Datia News: BJP छोड़कर कांग्रेस में आए अवधेश नायक को टिकट मिलने पर कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का फूटा गुस्सा
संवाद सूत्र - पंकज श्रीमाली
MP News: मध्य प्रदेश में कांग्रेस उम्मीदवारों की पहली सूची आने के बाद कई जगह विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं और कार्यकर्ता उम्मीदवार बदलने की मांग पर उतर आए हैं। इस सूची में कई ऐसे नाम हैं, जो दूसरे दलों से कांग्रेस में शामिल हुए हैं। इसी के चलते विरोध और असंतोष के स्वर जोर पकड़ने लगे हैं।
कांग्रेस ने दतिया से भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए अवधेश नायक को उम्मीदवार बनाया तो बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। दतिया के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने कमलनाथ के नाम खुला पत्र लिखा है और उसमें कहा है कि अवधेश नायक को पार्टी ने उम्मीदवार बनाकर स्थानीय कार्यकर्ताओं की भावनाओं को गहरी चोट पहुंचाई है।

दतिया विधानसभा सीट से गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के सामने पैराशूट उम्मीदवार अवधेश नायक को चुनावी मैदान में उतराने के बाद कांग्रेस नेता राजेंद्र भारती के समर्थक सड़क पर उतरकर विरोध दर्ज कराने के साथ नारेबाजी कर रहे है। दतिया विधानसभा सीट हाई प्रोफाइल सीट मानी जाती है। 2008 के बाद इसे नरोत्तम का गढ़ कहा जाता है।लेकिन 6 अगस्त, 2023 को, आरएसएस विचारधारा के पथप्रदर्शक ने अपने वैचारिक मतभेदों को भुला भोपाल में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं दिग्विजय सिंह और कमल नाथ की उपस्थिति में कांग्रेस में शामिल हो गए। तभी से माना जा रहा था कि पार्टी उन्हें नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ उतरेगी और आखिरकार पार्टी ने उनका टिकट दे ही दिया इसके बाद अब पार्टी में भी असंतोष देखने को मिल रहा हैं देखना यह होगा कि अवधेश नायक कैसे इसका हल निकालते हैं।
दतिया उन 66 सीटों में से एक है, जहां कांग्रेस पार्टी पिछले तीन चुनावों में नहीं जीत पाई है। उन कमजोर सीटों पर पार्टी की स्थिति मजबूत करने के लिए नाथ ने अपने मित्र और सबसे लंबे समय तक एमपी के कांग्रेस मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह को जिम्मेदारी सौंपी। चार महीने के दौरे में, सिंह ने सभी सीटों पर विभिन्न जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं से मुलाकात की और पिछले महीने नाथ को रिपोर्ट सौंपी।
2003 का विधानसभा चुनाव भाजपा के टिकट पर लड़ा लेकिन कांग्रेस के घनश्याम सिंह से 2904 वोटों से हारे
नायक ने 2003 का विधानसभा चुनाव भाजपा के टिकट पर दतिया से लड़ा लेकिन कांग्रेस के घनश्याम सिंह से 2904 वोटों से हार गये। पूर्व आरएसएस नेता पर 2003 के विधानसभा चुनावों से पहले बहुसंख्यक वोटों को एकजुट करने के लिए सांप्रदायिक तनाव फैलाने का भी आरोप लगाया गया था।












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