचे विश्व ने लोहा माना है। कोरोना काल में टीकाकरण का वैश्विक कीर्तिमान स्थापित किया गया, साथ ही दूसरे देशों को भी वैक्सीन की आपूर्ति की गयी।

37 लाख बच्चों का होगा टीकाकरण
इस दौरान डिप्टी सीएम शुक्ल ने उपस्थित जन को जापनीज़ इन्सेफेलाइटिस (दिमागी बुखार) के प्रति जागरूकता लाने और टीकाकरण अभियान में सहयोग करने का संकल्प दिलाया। अभियान में भोपाल, नर्मदापुरम, इंदौर और सागर ज़िलों के 1 वर्ष से 15 वर्ष की उम्र के लगभग 37 लाख बच्चों का टीकाकरण किया जाएगा। विगत वर्ष विदिशा एवं रायसेन जिलों में टीकाकरण किया गया था।
क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होती है ये बीमारी
जापनीज इन्सेफेलाइटिस वेक्टर बोर्न डिजीज है। यह बीमारी क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होती है। यह मच्छर रुके हुए पानी में रहते हैं, और रात के समय काटते हैं । आर्डिडाई प्रजाति के विचरण करने वाले पक्षी और सुअर इस बीमारी के फ्लेवी वायरस के मुख्य संवाहक होते हैं। जापानी इन्सेफेलाइटिस बीमारी को पहली बार जापान में देखा गया था, इसलिए इस बीमारी का नाम जापानी इन्सेफेलाइटिस पड़ा।
गंभीर और घातक है जापानी इन्सेफेलाइटिस
ऐसा बताया जाता है कि जापनीज इन्सेफेलाइटिस घातक बीमारी है। संक्रमण के बाद विषाणु व्यक्ति के मस्तिष्क एवं रीढ़ की हड्डी सहित केंद्रीय नाड़ी तंत्र में प्रवेश कर जाता है। इस बीमारी के अधिकांश मामलों में कोई लक्षण नजर नहीं आते हैं। गंभीर मामलों में सिर दर्द व ब्रेन टिशूज की सूजन या इन्सेफेलाइटिस की समस्या हो सकती है। अन्य लक्षणों में बुखार, सिर दर्द , कपकपी, उल्टी, तेज बुखार, गर्दन में अकड़न हो सकती है। पीड़ित व्यक्ति को झटके भी आ सकते हैं। उपचार नहीं करवाने पर मृत्यु भी हो सकती है।
1 से 15 साल की उम्र के बच्चों को खतरा अधिक
जापनीज इन्सेफेलाइटिस बीमारी का खतरा 1 से 15 साल की उम्र के बच्चों को अधिक होता है। इस बीमारी से संक्रमित 80% से अधिक लोग इसी आयु वर्ग के होते हैं। इसीलिए प्राथमिकता के आधार पर 1 से 15 साल के बच्चों को टीके लगाए जा रहे हैं। टीके से ही इस बीमारी से बचाव संभव है। उल्लेखनीय है कि भोपाल जिले में पिछले 8 सालों में जापनीज इन्सेफेलाइटिस के 23 प्रकरण सामने आए हैं। यह सभी लोग स्वस्थ हो चुके हैं।
सुरक्षित और प्रभावी है जे.ई का टीका
जापनीज इन्सेफेलाइटिस से बचाव के लिए टीका लगाया जाना जरूरी है । यह टीका पूरी तरह से सुरक्षित और कारगर है। शासन द्वारा यह टीका निःशुल्क उपलब्ध करवाया जा रहा है। इस वैक्सीन का कोई भी दुष्प्रभाव नहीं है।












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