ED ने सौरभ शर्मा, चेतन सिंह गौर और शरद जायसवाल से की कड़ी पूछताछ, 11 करोड़ कैश और 52 किलो सोने का लिंक खंगाला
MP News: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने गुरुवार को केंद्रीय जेल में बंद आरटीओ के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा से पूछताछ जारी रखी। इस बार ईडी की टीम ने सौरभ शर्मा के साथ उनके सहयोगियों चेतन सिंह गौर और शरद जायसवाल से भी सवाल किए।
पूछताछ का मुख्य फोकस 11 करोड़ रुपये के कैश और 52 किलो सोने के लिंक को समझने पर था। इसके अलावा, ईडी ने तीनों से आय के अन्य स्रोतों और उनकी ऑडिट रिपोर्ट को लेकर भी सवाल किए।

कैश और सोने के लिंक की जांच
ईडी की टीम ने सौरभ शर्मा, शरद जायसवाल और चेतन सिंह गौर को एक साथ बैठाकर उनसे कई अहम सवाल पूछे। विशेष रूप से, उनके द्वारा संचालित कंपनियों में भागीदारी, कैश ट्रांजैक्शन, और मंड़ोरी में इनोवा कार से बरामद 52 किलो सोने के बारे में गहन पूछताछ की गई। इसके अलावा, 11 करोड़ रुपये के कैश ट्रांजैक्शन और फर्जी ऑडिट रिपोर्ट्स के संबंध में भी सवाल किए गए।
मछली ठेका और आय के अन्य स्रोत
ईडी की जांच का एक अन्य प्रमुख पहलू यह था कि सौरभ शर्मा ने उत्तर प्रदेश में मछली ठेके का भी एक लिंक स्थापित किया था, जिससे आय का एक अतिरिक्त स्रोत उत्पन्न हुआ था। इस मामले में भी ईडी ने दस्तावेज और रिकॉर्ड की जांच की, ताकि इस आय के स्रोत को और गहराई से समझा जा सके।
ईडी की जांच की गति
ईडी की टीम ने पहले भी सौरभ शर्मा से पूछताछ की थी, जब वह लोकायुक्त पुलिस की रिमांड पर थे। उनके रिमांड की अवधि समाप्त होने के बाद, 17 फरवरी तक उन्हें केंद्रीय जेल भेजा गया है, जहां अब ईडी की टीम लगातार दूसरे दिन उनसे पूछताछ कर रही है। पहले दिन 6 घंटे से अधिक समय तक सौरभ शर्मा से सवाल-जवाब किए गए थे। अब यह भी बताया जा रहा है कि जांच टीम ने उन्हें फिर से तलब किया है ताकि उनकी कंपनियों और लेन-देन से जुड़े सभी पहलुओं को और स्पष्ट किया जा सके।
फर्जी ऑडिट रिपोर्ट्स और अन्य जांच
ईडी को सौरभ शर्मा की कई ऑडिट रिपोर्ट्स में अनियमितताएं और फर्जीवाड़ा मिल चुका है। इन रिपोर्ट्स को लेकर भी पूछताछ की गई है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उनकी कमाई और लेन-देन के पीछे कितनी पारदर्शिता है। साथ ही, ईडी टीम मछली ठेके से संबंधित सभी वित्तीय गतिविधियों को भी ट्रैक कर रही है, ताकि यह पता चल सके कि इन गतिविधियों के जरिए कोई अवैध संपत्ति तो नहीं बनाई जा रही थी।
सौरभ शर्मा की कंपनियों से जुड़ी बड़ी जांच
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, लोकायुक्त की जांच अब सौरभ शर्मा के कर्मचारियों, रिश्तेदारों और करीबी परिचितों तक फैल सकती है। बताया जा रहा है कि लोकायुक्त ने सौरभ शर्मा की कंपनियों में कार्यरत 50 से अधिक कर्मचारियों की सूची तैयार कर ली है, और उन्हें जांच के दायरे में लाने की संभावना है।
इसके अलावा, सौरभ के 18 प्रमुख रिश्तेदारों को भी नोटिस जारी किए जा चुके हैं, और उनकी भूमिका पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है। लोकायुक्त के अधिकारियों का मानना है कि सौरभ शर्मा और उसके करीबी लोग इस मामले में किसी प्रकार की मिलीभगत में हो सकते हैं, जिससे यह मामला और भी जटिल हो सकता है।
यह कदम सौरभ शर्मा के खिलाफ चल रही जांच की गंभीरता को और बढ़ा देता है, और यह संकेत देता है कि इस घोटाले के कई स्तर हो सकते हैं, जिसमें न केवल सौरभ बल्कि उसके परिवार और कर्मचारियों की भी भूमिका हो सकती है।
यह कार्रवाई इस बात को भी स्पष्ट करती है कि लोकायुक्त और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और उनकी जांच में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। अब देखना यह है कि आगे आने वाले समय में सौरभ शर्मा के रिश्तेदारों और कर्मचारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।












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