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MP: DHLF बैंक से होम लोन लिया, आईसीआईसीआई ने लगा दिया वसूली का केस, खारिज

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सागर, 26 सितंबर। मप्र के सागर में बैंक से लोन लेने और किस्त बाउंस होने पर दूसरा बैंक वसूली के लिए मैदान में आ गया। इतना ही नहीं राजस्व कोर्ट में वसूली का केस भी लगा दिया। ग्राहक जब अपने अधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट पहुंचा और कोर्ट को अवगत कराया कि उक्त बैंक से तो लोन लिया ही नहीं गया है, वसूली का केस इन्होंने किस आधार पर लगाया है तो मामला स्पष्ट हुआ। कोर्ट ने फटकार लगाते हुए केस को खारिज कर दिया है।

MP: लोन लिया नहीं और वसूली करने कोर्ट पहुंच गया ICICI

सागर में भगवानगंज में रहने वाले विजय वासरानी ने कुछ साल पहले सागर में ही स्थित डीएचएफएल बैंक से 12 लाख रुपए का होम लोन लिया था। वे बाकायदा किस्तें भरते रहें, लेकिन बीच में कोरोना काल के कारण आमदनी कम होने से वे किस्तें नहीं भर पाए। इसबीच आईसीआईसीआई बैंक ने कलेक्टर न्यायालय में विजय के खिलाफ धारा-14 सरफेसी एक्ट के तहत वसूली का केस लगा दिया। जबकि विजय का आईसीआईसीआई बैक से कोई लेनदेन ही नहीं था, न ही इन दोनों बैंकों में घोषित रुप से कोई समझौता या अनुबंध हैं। कोर्ट से नोटिस मिलने के बाद विजय घबरा गए। उन्होंने इस मामले में अपने अधिवक्ता पवन नन्हौरिया से संपर्क किया और सारा मामला उनके सामने रखा। उन्होंने नियमों की जानकारी देते हुए बताया कि एक बैंक से लिए गए लोन की वसूली बगैर विधिवत दस्तावेजों के दूसरा बैंक वसूल नहीं कर सकता है। आप चिंता न करो हम कोर्ट में केस लड़ेंगे।

कोर्ट में प्रस्तुत नहीं हुए बैंक के अधिकारी
वरिष्ठ अधिवक्ता पवन नन्हौरिया ने केस के मामले में जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने कलेक्टर कोर्ट में अपने पक्षकार विजय वासरानी की तरफ से लोन के सारे दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए बताया कि उनका लोन डीएचएलएफ बैंक से लिया गया है। आईसीआईसीआई से कोई लोन, लेनदेन या खाता तक नहीं हैं। यह बैंक किसी भी अधिकार से मेरे पक्षकार से लोन वसूली नहीं कर सकती है। अधिवक्ता नन्हौरिया ने कोर्ट को बताया कि इन दोनों बैंक के बीच इस तरह का अनुबंध, डीड, समझौता या विलय जैसी स्थिति भी नहीं है। लोन के एक-एक दस्तावेज का परीक्षण करने के बाद कोर्ट ने भी विजय के मामले में माना कि यह आईसीआईसीआई का लोन है ही नहीं, तो वह वसूल कैसे कर सकती है। इधर कोर्ट ने जब आईसीआईसीआई को इस मामले में अपना पक्ष रखने के लिए कोर्ट में उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किए तो बैंक की तरफ से कोई भी अधिकारी कोर्ट में प्रस्तुत नहीं हुआ। जिस कारण कोर्ट ने यह केस खारिज कर दिया।

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रिकवरी के लिए लगे केस में कई त्रुटियां थी
वकील पवन नन्हौरिया ने बताया कि मेरे पक्षकार विजय वासनानी के खिलाफ लगाया केस प्रथम दृष्टया ही खारिज करने लायक था। इसमें मेरे पक्षकार ने आवेदक बैंक आईसीआईसीआई से कभी भी कोई भी अनुबंध नहीं किया था। इसके अलावा बैंक की ओर से इस आशय का कोई भी दस्तावेज पेश नहीं किया गया। जो यह सबित कर सके कि उनके किस अधिकारी ने धारा 14 सरफेसी एक्ट के तहत यह वसूली केस दाय किया है। कोर्ट में दाखिल शपथ पत्र में भी बैंक के किसी अधिकारी के हस्ताक्षर या उनके नाम का उल्लेख नहीं है। नन्हौरिया ने बताया कि उन्होंने कोर्ट में तर्क दिया था कि आवेदक बैंक का यह प्रकरण फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दायर किया गया है, इसके लिए इनके खिलाफ आईपीसी की धारा 191, 192 और 199 के तहत केस दर्ज किया जाए। हालांकि कोर्ट ने पूरा केस खारिज कर दिया।

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English summary
ICICI took home loan from DHLF, came to recover, case also filed, dismissed
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