Damoh: गंगा-जमना स्कूल को हिजाब विवाद में मान्यता निरस्त करने नोटिस

हिजाब और धर्मांतरण विवाद से घिरी दमोह जिले की गंगा-जमना स्कूल की मान्यता निलंबन के बाद अब मान्यता निरस्त करने का नोटिस दिया गया है। स्कूल प्रबंधन को तीन दिन में जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं।

दमोह: गंगा-जमना स्कूल को हिजाब विवाद में मान्यता निरस्त करने नोटिस

MP के दमोह जिले की गंगा-जमना स्कूल में छात्राओं को हिजाब पहनाए जाने, स्कूल में धर्मांतरण और नमाज जैसे आरोप और मप्र बाल कल्याण समिति सदस्यों की जान के बाद बवाल मचा हुआ है। दोपहर में डीईओ का भाजपा कार्यकर्ताओं ने मुंह काला किया तो शाम को स्कूल शिक्षा विभाग ने स्कूल को मान्यता निरस्त करने का नोटिस थमा दिया।

​स्कूल शिक्षा विभाग से जारी की गई जानकारी अनुसार दमोह की निजी शासकीय शिक्षण संस्था गंगा-जमना उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के संस्था अध्यक्ष/ सचिव/ प्राचार्य को मान्यता नियम 2017 एवं मान्यता संशोधन नियम 2020 के नियम 5 एवं 9 के तहत स्कूल की मान्यता निरस्त करने का नोटिस दिया गया है। नोटिस में आगामी ​तीन दिन में संस्था से जवाब प्रस्तुत करने को कहा गया है। शो-काज नोटिस के बाद मामले में स्कूल की मान्यता पूर्ण रूप से निरस्त होने की चर्चाएं भी होने लगी हैं। बता दें कि बीते दो जून को विभाग ने स्कूल की मान्यता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था।

विभाग द्वारा जारी नोटिस में यह उल्लेख किया गया है
गंगा-जमना स्कूल की मान्यता निरस्त करने संबंधित जारी आदेश में कहा गया है कि अशासकीय शिक्षण संस्था गंगा-जमना स्कूल की मध्य प्रदेश माध्यमिक उच्चतर माध्यमिक शालाओं की मान्यता नियम 11 के तहत मान्यता क्यों नहीं निरस्त की जाए। इस संबंध में संस्था अपना लिखित प्रतिवाद सुसंगत प्रमाणित दस्तावेजों के साथ 3 दिवस में संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण संभाग, सागर के समक्ष प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें। उल्लेखनीय है कि जिला शिक्षा अधिकारी, दमोह द्वारा अशासकीय शिक्षा संस्था गंगा-जमना उच्चतर माध्यमिक विद्यालय (डाइस कोड-23120318304) के किए गए निरीक्षण में मध्यप्रदेश माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक शालाओं की मान्यता नियम 2017 (7)(1) के तहत उक्त अशासकीय शिक्षण संस्था की मान्यता तत्काल प्रभाव से निलंबित की गई है।

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    यह है मामला
    बता दें कि स्कूल परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद संस्था ने एक बोर्ड लगाकर अव्वल आने वाले छात्र-छात्राओं की फोटो लगाकर एक होर्डिंग लगाया था। इसमें कई छात्राओं को हिजाब पहनाया गया था। स्कूल में सिलेबस के विरुद्ध धार्मिक शिक्षा दिए जाने का खुलासा मप्र बाल अधिकार आयोग की टीम के निरीक्षण के दौरान किया था। मामले में विवाद के बाद जिला प्रशासन ने जांच बैठाई थी। इसमें डीईओ और कलेक्टर तक पर संस्था को बचाने और सपोर्ट करने के आरोप लग रहे हैं। खुद स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने मंगलवार को कलेक्टर और डीईओ की भूमिका को संदिग्ध बताया है।

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