Kamal nath ही होंगे MP कांग्रेस में CM Face, दिग्विजय सिंह ने भी दिया ग्रीन सिग्नल, सरकार बनाने का दावा

मध्य प्रदेश में साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव में सियासी ऊंट किस करवट बैठेगा? यह तो नतीजों के बाद ही पता चलेगा। पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने कमलनाथ ने नेतृत्व में 116 सीटों से ज्यादा जीतने का दावा किया है।

kamal nath

Kamal nath will be CM face in MP Congress: मध्य प्रदेश में 15 साल के वनवास के बाद 2018 में कांग्रेस को सत्ता मिली थी। अब फिर चुनावी संग्राम नजदीक आ रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी ग्रीन सिग्नल दे दिया कि चुनाव कमलनाथ के फेस पर ही लड़ा जाएगा। कांग्रेस की सरकार भी बनेगी।

चुनावी साल की शुरुआत में एमपी कांग्रेस में सीएम फेस को लेकर जमकर घमासान मचा था। अपने ही नेताओं के बयानों की बौछार से पार्टी के आलाकमान तक सन्न रह गए थे। अब पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह विदिशा जिले में अपने इरादे खुलकर स्पष्ट कर दिए।

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पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने बड़ा बयान दिया हैं। उन्होंने कहा कि 2023 का चुनाव पीसीसी चीफ कमलनाथ के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा। कांग्रेस सबसे पुरानी पार्टी है और 230 सीटों में से बहुमत के लिए जरुरी 116 से ज्यादा सीट जीतकर सरकार बनाएंगे। दिग्विजय के इस बयान से सियासी गलियारे में खलबली मच गई हैं। क्योकि कई मर्तबा कमलनाथ और दिग्विजय के बीच पटरी न बैठने की ख़बरें सुर्ख़ियों में रही। दोनों दिग्गज नेताओं के गुटों के इर्द-गिर्द ही एमपी में कांग्रेस की राजनीति नए समीकरण बनाती रही। लेकिन अब दिग्विजय ने जिस खुले मन से कांग्रेस की सरकार बनने के दावे के साथ कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनाए जाने की बात कही है, उसके कई मायने निकाले जा रहे हैं।

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आपको बता दें कि कुछ समय पहले पूर्व अध्यक्ष और सांसद अरुण यादव, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल ने सीएम फेस के सवाल पर कहा था कि चुनाव होने के बाद फैसला होगा। नियम मुताबिक विधायक दल तय करेगा, अभी से कमलनाथ को प्रोजेक्ट नहीं किया जा सकता। हालांकि पार्टी नेताओं के इन बयानों से कमलनाथ ने खुद को दूर रखा था। यह जरुर कहा था कि चिंता पूरे प्रदेश की है। किसी पद की लालसा न पहले की और न ही आगे रहेगी। इसके बाद रायपुर में कांग्रेस राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी कमलनाथ की तरफ इशारा करते हुए चुनावी तैयारियां तेज करने की सलाह दी थी। अघोषित तौर पर कमलनाथ का विरोध करने वाले नेताओं को भी केन्द्रीय नेतृत्व ने साफ़ संदेश दे दिया था कि लक्ष्य पार्टी की जीत रहे न कि सीएम फेस और गैरजरुरी बातें। अब दिग्विजय के बयान ने स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव अभियान में भले ही मन न मिले लेकिन कमलनाथ से हाथ मिलाते रहेंगे।

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गौर करने वाली बात यह भी है कि 2018 का विधानसभा चुनाव कमलनाथ के नेतृत्व में ही लड़ा गया था। जिसमें 230 सीट में से 114 सीट जीतकर कांग्रेस ने सरकार बनाई। मुख्यमंत्री कमलनाथ ही बने। 15 महीने बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया के पाला बदलते ही सिंधिया गुट के 22 विधायकों ने बीजेपी का दामन थाम लिया। 114 का आंकड़ा 95 पर सिमट कर रह गया। अगले साल होने वाले आम चुनाव में कांग्रेस का चेहरा कौन होगा? दिग्विजय सिंह इस सवाल को टाल गए। बोले कि लोक चुनाव राष्ट्रपति चुनाव के ढंग से नहीं होता हैं। संसदीय स्वरुप में पार्टियों के बीच चुनाव होता है, जिसमें पाती जीतती है, उम्मीदवार नहीं। लिहाजा अभी किसी का नाम लेना जल्दबाजी होगी।

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