आरक्षण के मुद्दे पर ममता बनर्जी पर भड़के एमपी सीएम मोहन यादव, कहा- जनता से मांगनी चाहिए माफी
MP News: लोकसभा चुनाव 2024 में भारतीय जनता पार्टी का 'यादव' चेहरा बनकर उभरे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आरक्षण के मुद्दे पर पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी को आड़े हाथों लिया। सीएम यादव ने कहा कि ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस, टीएमसी, सपा और बाकी विपक्षी दल तुष्टिकरण के आधार पर राजनीति कर रही हैं।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव गुरुवार 23 मई को अपने 'X' हैंडल पर लिखा, 'ममता बनर्जी द्वारा जिस प्रकार राजनीतिक तुष्टिकरण के आधार पर 5 लाख से अधिक एससी, एसटी और ओबीसी का आरक्षण काटकर मुस्लिम वर्ग को दिया गया था, उसे माननीय हाईकोर्ट द्वारा वापस लेने एवं एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग को लौटाने का आदेश दिया गया है।'

इतना ही नहीं, सीएम यादव ने आगे कहा कि राजनीतिक तुष्टिकरण एवं स्वार्थ के कारण कांग्रेस, टीएमसी, सपा और बाकी विपक्षी दल अतीत में हुए धर्म आधारित भारत विभाजन की मानसिकता पर आगे बढ़ रहे हैं। कोर्ट के निर्णय के बाद इन्हें जनता से माफी मांगनी चाहिए और इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
न्यूज़ एजेंसी एएनआई और पीटीआई से बात करते हुए सीएम यादव ने कहा कि बीजेपी सदैव सबका साथ सबका विकास की बात करती आई है और धर्म के आधार पर आरक्षण का विरोध करते आई है। अब तो कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी डिसाइड कर दिया है कि ममता बनर्जी द्वारा जिस प्रकार से राजनीतिक तुष्टिकरण के आधार पर एससी, एसटी, ओबीसी का 5 लाख से ज्यादा आरक्षण काटकर मुस्लिम वर्ग को दिया है।
इसपर हाईकोर्ट ने फैसला दिया है कि इसे वापस लेकर हक एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग को देना चाहिए। भाजपा ने स्पष्ट किया था कि यही गलती कांग्रेस ने भी कर्नाटक और आंध्र की सरकार ने भी की थी। मुस्लिम वर्ग को आरक्षण देना ये एससी एसटी और ओबीसी का न केवल हक काटने के बराबर है बल्कि उनके साथ अन्याय करने के बराबर है।
उन्होंने कहा कि ये बात बाबासाहेब अंबेडकर और हमारे संविधान की मूल भावना के भी विरुद्ध है। जिस मूल भावना में कहा गया था कि धर्म के आधार पर आरक्षण इस देश में नहीं दिया जा सकता। संविधान के बाहर जाकर केवल राजनीतिक स्वार्थ और तुष्टिकरण के कारण कांग्रेस, ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी और अन्य बाकी पार्टिया इस लाइन पर जा रही हैं, मैं उनकी घोर निंदा करता हूं।
हाईकोर्ट के निर्णय के बाद तो सब कुछ जगजाहिर हो चुका है। इसके बाद इन्हें माफी भी मांगना चाहिए और जनता के साथ और एससी, एसटी और ओबीसी के साथ जो अन्याय इन्होंने किया है, उसे लेकर वे अपनी स्थिति स्पष्ट करें। दूसरी बड़ी बात, कितनी बेशर्मी से वापस ममता बनर्जी कह रही है मैं हाईकोर्ट के फैसले को नहीं मानती। जनता सब जानती है जनता इसके बारे में फैसला करेगी।












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