ED की छापेमार कार्रवाई के बीच गायत्री फूड्स की मालकिन पायल मोदी ने खाया जहर, 72 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी मिली
भोपाल में जयश्री गायत्री फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के मालिक की पत्नी पायल मोदी ने गुरुवार शाम जहर खाकर जान देने की कोशिश की। पायल मोदी (31 वर्ष) ने घर में रखी चूहे मार दवा का सेवन कर लिया, जिसके बाद उनकी स्थिति गंभीर हो गई और उन्हें तुरंत बंसल अस्पताल में भर्ती कराया गया।
पायल मोदी की हालत
पायल मोदी की हालत फिलहाल गंभीर बनी हुई है और पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। पुलिस ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि पायल ने जहर क्यों खाया, लेकिन इस पर जांच जारी है। पायल की आत्महत्या की कोशिश के कारणों का खुलासा जांच के बाद ही किया जाएगा।

ईडी की सर्चिंग और जब्ती
यह घटना उस दिन घटी जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जयश्री गायत्री फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के भोपाल, सीहोर और मुरैना स्थित ठिकानों पर छापेमारी की थी। ईडी की छापेमारी के दौरान कंपनी के ठिकानों से 72.50 करोड़ रुपए की संपत्ति का खुलासा हुआ। इसमें 66 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी, 25 लाख रुपए नकद, दस्तावेज और लग्जरी कारें शामिल हैं, जिन्हें जब्त कर लिया गया है। इसके अलावा, कंपनी की एफडी के 6.26 करोड़ रुपए भी फ्रीज कर दिए गए हैं।
छापेमारी में क्या मिला?
ईडी ने इस छापेमारी के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज और लग्जरी बीएमडब्ल्यू, फॉर्च्यूनर कारें भी बरामद की हैं। इन दस्तावेजों की जांच से वित्तीय अनियमितताओं का पता चला है। छापेमारी पीएमएलए (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) 2002 के तहत की गई थी, और इस दौरान सीआरपीएफ के जवानों की भी मौजूदगी रही।
ईडी की टीम ने भोपाल के बिट्टन मार्केट, शाहपुरा स्थित आवास के अलावा सीहोर-रातीबड़-भोपाल मार्ग पर स्थित जयश्री गायत्री पनीर फैक्ट्री और मुरैना में फैक्ट्री प्रबंधक के मकान पर भी कार्रवाई की थी।
ईडी की सर्चिंग और जब्ती
ईडी ने सीआरपीएफ की तैनाती में की गई इस जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और 25 लाख रुपये नकद बरामद किए। इसके साथ ही लग्जरी कारें जैसे बीएमडब्ल्यू और फॉर्च्यूनर भी जब्त की गईं। जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी के चल-अचल संपत्ति के दस्तावेजों में वित्तीय अनियमितताएं पाई गईं हैं, जो अब जांच के दायरे में हैं।
फर्जी लैब सर्टिफिकेट का इस्तेमाल
ईडी की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि मेसर्स जयश्री गायत्री फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड अपने निदेशकों के माध्यम से जाली लैब प्रमाणपत्र का उपयोग करके मिलावटी मिल्क प्रोडक्ट्स का घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई कर रही थी। इस कंपनी के उत्पादों में न केवल प्रोडक्शन बल्कि डिस्ट्रीब्यूशन में भी गड़बड़ियां पाई गई हैं।
जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी द्वारा इस्तेमाल किए गए लैब सर्टिफिकेट फर्जी थे और ये प्रमाणपत्र बीआईएस, एनएबीएल जैसी मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं से धोखाधड़ी से हासिल किए गए थे। इन प्रमाणपत्रों का उपयोग मिलावटी दूध के निर्यात के लिए किया जा रहा था और यह कई देशों में घरेलू उपभोग के लिए भेजे जा रहे थे।
63 फर्जी लैब सर्टिफिकेट का खुलासा
अब तक 63 फर्जी लैब सर्टिफिकेट की पहचान की गई है, जो कंपनी द्वारा मिलावटी दूध के प्रमाणीकरण के लिए इस्तेमाल किए गए थे। इस फर्जी प्रमाणीकरण का उपयोग विदेशों में उत्पादों को भेजने के लिए किया जाता था। ईडी की जांच ने इन फर्जी प्रमाणपत्रों के धोखाधड़ी से इस्तेमाल का पर्दाफाश किया है, और यह पूरे ऑपरेशन में व्यापक वित्तीय धोखाधड़ी की ओर इशारा कर रहा है।
कार्रवाई और भविष्य की जांच
ईडी द्वारा की गई यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) 2002 के तहत की गई है। अब आगे की जांच में पता चलेगा कि इस पूरे नेटवर्क में और किस-किस की संलिप्तता है और क्या-क्या वित्तीय अनियमितताएं सामने आती हैं। ईडी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्रवाई जारी रखी है, और जल्द ही कई और पहलुओं पर जांच हो सकती है।
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