Harda Blast: बारूद के ढेर पर हरदा, घटनास्थल से 2 किमी दूर कई एकड़ में फैले सुतली बम

Harda Blast: यहां पर काम करने वाले मजदूर भाग गए हैं। जल्दबाज़ी में उनका सामान भी छूट गया है। लेकिन कई एकड़ में अभी भी बारूद और बम फैले हुए हैं।

Harda Blast: मध्य प्रदेश के हरदा में फैक्ट्री (Harda Fireworks Factory Blasts) में धमाका हुआ तो 11 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। करीब 200 से अधिक लोग घायल है। हरदा में ब्लास्ट की आग अभी बुझी भी नहीं की एक और डरावनी फैक्ट्री सामने आ गई‌।

आरोपी सोमेश अग्रवाल और राजू अग्रवाल की केवल यही एक फैक्ट्री नहीं थी, बल्कि घटनास्थल से महज 2 किलोमीटर दूर रहेटाखुर्द में उसकी एक और पटाखों की फैक्ट्री मिली है।

Harda Blast:

चौंकाने वाली बात यह है कि इस फैक्ट्री की क्षमता 1500 किलो बारूद स्टॉक करने की है। जबकि, जिस फैक्ट्री में धमाके हुए उसमें 600 किलो का बारूद रखा था।

यह फैक्ट्री कितनी खतरनाक हो सकती है इसका अंदाजा लगा पाना भी मुश्किल है। मंगलवार को जब 600 किलो के बारूद ने दर्जनों लोगों की जान ले ली और आसपास के 60 घरों को अपने आगोश में ले लिया। कई दर्जन लोग अभी भी गुमशुदा है। जबकि 200 से अधिक घायल हैं। ऐसे में 1500KG बारूद का स्टॉक जरा सी चूक पर खौफनाक मंजर के लिए काफी है।

यहां एक चिंगारी सैंकड़ों लोगों की जान ले सकती है। हैरान करने वाली बात यह है कि घटना के बावजूद अबतक इसे बंद नहीं किया गया है। बुधवार को स्थानीय लोगों ने जब इस फैक्ट्री के विरुद्ध प्रदर्शन किया तब मीडिया कर्मियों को इसकी खबर लगी।

फैक्ट्री के अंदर से जो वीडियो आई है वह दहलाने वाली है। यहां कई एकड़ में सुतली बम सूखने के लिए रखे हुए हैं। वहीं, अंदर जगह-जगह बारूद का ढेर है। कल हुए हादसे के बाद वहां कार्यरत कर्मचारी फैक्ट्री को उसी हाल में छोड़कर भाग गए।

गांव बालों के अनुसार इस फैक्ट्री में भी सैंकड़ों कर्मचारी प्रतिदिन नौकरी करते हैं। लेकिन हादसे के बाद छोड़कर भाग गए। ग्रामीणों ने कई बार शिकायत की गई। लेकिन, किसी ने भी इस पर कार्रवाई नहीं की।

वहीं, ब्लास्ट के बाद मौत के आंकड़ों को लेकर भी ग्रामीण सवाल खड़े कर रहे हैं। प्रशासन 11 मौत से अधिक की अबतक पुष्टि नहीं की है। जबकि स्थानीय लोगों का दावा है कि मौत की असल संख्या 200 तक हो सकता है। क्योंकि कई दर्जन लोग अब भी गायब हैं। इससे पहले कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के कहा था कि सरकार शवों को निकालने के बजाए जमीन में दफ्न करने में जुटी हुई है।

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