MP News: कमलनाथ का आरोप, लाड़ली बहना योजना को बंद करने के लिए BJP कर रही है साजिश, बताए ये कारण
MP News: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले लाड़ली बहना योजना को लेकर विपक्ष ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सरकार पर यह आरोप लगाया है कि वह लाड़ली बहना योजना को जानबूझकर खत्म करने की कोशिश कर रही है, और इसके पीछे भाजपा का चुनावी फायदा उठाने का एजेंडा हो सकता है।
इस पूरे मुद्दे पर कांग्रेस ने सरकार से सवाल पूछा है कि आखिर क्यों महिलाओं के नाम योजनाओं से बाहर किए जा रहे हैं और उनके अधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है।

कमलनाथ ने कहा कि "ऐसा लगता है कि मध्य प्रदेश सरकार पिछले दरवाजे से लाड़ली बहना योजना को बंद करना चाहती है। भाजपा ने चुनावी फायदे के लिए महिलाओं को 3000 रुपये प्रति माह देने का वादा किया था, लेकिन अब चुनाव के बाद उनकी स्थिति बदल चुकी है। भाजपा ने महिलाओं को सम्मान राशि देने का वादा तो किया था, लेकिन अब 'मतलब निकलने के बाद पहचानते नहीं' वाली बात हो गई है।"
लाड़ली बहना योजना से 3 लाख महिलाएं बाहर
कमलनाथ के आरोप के मुताबिक, पिछले 2 सालों में 3 लाख महिलाओं को लाड़ली बहना योजना से बाहर कर दिया गया है। उन्होंने इस पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अब समग्र पोर्टल से महिलाओं के नाम डिलीट हो रहे हैं और इससे उनकी आर्थिक सहायता रुक रही है। आगर मालवा और बैतूल के कलेक्टरों द्वारा इस संबंध में पत्र लिखने की जानकारी भी सामने आई है, जिसमें बताया गया कि कई महिलाओं के नाम समग्र पोर्टल से हटाए गए हैं और उनके आधार को डीलिंक कर दिया गया है, जिसके कारण उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
पिछले दो वर्षों में घटती महिलाओं की संख्या
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सितंबर 2023 से लेकर फरवरी 2025 तक, लाड़ली बहना योजना के तहत लाभार्थी महिलाओं की संख्या में लगातार कमी देखी गई है। इसके बाद अब उनके नाम डिलीट होने का सिलसिला शुरू हो गया है। इस स्थिति ने विपक्ष को और भी हमलावर बना दिया है और उन्होंने इसे भाजपा की साजिश करार दिया है।
कांग्रेस का आरोप
कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा ने चुनावी फायदा लेने के लिए महिलाओं को लाड़ली बहना योजना के तहत 3000 रुपये प्रति माह देने का वादा किया था, लेकिन अब उस वादे को निभाने में असमर्थ हो रही है। कमलनाथ ने यह भी कहा कि भाजपा की यह रणनीति महिलाओं को अपात्र बनाने और समान राशि ना देने के लिए जानबूझकर लागू की जा रही है, ताकि भाजपा को वित्तीय बोझ से छुटकारा मिल सके।
कांग्रेस पार्टी का विरोध
कमलनाथ ने इसे एक "खुला षड्यंत्र" करार दिया और कहा कि कांग्रेस पार्टी इस साजिश को हर स्तर पर बेनकाब करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब भाजपा को महिला वोट बैंक का फायदा हो गया, तो अब वह इसे छोड़ने के प्रयास कर रही है, जो महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ है।
बैतूल में लाड़ली बहना योजना की 169 महिलाओं के नाम डिलीट
लाड़ली बहना योजना में महिलाओं को मिलने वाली आर्थिक सहायता को लेकर एक और गंभीर मामला सामने आया है। बैतूल कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने हाल ही में एमपी इलेक्ट्रॉनिक डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन को पत्र लिखकर जानकारी दी कि समग्र पोर्टल से 169 महिलाओं के नाम डिलीट कर दिए गए हैं, जिससे उन महिलाओं को योजना के तहत दी जा रही आर्थिक सहायता नहीं मिल पा रही है।
कलेक्टर ने पत्र में लिखा है कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के अंतर्गत उन महिलाओं को जो आर्थिक मदद प्राप्त कर रही थीं, अब उनका समग्र आईडी में कोई समस्या आ रही है। इससे उनकी सहायता राशि रोकी जा रही है। उन्होंने इस मामले का समाधान जल्द से जल्द करने की मांग की ताकि सभी प्रभावित महिलाओं को योजनाओं का लाभ मिल सके।
समग्र पोर्टल से डिलीट हो रहे नाम, आधार का डीलिंक होना भी चिंता का विषय
बैतूल और आगर मालवा जिले में समग्र पोर्टल के डेटाबेस से महिलाओं के नाम डिलीट होने की समस्या सामने आई है। इसके अलावा, आधार को भी समग्र से डीलिंक किया जा रहा है, जिससे महिलाओं को लाड़ली बहना योजना के अंतर्गत मिलने वाली मदद प्रभावित हो रही है। यह प्रक्रिया उन महिलाओं के लिए बड़ी समस्या बन गई है जो योजना का लाभ लेने के लिए पहले से ही पात्र थीं, लेकिन अब तकनीकी समस्याओं के कारण उन्हें सहायता नहीं मिल रही।
जिला कलेक्टर की चिंता
कलेक्टर ने अपनी चिट्ठी में साफ कहा कि लाड़ली बहना योजना के लाभार्थियों की सूची में लगातार हो रहे इस बदलाव और नामों के डिलीट होने से योजना के उद्देश्यों को पूरा करने में रुकावट आ रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि इस मुद्दे पर अधिकारियों से लगातार संपर्क किया जा रहा है और जल्द ही इसका समाधान निकाला जाएगा ताकि प्रभावित महिलाओं को जल्द से जल्द आर्थिक सहायता मिल सके।
चिंता का विषय: क्या यह एक संयोग है या तकनीकी समस्या?
यह घटना लाड़ली बहना योजना की प्रभावी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करती है। योजना के अंतर्गत महिलाओं को रूपये 1000 से लेकर 3000 तक हर महीने सहायता दी जाती है, लेकिन इस तरह की तकनीकी समस्याओं के कारण कई महिलाओं को यह राशि नहीं मिल पा रही है। इससे योजना की सफलता पर असर पड़ सकता है, जो चुनावी लाभ के लिए शुरू की गई थी।
आखिरकार, इस मुद्दे का हल कब मिलेगा?
अब सवाल यह उठता है कि क्या यह तकनीकी समस्या है या इसके पीछे कोई संवेदनशील मुद्दा है, जिससे महिलाओं को जानबूझकर लाभ से वंचित किया जा रहा है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार और प्रशासन को जल्द समाधान ढूंढ़ने की आवश्यकता है ताकि लाड़ली बहना योजना के लाभार्थियों को उनका संविधानिक अधिकार मिल सके।
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