MP News: प्रदेश की अनाज मंडियों में पसरा सन्नाटा, 25 हजार व्यापारियों की हड़ताल का असर, मांगों पर सरकार गंभीर
MP News: मध्य प्रदेश में अनाज मंडियों में सन्नाटा पसरा रहा। जिसकी बड़ी वजह मंडी कारोबारियों की हड़ताल हैं। इसका सभी 230 मंडियों पर असर पड़ना शुरू हो गया हैं। हालांकि सरकार हड़तालियों की मांगों को लेकर गंभीर हैं। संगठनों के प्रतिनिधि मंडल से हड़ताल खत्म करने की गुजारिश की गई हैं।
कारोबारियों ने अपनी 11 सूत्रीय मांगों पर अब तक विचार होने की वजह से हड़ताल का फैसला लिया। जिसमें प्रमुख रूप से मंडी फीस डेढ़ की बजाय 1% करने, निराश्रित शुल्क खत्म करने की मांगे शामिल हैं। जबलपुर समेत भोपाल, इंदौर, ग्वालियर की मंडियों में कारोबार ठप होने से मंडी में अनाज की नीलामी भी नहीं सकी।

हड़ताल की पहले से ही घोषणा कर दी गई थी, लिहाजा किसान भी अनाज लेकर नहीं पहुंचे और मंडी परिसर वीरान नजर आया। हम्माल और तुलावटी आराम फरमाते नजर आए। मप्र सकल अनाज दलहन तिलहन व्यापारी महासंघ समिति इस पूरी हड़ताल का नेतृत्व कर रहा है। इनका कहना है कि अलग अलग जो शुल्क लिए जा रहे है, वह उचित नहीं है। उस राशि का उपयोग किस रूप में किया जाता है, यह भी नहीं बताया जाता।
हड़ताली कारोबारियों की ये है प्रमुख मांग
- मंडी समितियों में पूर्व से आवंटित भूमि या संरचनाओं पर भूमि एवं संवरचना आवंटन नियम-2009 लागू नहीं किया जाए। कलेक्टर गाइडलाइन से लीज दरों का निर्धारण नहीं रखकर नामिनल दरें रखी जाए।
- मंडी फीस दर एक प्रतिशत की जाए।
- निराश्रित शुल्क समाप्त किया जाए।
- मंडी अधिनियम की धारा 19(2), धारा 19(8), धारा 46(ड) एवं धारा 46(च) में संशोधन-2 विलोपन किया जाए।
- लाइसेंस प्रतिभूति की अनिवार्यता हटाई जाए।
- वाणिज्य संव्यवहार की पृथक अनुज्ञप्ति व्यवस्था एवं निर्धारण फीस रुपए 25 हजार रुपए की वृद्धि समाप्त कर पूर्व फीस 5 हजार रुपए बहाल की जाए।
- मंडी समितियों को धारा 17(2)(14) और 30 में प्रदत्त अधिकारी एवं शक्तियों को यथावत रखा जाए।
- लेखा सत्यापन/पुन: लेखा सत्यापन की कार्रवाई खत्म की जाए।
- कृषक समिति प्रतिभूति बढ़ाने के दवाब पर रोक लगाई जाए।
- धारा 23 के अंतर्गत गाड़ियों को रोकने की शक्ति प्रावधान की परिधि के बाहर जाकर मंडी बोर्ड कार्यालय स्तर से गठित किए जाने वाले जांच दलों पर रोक लगाई जाए।












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