MP News: मध्यप्रदेश में पहली बार एक ही जगह से दो बाघों का रेस्क्यू, जानिए कैसे सफल हुआ ऑपरेशन, किसानों को राहत
MP Raisen News: मध्य प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना घटी है। भोजपुर के जंगलों से पहली बार एक ही जगह से दो बाघों को एक साथ रेस्क्यू किया गया। यह घटनाक्रम सोमवार और मंगलवार की रात को हुआ, जब ये बाघ किसानों के लिए गंभीर समस्या बन गए थे।
किसानों की शिकायत थी कि ये बाघ लगातार उनके खेतों में घुसकर मवेशियों का शिकार कर रहे थे, जिसके कारण उन्हें अपनी रोज़ी-रोटी कमाने में मुश्किलें आ रही थीं।

किसानों की समस्या का समाधान
भोजपुर के जंगलों के आसपास के क्षेत्र में बाघों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा था। एक महीने में इन दोनों बाघों ने 5 से ज्यादा पालतू मवेशियों का शिकार किया था। नतीजतन, किसानों ने खेतों में जाना बंद कर दिया था, जिससे उनका कामकाज ठप हो गया था। इन बाघों ने खेतों और गांवों के बीच के रास्तों पर अपना आतंक फैलाया था, जिससे ग्रामीणों को भी काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
पिंजरे में बकरी बांधने के बाद शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन
किसानों की बढ़ती समस्याओं को देखते हुए, भोजपुर वन विभाग ने रेस्क्यू का प्लान तैयार किया। रेंज अधिकारी कार्तिकेय शुक्ला ने बताया कि सोमवार शाम को पिंजरे में बकरी बांधी गई थी, ताकि बाघ को फंसाया जा सके। रात के वक्त, एक बाघ पिंजरे में फंस गया और वह तेज़-तेज़ गुर्राने लगा। उसकी आवाज़ सुनकर दूसरा बाघ भी पिंजरे के पास आ बैठा।
मंगलवार सुबह 5 बजे, वन विभाग की टीम ने दूसरे बाघ को ट्रेंक्युलाइज किया और रेस्क्यू ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। रेस्क्यू टीम ने बाघों का स्वास्थ्य परीक्षण किया और फिर उन्हें सुरक्षित तरीके से सतपुड़ा टाइगर रिजर्व भेजा, जहां उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा।
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की ओर बाघों की यात्रा
रेस्क्यू के बाद, दोनों बाघों को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व भेजा गया, जहां वे खुले जंगल में अपनी ज़िंदगी जारी रख सकेंगे। इस प्रक्रिया में वन विभाग के डॉक्टर्स भी रेस्क्यू टीम के साथ भेजे गए, ताकि बाघों के स्वास्थ्य की निगरानी की जा सके और वे पूरी तरह से स्वस्थ हों।
भोजपुर क्षेत्र में बाघों का बढ़ता दबाव
भोजपुर क्षेत्र और आसपास के वन और राजस्व क्षेत्र में बाघों के कारण ग्रामीणों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। खेतों में काम करने के बजाय लोग बाघों के डर से घरों में ही रहने लगे थे। खेतों और वन क्षेत्र के बीच से गुजरने वाला रास्ता, जो ग्रामीणों के लिए मुख्य मार्ग था, अब उनके लिए खतरनाक बन गया था। भोजपुर, मंडीदीप और बंगरसिया जैसे क्षेत्रों का आवागमन भी इस वजह से प्रभावित हो रहा था।
वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम
इस रेस्क्यू ऑपरेशन ने यह साबित कर दिया कि मध्य प्रदेश वन्यजीव संरक्षण के मामले में पूरी तरह से सक्रिय है और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। वन विभाग द्वारा किए गए इस रेस्क्यू से न सिर्फ बाघों को सुरक्षित किया गया, बल्कि किसानों और ग्रामीणों की समस्याओं का भी समाधान हुआ है।
ग्रामीणों की शिकायतें और वन विभाग का एक्शन
किसान और ग्रामीण लगातार वन विभाग से इन बाघों के रेस्क्यू की मांग कर रहे थे। उन्होंने सीएम हेल्पलाइन पर भी अपनी शिकायत दर्ज कराई थी, और स्थिति गंभीर होने पर विभाग को आगे आकर इन बाघों को सुरक्षित स्थान पर भेजने की जरूरत महसूस हुई। अंततः, वन विभाग ने इस मुद्दे पर कार्रवाई करते हुए दोनों बाघों को रेस्क्यू किया।
रेस्क्यू ऑपरेशन में 50 सदस्यीय टीम लगी थी
रेंज अधिकारी कार्तिकेय शुक्ला के अनुसार, सोमवार शाम को पिंजरे में बकरी बांधने के बाद पहला बाघ पिंजरे में फंसा और दूसरी रात बाघ ने अपना साथी पिंजरे के पास देखा, जिसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ। 15 दिनों से 50 सदस्यीय टीम ने लगातार काम किया था। सोमवार सुबह, वनविहार भोपाल और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की रेस्क्यू टीम, पशु चिकित्सकों, और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से दोनों बाघों का सफल रेस्क्यू किया गया।
सफल रेस्क्यू का यह पहला मामला नहीं
यह खास बात है कि पिछले एक साल में रायसेन और ओबेदुल्लागंज वन मंडल में पांच बाघों का सफल रेस्क्यू किया गया है। इसके अलावा, नीलगाय, हिरण और जंगली सूअर जैसे अन्य वन्य जीवों का भी रेस्क्यू किया गया। दाहोद रेंज अधिकारी कार्तिकेय शुक्ला ने इस सफलता को ऐतिहासिक करार दिया, क्योंकि एक ही साल में इतने बाघों का रेस्क्यू वन विभाग की त्वरित प्रतिक्रिया और रणनीति को दर्शाता है।
बाघों को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व भेजा गया
रेस्क्यू के बाद, इन दोनों बाघों को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व भेज दिया गया, जहां उन्हें सुरक्षित रूप से जंगल में छोड़ा गया। इस दौरान दोनों बाघों का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया और यह सुनिश्चित किया गया कि वे स्वस्थ हैं और उन्हें किसी प्रकार का शारीरिक कष्ट नहीं हो रहा है।
ग्रामीणों के आक्रोश के बीच रेस्क्यू की आवश्यकता
डीएफओ हेमंत रैकवार ने बताया कि ग्रामीणों के बढ़ते आक्रोश और उनकी चिंता को देखते हुए यह निर्णय लिया गया था कि दोनों बाघों को रेस्क्यू किया जाए। इससे न केवल किसानों और ग्रामीणों को राहत मिली, बल्कि यह सुनिश्चित किया गया कि बाघों को भी उनके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रूप से छोड़ दिया जाए।
यह रेस्क्यू ऑपरेशन मध्य प्रदेश वन विभाग की प्रतिबद्धता और वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे यह भी साबित हुआ कि विभाग न केवल वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को भी कम करने के लिए सख्त कदम उठा रहा है।
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