25 साल से पीपल के पेड़ के नीचे चल रहा सरकारी स्कूल, बच्चों को बारिश में सताता है सांप-बिच्छू का डर, VIDEO
सतना। सरकारी दावों और नेताओं के वादों की कड़वी हकीकत देखनी है तो मध्य प्रदेश के सतना जिले में राम की तपो भूमि चित्रकूट के बांका पंचायत के टिकरा गांव चले आएं। यहां पर 25 साल पुरानी एक प्राथमिक शासकीय पाठशाला है, जो पीपल के पेड़ के नीचे संचालित हो रहा है। इसके पास खुद का भवन नहीं है।

आलम यह है कि वर्ष 1995 में प्राथमिक शासकीय पाठशाला खुला था तब इसमें पढ़ने वाले वर्तमान में जवान हो गए। इन 25 सालों में कई विधायक-सांसद बदले। सूबे में सरकार भी बदली, मगर टिकरा गांव की पाठशाला की ना तस्वीर बदली और ना ही तकदीर। कोई इसे अभी तक खुद का भवन नहीं दे पाया है।

बच्चों के सामने मौसम की चुनौती
टिकरा गांव की प्राथमिक शासकीय पाठशाला के बच्चों को मौसम की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। चाहे कड़ाके की ठंड हो या तपती दुपहरी। बच्चों को इसी पीपल के नीचे बैठकर पढ़ना पड़ता है। यह बात अलग है कि बारिश के दिनों में अक्सर स्कूल का अवकाश ही रहता है। इसकी एक वजह यह भी है कि यहां पर सांप-बिच्छू निकलने का भी खतरा रहता है।

अन्य स्कूल 15 किलोमीटर दूर
ग्रामीण धर्मदास की मानें तो ऐसा नहीं है कि पीपल के नीचे स्कूल संचालित होने की जानकारी सतना जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को नहीं है। चित्रकूट उपचुनाव के पहले भाजपा सरकार के कई मंत्री गांव पहुंचे तब ग्रामीणों ने उनसे स्कूल के भवन की मांग की, मगर नतीजा ठाक के तीन पात। गांव से अन्य स्कूलों की दूरी 15 किलोमीटर दूर है। उनके रास्ते भी पहाड़ी और उबड़खाबड़ है। ऐसे में बच्चों को इसी स्कूल में पढ़ाने को मजबूर हैं।

चार साल पहले हुए थे लामबंद
ग्रामीण अमर सिंह गोण ने बताया कि चार वर्ष पूर्व ग्रामीण लामबंद होकर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और स्थानीय विधायक और सांसद से मुलाकात कर समस्या बताई। सतना सांसद गणेश सिंह सांसद निधि से दो कमरे स्वीकृत कराने के लिए राशि जारी की, लेकिन भवन अभी तक नहीं बना।

बिना भवन काफी मुश्किलें
प्राथमिक शाला टिकरा के प्रधानाध्यापक छोटेलाल सिंह बताते हैं कि पीपल के पेड़ के नीचे स्कूल संचालित होने से कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बरसात में तो अक्सर छुट्टी ही करनी पड़ती है। वहीं इस मामले में सतना जिला शिक्षा अधिकारी बीएस देवलहरा बताते हैं कि टिकरा के स्कूल को भवन उपलब्ध करवाने का प्रयास कर रहे हैं।












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