MP News: महिला दिवस पर बुजुर्गों का अनोखा संकल्प, मरने के बाद भी किसी की रोशनी बनेंगी ये 15 माताएं
MP News: आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर भोपाल के अपना घर वृद्ध आश्रम की बुजुर्ग महिलाओं ने समाज के लिए एक मिसाल कायम की है। जीवन के अंतिम पड़ाव पर खड़ी इन महिलाओं ने यह संकल्प लिया है कि वे न केवल जीते जी समाज को प्रेरित करेंगी, बल्कि मरने के बाद भी अपने शरीर के जरिए किसी की जिंदगी को रोशन करेंगी।
दरअसल, अपना घर आश्रम की 15 बुजुर्ग महिलाओं ने देहदान का फैसला लिया है। इनकी उम्र 60 से 95 साल के बीच है। इस फैसले के पीछे उनके जीवन के कड़वे अनुभव हैं, जिन्होंने उन्हें यह निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया।

यह निर्णय क्यों लिया गया?
अपना घर आश्रम की संचालिका माधुरी मिश्रा ने बताया कि कई बार बुजुर्गों की मृत्यु के बाद उनके शव दो से तीन दिन तक पड़े रहते हैं, क्योंकि उनके बच्चे या परिवार वाले उन्हें लेने नहीं आते। यह दृश्य देखकर आश्रम की साधना दादी के मन में यह विचार आया कि अगर उनके अपने ही उनके साथ नहीं हैं, तो क्यों न उनका शरीर समाज के काम आए।
माधुरी मिश्रा ने कहा, "यह फैसला सिर्फ एक कागज पर दस्तखत करने से कहीं बड़ा है। यह उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा सबक है, जो वे हमें देकर जा रही हैं। जीते जी माता-पिता हमारी मदद करते हैं, और अगर वे अंगदान करके समाज को कुछ दे जाएं, तो यह उनकी महानता का प्रतीक है।"
इस पहल की वजह बने यह दो केस
माधुरी मिश्रा ने बताया कि इस पहल के पीछे एक और दर्दनाक घटना है। करीब साल भर पहले मुरारी लाल विश्वकर्मा और उनकी पत्नी की कहानी ने आश्रम की महिलाओं को झकझोर कर रख दिया। मुरारी लाल की पत्नी का निधन करवा चौथ के दिन हुआ था, लेकिन उनके बच्चे उन्हें लेने नहीं आए। उन्होंने कहा कि उनके पास समय नहीं है। यह घटना आश्रम की वृद्ध महिलाओं को इस फैसले के लिए प्रेरित किया।
अपना घर वृद्ध आश्रम में एक आजमगढ़ की वृद्ध महिला कमलावती रहती थीं। उनका देहांत हुआ। जिसके बाद हमने उनके बेटे और परिचितों से संपर्क किया। वह लोग पुणे से भोपाल नहीं आ सके, हमें बोले कि आप अंतिम संस्कार कर दो हमें ऑनलाइन दिखा देना।












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