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MP news: मंदसौर में परिवार ने जिंदा बेटी का किया क्रियाकर्म, शोक पत्रिका और मृत्युभोज का आयोजन

Mandsaur news: मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के सीतामऊ तहसील के दलावदा गांव में एक परिवार ने अपनी जिंदा बेटी का क्रियाकर्म कर दिया। यह मामला इस कारण विवादित हो गया क्योंकि परिवार के लोग अपनी बेटी के फैसले से इतना आहत थे कि उन्होंने उसका शोक पत्रिका बांधकर मृत्युभोज तक का आयोजन कर दिया।

यह घटना एक गंभीर सामाजिक मुद्दे को उजागर करती है, जिसमें परिवार और बेटी के बीच आपसी रिश्तों में दरार और आधुनिक सोच के बीच टकराव साफ नजर आता है।

Mandsaur the family performed the last rites of the alive daughter organized condolence and funeral feast

12 नवंबर को 21 वर्षीय युवती ने घर से भागकर पास के गांव गुराड़िया गौड़ के एक युवक से प्रेम विवाह कर लिया था। युवती के परिवार ने उसकी शादी के लिए पहले से ही किसी और जगह का प्रस्ताव तय कर रखा था, और वह दो महीने बाद होने वाली थी। जब युवती घर से भागी, तो उसके परिजनों ने इस घटना की शिकायत सीतामऊ थाने में दर्ज करवाई, जिसके बाद पुलिस ने युवती और उसके प्रेमी को खोजकर थाने लाया।

युवती का बयान

पुलिस पूछताछ के दौरान युवती ने स्पष्ट रूप से कहा, "मैं बालिग हूं और यह फैसला मैंने अपनी इच्छा से लिया है। मैं अपने प्रेमी के साथ ही रहना चाहती हूं।" युवती के परिजनों ने पुलिस थाने में यह कहा कि उन्हें अपनी बेटी से बहुत प्यार था, लेकिन अब वह अपनी पहचान को नकारते हुए यह कह रही है कि वह अपने परिवार को नहीं जानती। यह बयान परिवार के लिए बेहद दर्दनाक था, और उन्होंने यह तय किया कि अब वे अपनी बेटी से कोई रिश्ता नहीं रखना चाहते।

Mandsaur the family performed the last rites of the alive daughter organized condolence and funeral feast

क्रियाकर्म का आयोजन

युवती के परिवार के लोगों ने अपना गुस्सा और दुख जाहिर करते हुए उसकी मौत का शोक मनाने का फैसला किया। इसके बाद, उन्होंने एक शोक पत्रिका छपवाकर रिश्तेदारों और समाज के लोगों को निमंत्रण भेजा। शोक पत्रिका में बेटी के निधन का जिक्र था, जबकि वह जिंदा थी। इस कार्यक्रम के तहत युवती का क्रियाकर्म किया गया और मृत्युभोज का आयोजन भी हुआ। इस कार्यक्रम में समाज के लोग भी शामिल हुए और इस घटना की निंदा की गई।

युवती के भाई विनोद ने मीडिया से बातचीत में कहा, "हमने अपनी बहन को समझाया था, लेकिन उसने हमारी बात नहीं मानी। उसने हमारे सम्मान और परिवार की परंपराओं को ठुकरा दिया। हम यह संदेश देना चाहते थे कि लड़की को परिवार और समाज का सम्मान करना चाहिए और इसे नीचा नहीं दिखाना चाहिए।"

परिवार और समाज के परिप्रेक्ष्य से विवाद

यह घटना न केवल परिवार के भीतर के रिश्तों को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है, बल्कि समाज के उन मान्यताओं और परंपराओं पर भी सवाल उठाती है, जो प्रेम विवाह और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के खिलाफ होती हैं। यह भी देखने को मिलता है कि परिवार ने अपनी बेटी के फैसले को न केवल नकारा, बल्कि उसे एक गंभीर अपराध मान लिया और ऐसा कदम उठाया जो कानून और मानवाधिकार के खिलाफ है।

परिवार द्वारा किया गया यह कृत्य एक तरह से बेटी के अधिकारों का उल्लंघन है, और यह सामाजिक परिप्रेक्ष्य में एक शर्मनाक घटना के रूप में देखा जा सकता है। इसके अलावा, परिवार ने यह कदम उस समय उठाया जब युवती पूरी तरह से बालिग थी और अपने फैसले को लेकर पूरी तरह स्वतंत्र थी।

समाज और कानून का दृष्टिकोण

कानूनी और सामाजिक दृष्टिकोण से इस प्रकार का क्रियाकर्म और मृत्युभोज का आयोजन न केवल निंदनीय है, बल्कि यह एक तरह से मानसिक अत्याचार और सामाजिक दबाव को भी दर्शाता है। कानून के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को अपनी व्यक्तिगत पसंद और जीवनसाथी के चुनाव का अधिकार है, और इस प्रकार के निर्णयों को परिवार के सदस्य बदलने का कोई अधिकार नहीं रखते।

इस मामले में पुलिस ने युवती के बयान के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं की, लेकिन यह सवाल जरूर उठता है कि क्या समाज में इस तरह की मानसिकता को कैसे बदला जा सकता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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