Damoh: विंध्य पहाड़ी पर क्रेशर का विरोध, विधायक रामबाई बोली- विधानसभा तक मामला ले जाएंगे
सागर, 11 सितंबर। मप्र के दमोह जिले की पथरिया विधानसभा में मौजूद विध्यपर्वत माला के एक हरे-भरे पहाड़ पर शासन द्वारा क्रेशर की लीज स्वीकृत करने के बाद अब विरोध शुरु हो गया है। पथरिया से बसपा की तेजतर्रार विधायक रामबाई ने इस मामले में विरोध जताते हुए कहा कि जब पहाड़ बना नहीं सकते तो उसे मिटाने का अधिकार किसी को नहीं है। क्रेशर को नियमों की अनदेखी कर लीज दी गई है। चरनोई की भूमि है और पर्यावरण संरक्षण में यह पहाड़ महत्वपूर्ण हैं, बावजूद इसके धार्मिक और पर्यावरण महत्व के इन पहाड़ों को नष्ट नहीं होने देंगे। मामले को विधानसभा तक ले जाएंगे।

जानकारी अनुसार दमोह जिले के पथरिया इलाके में शासन ने कुछ समय पहले क्रेशर को लीज स्वीकृत दी थी। इसको लेकर समाजसेवी और स्थानीय लोग शुरु से ही विरोध कर रहे हैं। इसमें आरटीआई और सीएम हेल्पलाइन भी लगाई गई थीं। जब मामला नहीं निपटा और क्रेशर संचालकों ने राजस्व की इस भूमि पर क्रेशर लगाकर खुदाई प्रारंभ कर दी। पेड़ों को काटना शुरु कर दिया तो विरोध का तरीका बदल गया। मामला इलाके की तेजतर्रार एमएलए रामबाई तक पहुंच गया। विधायक रामबाई मौके पर निरीक्षण करने पहुंची और मौके पर ही राजस्व विभाग के अधिकारियों को भी बुलाया गया। बताया गया कि लीज सारे नियमों के तहत दी गई है तो विधायक ने आपत्ति जताते हुए कहा कि यदि राजस्व की हजारों हेक्टेयर भूमि खाली पड़ी होगी तो सारी जमीन पर के्रेशर लगाकर खुदाई शुरु करवा दोगे?
विधायक का सवाल-गोचर की भूमि को क्रेशर के लिए कैसे लीज पर दे दिया
विधायक रामबाई ने मौके पर निरीक्षण किया और एनजीटी व खनिज विभाग के नियमों के अनुसार लीज के मामले का परीक्षण करते हुए खनिज अधिकारियों को फटकार भी लगाई। उन्होंने तल्ख लहजे में कहा कि राजस्व रकबे में पहाड़ की भूमि आएगी तो क्या उसे नष्ट कर दिया जाएगा। क्या उसे संरक्षित और सुरक्षित नहीं करना चाहिए। पर्यावरण को सुरक्षित नहीं किया जाना चाहिए था। आप लोग सदियों पुराने इन पहाड़ों को नष्ट करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसमें सबसे बड़ी गलती उन अधिकारियों की जिन्होंने हरी-भरी पहाड़ी को देखे बिना ही क्रेसर मशीन की लीज दे दी।
क्रेशर संचालक ने तीन साल में मात्र 50 पौधे लगाए
खनिज विभाग ने जिस विंध्य पहाड़ी पर क्रेशर की लीज दी है, नियमानुसार वहां पर क्रेशर संचालक को हजारों की संख्या में पौधरोपण करना था, ताकि पर्यावरण को होने वाले नुकसान की भरपाई की जा सके। आरटीआई कार्यकर्ता हरवेंद्र सिंह ने बताया कि यहां पर सैकड़ों एकड़ जमीन ऐसी है जो कागजों में तो राजस्व के नाम पर दर्ज है, लेकिन विभाग का आधिपत्य नहीं हैं। इस कारण विभाग ने पहाड़ी इलाके को क्रेशर के लिए लीज पर दे दिया हैं। हरवेंद्र ने इस मामले में आरटीआई भी लगाई थी और सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत भी दर्ज कराई थी, लेकिन विभाग ने उनकी शिकायत का निराकरण किए बगैर ही झूठा पंचनामा बनाकर फोर्स फुली शिकायत बंद करा दी हैं। मौके पर यहां पर एनजीटी, पर्यावरण और शासन के नियमों का खुला उल्लंघन हो रहा है।












Click it and Unblock the Notifications