जानिए कौन हैं दतिया के नए कलेक्टर IAS स्वप्निल वानखेड़े, जिन्होंने संभाली धार्मिक नगरी की कमान
मध्य प्रदेश का ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी दतिया अब एक नए प्रशासनिक नेतृत्व के अधीन है। 2016 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी स्वप्निल वानखेड़े ने जिले के नए कलेक्टर के रूप में कार्यभार ग्रहण कर लिया है। ये उनकी प्रशासनिक सेवा का पहला कलेक्टरी कार्यकाल है, जिसे एक बड़ी जिम्मेदारी और करियर का नया अध्याय माना जा रहा है।
18 दिन बाद भरी खाली कुर्सी
31 मई को पूर्व कलेक्टर संदीप माकिन के सेवानिवृत्त होने के बाद जिले में 18 दिनों तक कलेक्टर पद रिक्त रहा। इस दौरान जिला पंचायत के CEO अक्षय कुमार सिंह को कलेक्टर का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। प्रशासनिक काम तो चलते रहे, लेकिन निर्णयों की रफ्तार धीमी पड़ी। आमजन और प्रशासन-दोनों को एक स्थायी नेतृत्व का इंतजार था, जो अब पूरा हुआ है।

प्रशासन में नई ऊर्जा: कौन हैं स्वप्निल वानखेड़े?
स्वप्निल वानखेड़े, महाराष्ट्र के अमरावती जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और फिर UPSC की परीक्षा दी। वर्ष 2016 में पहली ही कोशिश में सफलता पाकर उन्होंने IAS का रैंक लगभग AIR 300 के आसपास हासिल किया और मध्य प्रदेश कैडर में शामिल हुए।
सादगी, संवेदनशीलता और मजबूत कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले वानखेड़े ने अपनी सेवा की शुरुआत सहायक कलेक्टर और फिर SDM के रूप में की। हाल ही में वे सतना जिले में अपर कलेक्टर थे, जहां उनकी सक्रियता और योजनाओं पर फोकस की प्रशंसा आम रही।
सतना से सीधा दतिया, जनसेवा की निरंतर यात्रा
सतना में रहते हुए स्वप्निल वानखेड़े ने स्वच्छ भारत मिशन, जल संरक्षण, और ग्रामीण विकास योजनाओं पर विशेष कार्य किया। ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर योजनाओं का निरीक्षण, जनसुनवाई, और समस्याओं का तुरंत समाधान उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहे हैं।
एक स्थानीय पत्रकार के शब्दों में:
"वानखेड़े साहब फील्ड में ज्यादा रहते थे। लोगों से मिलते थे और उनकी बातों को गंभीरता से लेते थे।"
पहला दिन, पहला निरीक्षण: रतनगढ़ मेला बना प्राथमिकता
गुरुवार सुबह कार्यभार संभालते ही वानखेड़े ने रतनगढ़ माता मंदिर परिसर में आगामी लख्खी मेले की तैयारियों का निरीक्षण किया। यह मेला लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है, और यहां की व्यवस्थाएं दतिया की प्रशासनिक क्षमताओं का परिचायक बनती हैं।
कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए:
- पेयजल और शौचालय की पर्याप्त व्यवस्था
- मेडिकल कैंप और पुलिस सहायता चौकियां
- यातायात और सुरक्षा पर विशेष ध्यान
- स्थानीय नागरिक रमेश यादव ने कहा,
- "नए कलेक्टर साहब ने पहले ही दिन मेले पर ध्यान दिया, इससे साफ है कि वे काम को लेकर गंभीर हैं।"
धार्मिक विरासत और विकास का रोडमैप
- मीडिया से बातचीत में वानखेड़े ने कहा, "दतिया एक धार्मिक नगरी है, मेरी प्राथमिकता श्रद्धालुओं की सेवा और सांस्कृतिक आयोजनों को भव्य बनाना है। हम ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को भी प्राथमिकता देंगे।" उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकताओं में शामिल हैं: गांवों तक सड़क, बिजली, पानी और शिक्षा पहुंचाना
- धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना
- सरकारी योजनाओं को जमीन तक पहुंचाना
दतिया: इतिहास, श्रद्धा और संभावनाएं
- दतिया सिर्फ एक जिला नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की धार्मिक आत्मा है। पीतांबरा माई मंदिर, रतनगढ़ माता, और दतिया किला इसकी पहचान हैं। यह क्षेत्र देशभर के श्रद्धालुओं का केंद्र है, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं-बेरोजगारी, सड़कें, पेयजल और स्वास्थ्य सेवाएं बड़ी जरूरत हैं।
- स्थानीय निवासी श्यामलाल शर्मा कहते हैं: "अब जब कलेक्टर पद पर एक ऊर्जावान अधिकारी आए हैं, हमें उम्मीद है कि दतिया को नई पहचान मिलेगी।"
प्रशासनिक उम्मीदें और भविष्य की दिशा
पूर्व कलेक्टर संदीप माकिन के कार्यकाल में कई योजनाएं शुरू हुईं, लेकिन उनके सेवानिवृत्त होते ही उनमें रफ्तार कम हुई। वानखेड़े की नियुक्ति से उम्मीद की जा रही है कि रुके हुए काम-स्वच्छ भारत मिशन, ग्रामीण सड़क योजना, और जल परियोजनाएं-फिर से तेज़ी से आगे बढ़ेंगी।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा: "नए कलेक्टर की ऊर्जा और दृष्टिकोण से दतिया में प्रशासनिक गति लौटेगी।"












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