Leela Sahu: सीधी की गर्भवती लीला साहू का वीडियो वायरल, अब भाजपा सांसद पूछ रहे प्रेग्नेंसी की डेट
Leela Sahu Viral Video: मध्य प्रदेश के सीधी जिले की गर्भवती यूट्यूबर लीला साहू के वायरल वीडियो पर बीजेपी सांसद राजेश मिश्रा सलाह दे रहे हैं कि डिलीवरी डेट बता दो, उठवा कर अस्पताल में भर्ती करा देंगे। इससे पहले लीला साहू के सड़क की मांग वाले वायरल वीडियो पर अब राज्य सरकार ने प्रतिक्रिया दी है। मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग मंत्री राकेश सिंह ने साफ कहा कि सोशल मीडिया पोस्ट देखकर तुरंत सड़क नहीं बनाई जा सकती, क्योंकि विभाग की अपनी सीमाएं होती हैं। मंत्री के इस बयान से जहां ग्रामीणों में आक्रोश है, वहीं लीला का संघर्ष अब 'विकास नहीं, जीवन की लड़ाई' बन चुका है।
दरअसल, मध्यप्रदेश के सीधी जिले के रामपुर नैकिन जनपद पंचायत के खड्डी खुर्द गांव में टूटी-फूटी सड़कें इस कदर जानलेवा हो चुकी हैं कि हाल ही में दो महिलाओं और उनके नवजात बच्चों की जान ले चुकी हैं। कीचड़ भरी पगडंडियों पर एम्बुलेंस पहुंचने में नाकाम रही और समय पर इलाज न मिलने से ममता साहू और उनके गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। वहीं सीमा साहू के नवजात बच्चे ने भी सही समय पर चिकित्सा सुविधा न मिलने से दम तोड़ दिया।

इन घटनाओं से आहत गर्भवती लीला साहू ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर सांसदों, विधायकों और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक से सड़क निर्माण की अपील की थी। वीडियो में लीला ने कहा था, "खड्डी खुर्द गांव से गजरी तक सड़क की मांग हम एक साल से कर रहे हैं, लेकिन हमें सिर्फ तारीखें मिलीं। अब ये सिर्फ विकास का सवाल नहीं, जान बचाने का सवाल है।"
लीला साहू ने बताया कि गांव में उनके जैसी आठ और महिलाएं गर्भवती हैं। बरसात के दिनों में कीचड़ में फंसकर किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। हालात यह हैं कि गंभीर बीमारी या प्रसव पीड़ा में लोग अस्पताल नहीं पहुंच पाते और रास्ते में ही जान चली जाती है।

मंत्री की सफाई: "हर पोस्ट पर डंपर नहीं भेज सकते"
आजतक की खबर के अनुसार सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद PWD मंत्री राकेश सिंह ने पहली बार बयान जारी कर कहा, "ऐसे हजारों स्थान हैं, जहां सड़क की मांग है। लेकिन न तो विभाग के पास और न ही किसी सरकार के पास इतना बजट होता है कि कोई सोशल मीडिया पोस्ट डाले और हम तुरंत सीमेंट, कंक्रीट या डंपर लेकर पहुंच जाएं। सड़क निर्माण की अपनी प्रक्रिया और सीमाएं होती हैं।"

मंत्री के इस बयान पर ग्रामीणों का कहना है कि अगर नेताओं ने समय पर ध्यान दिया होता तो दो जानें न जातीं। लीला ने कहा, "जब वोट मांगने आए थे, तब किसी प्रक्रिया का हवाला नहीं दिया। अब हमारी जिंदगी दांव पर लगी है, तो सब सीमाएं बता रहे हैं।"
प्रशासन की ओर से जांच का आश्वासन
जिला प्रशासन के अपर कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ अंशुमान राज ने पत्रकारों से कहा, "मामले की जांच कराई जाएगी। एक टीम गठित कर जल्द समाधान निकाला जाएगा।" हालांकि ग्रामीणों का भरोसा इन आश्वासनों से उठ चुका है।
नेताओं के वादे, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं
लीला के पहले वीडियो के बाद क्षेत्रीय सांसद डॉ. राजेश मिश्रा और पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने सड़क बनाने का वादा किया था। पटेल गांव का दौरा भी कर चुके हैं। लेकिन एक साल से ज्यादा वक्त बीत जाने के बावजूद सड़क की हालत जस की तस है।
वायरल वीडियो ने खड़ा किया सवाल
2025 में लीला साहू ने एक और वीडियो जारी कर कहा, "जो नेता सड़क नहीं बनवा सकते, उन्हें डूब मरना चाहिए।" उनके इस बयान ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी। कुछ लोगों ने इसे राजनीति बताया, लेकिन बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने लीला के साहस को समर्थन दिया।
ग्रामीणों में गुस्सा और बेबसी
गांव की महिलाओं ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द सड़क निर्माण शुरू नहीं हुआ, तो बड़े स्तर पर आंदोलन होगा। लीला साहू ने कहा, "हम कोई राजनैतिक एजेंडा नहीं चला रहे, सिर्फ सड़क की मांग कर रहे हैं, जिससे हमारी और हमारे बच्चों की जान बच सके।" अब सवाल यह है कि मंत्री की इस 'सीमा' वाली सफाई के बाद क्या इस गांव की किस्मत बदलेगी, या खड्डी खुर्द की सड़कों पर मौत का साया यूं ही मंडराता रहेगा?












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