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High Court ने Central University सागर की कुलपति, रजिस्ट्रार और एक्जाम कंट्रोलर के खिलाफ वारंट जारी किया

डाॅ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विवि सागर की कुलपति, रजिस्ट्रार व एक्जाम कंट्रोलर के खिलाफ हाईकोर्ट जबलपुर के चीफ जस्ट्सि की डिवीजनल बैंच ने तीनों के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है।

हाईकोर्ट ने सेंट्रल यूनिवर्सिटी सागर की कुलपति, रजिस्ट्रार और एक्जाम कंट्रोलर के खिलाफ वारंट जारी किया

हाईकोर्ट जबलपुर के चीफ जस्टिस रवि मलिमठ एवं न्यायाधीश विशाल मिश्रा की डिविजनल बैंच ने सेंट्रल यूनिवर्सिटी सागर की कुलपति, रजिस्ट्रार और एक्जाम कंट्रोलर के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है। सागर निवासी व LLM के छात्र अधिवक्ता मयंक प्रजापति ने LLM की परीक्षा का रिजल्ट घोषित न करने के विवि के मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थीं। बीते 31 मार्च 2023 को हाईकोर्ट की बैंच ने तीनों को कोर्ट में प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया था, लेकिन तीनों प्रतिवादी तो ठीक इनकी तरफ से वकील तक कोर्ट में प्रस्तुत नहीं हुए थे।

ADV Mayank Prajapati

अधिवक्ता मयंक प्रजापति ने बताया कि वे साल 2021-22 में डाॅ. हरीसिंह गौर सेंट्रल यूनिवर्सिटी से LLM की पढ़ाई कर रहे थे। चूंकी कोविड काॅल था, इसके लिए वे एक्जाम फीस नहीं भर पाए थे, चूंकी सरकार के आदेश थे कि फीस न भरने के कारण किसी को परीक्षा से वंचित नहीं कर सकते, न ही रिजल्ट रोक सकते हैं। उन्होंने परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था। विवि के आईयूएमएस एप्लीकेशन के माध्यम से पेपर दिए, लेकिन तकनीकि कारणों से इस पर पेपर सेंड नहीं हुए तो विवि द्वारा परीक्षा की आॅनसर सीट सबमिट करने के लिए उपलब्ध कराई गई मेल आईडी पर पेपर व आॅंसरशीट सबमिट की थीं। बाद में विवि ने उनका रिजल्ट डिक्लेयर नहीं किया। बताया गया कि पेपर के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं किया और फीस नहीं भरी।

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    अधिवक्ता व विवि के एलएलएम स्टूडेंट मयंक प्रजापति ने बताया कि परीक्षा शाखा के तर्कों के बाद उन्होंने कुलपति और रजिस्ट्रार के यहां आवेदन दिए थे। महीनों परेशान होने के बाद फिर उन्होंने विवि के खिलाफ हाईकोर्ट जबलपुर की शरण ली थी। यहां भी विवि प्रशासन व उनके अधिवक्ताओं का लचर रुख था, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट चीफ जस्टिस के यहां अर्जेट हियरिंग के लिए निवेदन किया था। मयंक के अनुसार बीती 31 मार्च को माननीय चीफ जस्टिस की डिवीजनल बैंच में जब विवि की तरफ से कोई भी प्रस्तुत नहीं हुआ और उनके अधिवक्ता सिद्धार्थ शुक्ला भी प्रस्तुत नहीं हुए तो कोर्ट ने कुलपति, रजिस्ट्रार व एक्जाम कंट्रोलर को प्रत्यक्ष रूप से प्रस्तुत होने का आदेश दिया था। आज 3 अप्रैल को सभी को पर्सनल प्रिजेंस होना था, लेकिन जब कोई नहीं पहुंचा तो चीफ जस्टिस ने सख्त रूख दिखाते हुए तीनों के खिलाफ जमानवती वारंट जारी किया है। मामले में हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 17 अप्रैल की दी गई है।

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