MP को नई सौगात, रजिस्ट्री के लिए कल से दफ्तर जाना जरूरी नहीं, VIDEO कॉन्फ्रेंसिंग और बायोमेट्रिक से होगी पहचान
MP News: मध्य प्रदेश के सभी 55 जिलों में भूमि और भवन रजिस्ट्री अब और भी आसान होने जा रही है। कल से राज्य में रजिस्ट्री के नए नियम लागू होने जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव पंजीयन और मुद्रण विभाग के "संपदा 2.0" सॉफ्टवेयर का शुभारंभ करेंगे, जो रजिस्ट्री प्रक्रिया को डिजिटल रूप में और अधिक सुविधाजनक बनाएगा।

संपदा 2.0 से ईकेवाईसी से पहचान होगी। रजिस्ट्री करने के लिए संपत्ति धारकों के पास तीन विकल्प मौजूद होंगे वह चाहे तो उप पंजीयन के दफ्तर जाकर पूर्व की तरह रजिस्ट्री करा सकेंगे। यदि कोई विदेश में है और रजिस्ट्री के लिए दफ्तर नहीं आना चाहते तो, वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उप पंजीयन से संवाद कर रजिस्ट्री करा सकेंगे।
नई रजिस्ट्री प्रक्रिया के विकल्प
- ई-केवाईसी से पहचान:
- संपदा 2.0 के माध्यम से संपत्ति धारकों की पहचान ई-केवाईसी के जरिए की जाएगी। अब संपत्ति धारक के पास रजिस्ट्री कराने के लिए तीन विकल्प होंगे:
- पारंपरिक तरीका: उप पंजीयन कार्यालय जाकर रजिस्ट्री कराना।
- वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग: यदि धारक विदेश में है और कार्यालय नहीं आ सकता, तो वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उप पंजीयन से संवाद कर रजिस्ट्री करा सकेगा।
- ई-केवाईसी द्वारा पहचान: कुछ मामलों में विक्रेता और खरीदार की पहचान ई-केवाईसी से की जाएगी।
- प्रमुख सुविधाएं
- जीआईएस मेपिंग और बायोमेट्रिक पहचान: संपत्ति की जीआईएस मेपिंग और बायोमेट्रिक पहचान की सुविधा मिलेगी, जिससे दस्तावेजों का स्वत: प्ररूपण संभव होगा।
- डिजिटल सिग्नेचर: दस्तावेजों का निष्पादन ई साइन और डिजिटल सिग्नेचर से किया जाएगा, जिससे व्यक्तिगत उपस्थिति की अनिवार्यता समाप्त हो जाएगी।
- वीडियो केवाईसी: व्यक्ति की पहचान के लिए वीडियो केवाईसी का प्रावधान रखा गया है।
- मोबाइल ऐप की सुविधा
- संपदा 2.0 के तहत एक विशेष मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया गया है, जिसके जरिए संपत्ति की रजिस्ट्री की सारी प्रक्रिया ऑनलाइन की जा सकेगी। इससे साइबर तहसील और डिजिटल प्रक्रियाओं के माध्यम से प्रदेश के राजस्व संग्रहण में सुधार होगा।
कुल मिलाकर, यह नई व्यवस्था न केवल रजिस्ट्री प्रक्रिया को आसान बनाएगी, बल्कि सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और दक्षता भी लाएगी।












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