शर्मनाक: चार घंटे तक मजदूर का शव सड़क किनारे पड़ा रहा, बच्चे को गोद में लिए बिलखती रही पत्नी

शाजापुर। मध्य प्रदेश के शाजापुर में जिला मुख्यालय से महज 12 किलोमीटर दूर आगरा मुबंई नेशनल हाईवे पर बने टोल नाके पर शनिवार को शाम 4 बजे एक ट्रक में महाराष्ट्र से उत्तर प्रदेश जा रहे मजदूरों में एक मजदूर की तबीयत बिगड़ने लगी तो ट्रक में से मजदूर और उसके परिजनों को नीचे उतार दिया गया। टोल टैक्स के पास बने ढाबे के सड़क किनारे कुछ देर तक तड़पने के बाद मजदूर ने दम तोड़ दिया। शव को चार घंटे से ज्यादा समय हो गया, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की टीम शव के लिए न ही एंबुलेंस और न ही शव वाहन की व्यवस्था नहीं कर सकी। तभी स्थानीय मुस्लिम युवक शहंशाह खान ने मानवता दिखाई और उसके अंतिम संस्कार की तैयारी की।

यूपी के बस्ती का रहने वाला था मजदूर

यूपी के बस्ती का रहने वाला था मजदूर

बता दें, राम सिंह उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के एक गांव का रहने वाला था और महाराष्ट्र से लिफ्ट लेकर उत्तर प्रदेश जा रहा था। राम सिंह के साथ उसकी पत्नी, बच्ची और एक भतीजा था। राम सिंह की की अचानक गाड़ी में तबीयत बिगड़ी और उसे ट्रक से नीचे उतार दिया गया। मजदूर की मौत के बाद मक्सी पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जानकारी आला अधिकारियों को दी। वहीं, मजदूर की पत्नी अपने मासूम बच्चे को हाथ में लिए बिलखती रही। इस नजारे को कई लोग देखते रहे, लेकिन कोई आगे नहीं आया। स्वास्थ्य विभाग के अमले से भी कोई कोरोना के डर से मजदूर के शव को हाथ लगाने को कोई तैयार नहीं हुआ।

चार घंटे तक सड़क पर पड़ा रहा मजदूर का शव

चार घंटे तक सड़क पर पड़ा रहा मजदूर का शव

शव को चार घंटे से ज्यादा समय हो गया, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की टीम शव के लिए न ही एंबुलेंस और न ही शव वाहन की व्यवस्था नहीं कर सकी। तभी स्थानीय मुस्लिम युवक शहंशाह खान ने मानवता दिखाई और उसके अंतिम संस्कार की तैयारी की। मुस्लिम युवक ने गांव के चौकीदार के साथ मिलकर शव को ट्रैक्टर-ट्राली में रखा और गांव के श्मशान स्थल तक ले गया, लेकिन एक बार फिर मजदूर का अंतिम संस्कार नहीं हो सका। पुलिस ने कहा पहले शव का पोस्टमार्टम होगा। श्मशान से शव को ट्रैक्टर ट्रॉली में जिला अस्पताल शाजापुर में लाया गया। जिला अस्पताल में भी मजदूर के शव को कोई हाथ लगाने को तैयार नहीं, यहां भी मुस्लिम युवक और चौकीदार दोनों ने मिलकर शव को पोस्टमार्टम रूम में रखा। मजदूर की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस अधिकारी भी मान रहे हैं मजदूर की मौत कोरोना से नहीं हुई है। कोरोना के कोई लक्षण उसमें नहीं दिखाई दिए, उसकी मौत बीमारी से हुई है, फिर भी किसी ने मजदूर के शव को हाथ नहीं लगाया।

प्रशासन की भी लापरवाही आई सामने

प्रशासन की भी लापरवाही आई सामने

इस पूरे मामले में प्रशासन की भी बड़ी लापरवाही सामने आई है। मजदूर की मौत के चार घंटे बाद तक भी यह निर्णय नहीं लिया जा सका कि मजदूर के शव का पीएम करवाना है या नहीं। पहले कोई शव को हाथ लगाने को तैयार नहीं, जब एक युवक ने हिम्मत दिखाई और शव को अंतिम संस्कार के लिए श्मशान स्थल तक ले गया तब फिर पुलिस प्रशासन ने पीएम की बात कही और शव को श्मशान से अस्पताल पहुंचाया। जहां देश में एक तरफ हिंदू मुस्लिम विवाद कुछ लोग फैलाने में लगे हैं वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इंसानियत को अपना फर्ज और धर्म समझते हैं।

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