MP Election: प्रत्याशियों की लिस्ट में सिंधिया का दबदबा, मंत्री से लेकर पूर्व विधायकों को मिला टिकट

MP Jyotiraditya Scindia News

MP Assembly Election 2023: मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए 17 नवंबर को मतदान किया जाएगा। ऐसे में चुनाव को लेकर बीजेपी और कांग्रेस अपने-अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर चुकी है। दोनों ही दलों ने 230 सीटों में लगभग सभी प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया है। इस बीच बीजेपी की हाल ही में जारी की गई सूची में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का दबदबा देखने को मिला।

ज्योतिरादित्य सिंधिया के 25 वफादार जो उनके साथ भाजपा में आए थे, उनमें से 18 मौजूदा विधायकों को पार्टी ने इस चुनाव में दोहराया है, हालांकि उनके कुछ समर्थक जो कांग्रेस में लौट गए, वे भी इसके टिकट पाने में कामयाब रहे।

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पीएम मोदी ने की सिंधिया की तारीफ

21 अक्टूबर को ग्वालियर में 'द सिंधिया स्कूल' के 125वें संस्थापक दिवस समारोह में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया आकर्षण का केंद्र थे, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिस्सा लिया था। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने अपने भाषण में सिंधिया की खूब तारीफ की थी, इसी के साथ इशारों-इशारों में उनको मध्य प्रदेश में बीजेपी का भविष्य तक बता दिया।

5वीं सूची में सिंधिया का दबदबा

इस कार्यक्रम से कुछ घंटे पहले ही सत्तारूढ़ भाजपा ने 17 नवंबर को होने वाले चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की 5वीं सूची जारी की थी, जिसमें सिंधिया के ज्यादातर प्रमुख वफादारों के नाम थे। हालांकि कई महीनों से सिंधिया खेमा गुटों में बंटी राज्य भाजपा इकाई की अंदरूनी कलह से जूझ रहा था। उनके वफादार नेता, जिनमें कई विधायक भी शामिल हैं, जो 2020 की शुरुआत में उनके साथ कांग्रेस से भाजपा में चले गए थे।

कांग्रेस नहीं बल्कि कांग्रेस में जगह

ऐसा नहीं की बीजेपी बल्कि सिंधिया के वफादारों को दोनों पार्टियों की सूची में जगह दी गई है। सिंधिया के 25 प्रमुख वफादार, जो उनके भाजपा में चले जाने के बाद उनके साथ चले गए थे, उनमें से 18 निवर्तमान विधायकों को बीजेपी ने इस चुनाव में दोहराया है। इस सूची में 10 मौजूदा मंत्री शामिल हैं।

इन करीबियों को मिला टिकट

इन नामों में प्रद्युम्न सिंह तोमर (ग्वालियर), जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट (सांवेर, इंदौर), औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव (बदनावर, धार), लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री प्रभुराम चौधरी (सांची, रायसेन), राजस्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत (सुरखी, सागर), खाद्य मंत्री बिसाहूलाल सिंह (अनूपपुर), पर्यावरण मंत्री हरदीप सिंह डंग (सुवासरा, मंसूर), पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री, महेंद्र सिंह सिसौदिया (बमोरी, गुना), मप्र राज्य नागरिक आपूर्ति निगम अध्यक्ष प्रद्युम्न सिंह लोधी (मलहरा, छतरपुर) और राज्य के लोक निर्माण मंत्री सुरेश धाकड़ (पोहरी, शिवपुरी) का नाम शामिल है।

पांच मौजूदा विधायकों को फिर मौका

भाजपा द्वारा फिर से मैदान में उतारे गए पांच मौजूदा सिंधिया वफादार विधायक हैं, जिनमें जयपाल सिंह जज्जी (अशोक नगर), कमलेश जाटव (अंबाह, मुरैना), ब्रजेंद्र सिंह यादव (मुंगावली, अशोक नगर), मनोज चौधरी (हाटपिपलिया, देवास) और नारायण पटेल (मांधाता, निमाड़) का नाम हैं।

हारे लोगों को पर भी जताया भरोसा

इसके अलावा अपने असंतुष्ट पुराने नेताओं के गुस्से को जोखिम में डालते हुए भाजपा नेतृत्व ने सिंधिया के तीन वफादारों को भी फिर से नामांकित किया है, जो 2020 के दलबदल के बाद उपचुनाव हार गए थे। इनमें पूर्व महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी (डबरा, ग्वालियर) भी शामिल हैं। ऐदल सिंह कंसाना (सुमावली, मुरैना) और रघुराज सिंह कंसाना (मुरैना) का नाम हैं।

हालांकि सात सिंधिया वफादारों ने भी अपने टिकट खो दिए हैं, भले ही उन्होंने नवंबर 2020 के उपचुनाव जीते थे। उनमें शहरी विकास और आवास मंत्री ओपीएस भदोरिया (मेहगांव), मुन्ना लाल गोयल (ग्वालियर पूर्व), रक्षा सनोरिया (भांडेर), और सुमित्रा देवी कास्डेकर (नेपानगर) शामिल हैं।

नाराज समर्थकों को मनाया

गोयल के समर्थकों ने ग्वालियर में सिंधिया के जय विलास पैलेस के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। नाराज पार्टीजनों को शांत करने के लिए सिंधिया को बाहर आकर जमीन पर बैठकर बात करनी पड़ी। टिकट की दौड़ में पिछड़ गए सिंधिया के अन्य वफादार काफी हद तक चुप रहे। इनमें से गिरिराज दंडोतिया (दिमनी), रणवीर जाटव (गोहद) और जसवंत जाटव (करेरा) पिछले चुनाव में अपनी सीट हार गए थे।

दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस खेमे में भी, सिंधिया के कुछ समर्थक, जो भाजपा छोड़कर सबसे पुरानी पार्टी में लौट आए थे, टिकट पाने में कामयाब रहे हैं। उनमें बोधी सिंह भगत (कटंगी, बालाघाट), समंदर पटेल (जावद, नीमच), और बैजनाथ यादव (कोलारस, शिवपुरी) शामिल हैं, जिन्होंने मौजूदा विधायक और पूर्व-सिंधिया वफादार वीरेंद्र रघुवंशी को पछाड़ दिया।

सासंदों को टिकट, सिंधिया पर सस्पेंस खत्म

इसके अलावा भाजपा आलाकमान ने सिंधिया को खुद विधानसभा चुनाव लड़ने की चुनौती से बख्शा है, जबकि मध्य प्रदेश से उनके कैबिनेट सहयोगियों को मैदान में उतारा है, जिनमें प्रह्लाद पटेल (नरसिंहपुर), नरेंद्र सिंह तोमर (दिमनी) और फग्गन कुलस्ते (निवास) शामिल हैं। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को भी मैदान में उतारा गया है, जबकि उनके बेटे और इंदौर-3 के मौजूदा विधायक आकाश का टिकट काट दिया है।

सिंधिया के एक वफादार ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि महाराज का चल गया (सिंधिया की इच्छाएं पूरी हुईं)। वह अपने सभी करीबी समर्थकों को टिकट दिलाने में कामयाब रहे। किसी भी प्रमुख नेता ने अपना खेमा नहीं छोड़ा। वह चुनाव भी नहीं लड़ेंगे और अपने राजनीतिक करियर को खतरे में नहीं डालेंगे। वह मोदी और अमित शाह को पसंद हैं, उनके पास उनके लिए बड़ी योजनाएं हैं।

वहीं बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, 'लिस्ट पूरी तरह से उम्मीदवारों की जीतने की क्षमता पर आधारित थी। हमने उम्र या कोई अन्य कारक नहीं देखा।"

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