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MP News: इंदौर लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई, फॉरेस्ट रेंजर वैभव उपाध्याय 1 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया

MP News: मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती बरतते हुए इंदौर लोकायुक्त इकाई ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के भ्रष्टाचार के खिलाफ कठोर कदम उठाने के निर्देशों के बाद लोकायुक्त की टीम ने धार जिले के बाग वन परिक्षेत्र में फॉरेस्ट रेंजर वैभव उपाध्याय को 1 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया।

यह कार्रवाई 9 अप्रैल 2025 को की गई, जिसने वन विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार की गहरी परतों को उजागर कर दिया है।

Indore Lokayukta s action Forest Ranger Vaibhav Upadhyay caught red handed taking bribe in Dhar

शिकायतकर्ता और मामला: सड़क निर्माण में रिश्वत की मांग

शिकायतकर्ता जितेंद्र वास्केल, जो धार जिले की मनावर तहसील के ग्राम जमुनिया मोटा का निवासी है, ने लोकायुक्त कार्यालय इंदौर में अपनी शिकायत दर्ज कराई। जितेंद्र ने पुलिस अधीक्षक श्री राजेश सहाय, विशेष पुलिस स्थापना (एसपीई), लोकायुक्त इंदौर को बताया कि उन्होंने बाग रोड से पांडु गुफा तक 3 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण का ठेका लिया था। इस सड़क का लगभग 2 किलोमीटर हिस्सा वन विभाग के क्षेत्र में आता है, जिसके लिए उन्होंने वन विभाग से अनुमति भी हासिल की थी।

लेकिन फॉरेस्ट रेंजर वैभव उपाध्याय ने उनके काम में अड़ंगा डालना शुरू कर दिया। जितेंद्र के मुताबिक, वैभव ने उनके काम को रोक दिया और सड़क निर्माण की कुल लागत का 3 प्रतिशत हिस्सा रिश्वत के रूप में मांगा। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले वैभव ने उनसे 96,000 रुपये पहले ही ले लिए थे और अब अतिरिक्त 2 लाख रुपये की मांग कर रहे थे। इस शिकायत के बाद लोकायुक्त ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई की योजना बनाई।

सत्यापन और ट्रैप की तैयारी

लोकायुक्त टीम ने जितेंद्र की शिकायत का सत्यापन किया। सत्यापन के दौरान यह पाया गया कि वैभव उपाध्याय ने वास्तव में 2,00,000 रुपये की रिश्वत की मांग की थी। शिकायत सही पाए जाने पर लोकायुक्त ने ठोस सबूतों के साथ कार्रवाई की रणनीति तैयार की। इसके लिए 9 अप्रैल 2025 को एक ट्रैप दल का गठन किया गया। इस ऑपरेशन को बेहद गोपनीय और योजनाबद्ध तरीके से अंजाम देने की तैयारी की गई, ताकि आरोपी को रंगे हाथों पकड़ा जा सके।

रंगे हाथों गिरफ्तारी: 1 लाख रुपये के साथ धराया

ट्रैप ऑपरेशन के तहत लोकायुक्त की टीम ने जितेंद्र वास्केल को वैभव उपाध्याय से संपर्क करने और रिश्वत की राशि देने के लिए तैयार किया। वैभव ने जितेंद्र से 1,00,000 रुपये की पहली किश्त तुरंत देने को कहा। जैसे ही जितेंद्र ने यह राशि वैभव को सौंपी, लोकायुक्त की टीम ने तत्काल एक्शन लिया और फॉरेस्ट रेंजर को रंगे हाथों पकड़ लिया। यह कार्रवाई धार जिले के बाग वन परिक्षेत्र में की गई। रिश्वत की राशि को जब्त कर लिया गया और आरोपी को हिरासत में ले लिया गया।

कानूनी कार्रवाई: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस

वैभव उपाध्याय के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 की धारा-7 के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह धारा रिश्वत लेने या मांगने के अपराध को गंभीर श्रेणी में रखती है। लोकायुक्त टीम ने मौके से सभी जरूरी सबूत जमा किए और आगे की जांच शुरू कर दी है। बाग में यह कार्रवाई अभी जारी है, जिसमें यह पता लगाया जा रहा है कि क्या वैभव ने पहले भी इस तरह की गैरकानूनी गतिविधियां की थीं।

ट्रैप दल के सदस्य: टीम वर्क का कमाल

  • इस सफल ट्रैप ऑपरेशन में लोकायुक्त की एक विशेष टीम ने अहम भूमिका निभाई। इस दल में शामिल थे:
  • डीएसपी श्री सुनील तालान (टीम लीडर)
  • निरीक्षक श्री राहुल गजभिए
  • प्रधान आरक्षक प्रमोद यादव
  • प्रधान आरक्षक रंजीत द्विवेदी
  • आरक्षक अनिल परमार
  • आरक्षक पवन पटोरिया
  • आरक्षक आशीष नायडू
  • आरक्षक रामेश्वर निंगवाल
  • आरक्षक कृष्णा अहिरवार

इस टीम ने पूरी योजना के साथ ऑपरेशन को अंजाम दिया और वैभव उपाध्याय को रिश्वत लेते हुए पकड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

भ्रष्टाचार पर लोकायुक्त की सख्ती

महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख ने हाल ही में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने के निर्देश दिए थे। उनके नेतृत्व में लोकायुक्त इकाइयां पूरे प्रदेश में सक्रिय होकर भ्रष्ट अधिकारियों पर नकेल कस रही हैं। इस कार्रवाई को उसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। पुलिस अधीक्षक राजेश सहाय ने कहा, "हमारी टीम हर शिकायत को गंभीरता से लेती है। इस मामले में भी सत्यापन के बाद त्वरित कार्रवाई की गई, जिससे आरोपी को पकड़ा जा सका।"

जितेंद्र की हिम्मत और समाज पर प्रभाव

जितेंद्र वास्केल ने इस मामले में हिम्मत दिखाते हुए लोकायुक्त से संपर्क किया, जिसके चलते यह भ्रष्टाचार का मामला सामने आया। उनकी शिकायत ने न सिर्फ वैभव उपाध्याय के काले कारनामों को उजागर किया, बल्कि आम लोगों को भी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने की प्रेरणा दी। स्थानीय लोगों का कहना है कि वन विभाग में ऐसी घटनाएं आम हो गई हैं, लेकिन इस कार्रवाई से अब अधिकारी डरेंगे।

आगे की जांच और संभावित खुलासे

लोकायुक्त अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या वैभव उपाध्याय ने पहले भी इसी तरह की रिश्वत ली थी। उनके बैंक खातों, संपत्तियों और पिछले रिकॉर्ड की छानबीन की जा रही है। यह भी देखा जाएगा कि क्या इस मामले में वन विभाग के अन्य अधिकारी भी शामिल हैं। अगर जितेंद्र की बात सही है कि वैभव ने पहले 96,000 रुपये लिए थे, तो यह मामला और गंभीर हो सकता है।

भ्रष्टाचार पर करारा प्रहार

यह ट्रैप ऑपरेशन मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। लोकायुक्त की इस सख्ती से न सिर्फ फॉरेस्ट रेंजर वैभव उपाध्याय को सबक मिलेगा, बल्कि अन्य भ्रष्ट अधिकारियों के लिए भी यह एक चेतावनी होगी। जितेंद्र वास्केल जैसे ठेकेदारों का काम अब बिना रुकावट के आगे बढ़ सकेगा, और जनता का भरोसा प्रशासन पर फिर से मजबूत होगा। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच में और क्या खुलासे होते हैं और वैभव को क्या सजा मिलती है।

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